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विचार महत्वपूर्ण या व्यवहार

विचार ही असल है। विचार कभी मरता नहीं है। विचार जीवित रहे तो सब जीवित रहता है। हममें से ज्यादातर की सोच कुछ ऐसी ही रहती है। और शायद यही वजह है कि हम ज्यादातर घटनाओं, बदलावों को दूसरे नजरिये से ही देखते, समझते रहते हैं। हमारी सारी लड़ाई, तर्क यहीं जाकर अंटक जाते हैं कि फलाना विचार सफल हो गया है और ढिमकाना विचार असल हो गया है। फिर उस विचार को हम नाम दे देते हैं। धर्म (धर्म के नाम पर जो, जो याद आ रहा हो जोड़ लीजिए मैं कितना लिख सकूंगा और मुझे तो सब पता भी नहीं है), कर्मकांड, पंथ (दक्षिणपंथ, वामपंथ, तटस्थ, तुष्टीकरण ... ऐसे और ढेर सारे)। फिर बात होती है कि इस विचार की ताकत देखिए कि इतनी बड़ी क्रांति हो गई। बात होती है कि उस विचार की ताकत देखिए सब क्रांति धरी की धरी रह गई। फिर बात होती है कि ये विचार ही तो है कि इतनी बड़ी पार्टी हर झटके से उबर गई। उसी में ये भी बात होती है कि वो विचार ही तो उस पार्टी को ले डूबा। हम ऐसे ही बात करते हैं। विचार, विचारक- हम इसी में निपटे जाते हैं।
फिर हम नाम जोड़कर विचार को जोड़ देते हैं। राम का विचार, कृष्ण का विचार, दयानंद, विवेकानंद का विचार, मार्क्स, लेनिन …

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हिंदी को लेकर हम काफी हलाकान हुए रहते हैं। और इधर ये भरोसा बढ़ा है कि जब @narendramodi प्रधानमंत्री हो गए हैं तो हिंदी भी प्रधान भाषा हो जाएगी। लेकिन, जरा भारतीयों के लिए हिंदी के कंप्यूटर प्रयोग के सबसे बड़े मंच, साधन गूगल की तरफ ध्यान से देखिए। गूगल हिंदी ब्लॉगरों को विज्ञापन तो नहीं ही देता है। इसीलिए हिंदी ब्लॉगिंग सिर्फ शौक है। Google का कोई भी ऑफीशियल ब्लॉग पन्ना हिंदी में है ही नहीं। जाने कौन कौन सी भाषा में लोगों को गूगल अपनी योजनाओं, तकनीक की जानकारी दे रहा है लेकिन, भारतीयों के लिए सब अंग्रेजी में हैं। गजब है हम इत्ते अंग्रेज हो गए हैं। आप भी इस पन्ने पर जाइए और खुद देखिए।http://www.google.com/press/blog-directory.html  गूगल का जो इंडिया ब्लॉग है वो कहता है
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