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क्या सलीके से दर्शन होने पर भगवान का महत्व कम हो जाता है

दलित-ब्राह्मणवाद को रामबाण बनने से रोकना होगा

मराठी भाजपा अध्यक्ष की चुनौतियां

अब कितनी सनसनी होती है

ऐसा चमत्कार कैसे हो जाता है

ये हिंदी की लड़ाई थी ही नहीं

ये सोचकर करना-होना जरा मुश्किल था

ढोंगी बाबाओं के अमीर भक्त

इलाहाबाद का रिक्शा बैंक

कहिए कि इसी वजह से गरीब रथ इतनी बची हुई है

अब लगने लगा है कि गरीब रथ है

बिटिया के बहाने

निजी जिंदगी की अहम पदोन्नति

अमर प्रभाष जोशी

फिर से पूछ रहा हूं घूरा बनने में कितना दिन लगता है

ये पूरा बेड़ा गर्क करके ही मानेंगे

इलाहाबाद से बदलाव के संकेत

इलाहाबाद में हिंदी ब्लॉगिंग और पत्रकारिता पर चर्चा

ठीक-ठीक सोच तो लो कि क्या करना है

दौड़ादौड़ी की झमाझम चर्चा

ई बतकही के बड़ मनई हैं

करीब 3 घंटे तो ‘अमितमय’ ही रह गए