सत्यसाईं बाबा के चरणों में गिरे महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण की तस्वीरें ज्यादा दिन नहीं हुआ जब मीडिया में लगातार छाई हुईं थीं। मेरे मन में इसे लेकर कुछ सवाल उठे थे। वैसे सत्यसाईं के चरणों में गिरने वालों में अशोक चव्हाण ही नहीं थे। ICICI बैंक के चेयरमैन के वी कामत, रिलायंस के पी एम एस प्रसाद और जाने कितने बड़े-बड़े लोग थे।
फिर जब मैंने थोड़ा जोर देकर सोचने की कोशिश की तो, मुझे दिखा कि इस साईं बाबा के तो कोई कम पैसे वाले भक्त मुझे दिखते ही नहीं। अभी इलाहाबाद में हूं तो, ऐसे ही घूमते शहर के सबसे पॉश सिविल लाइंस की बाजार में शहर की सबसे ऊंची इमारत इंदिरा भवन से भी बड़े सत्यसाईं दिख गए। 9 मंजिले इंदिरा भवन से भी ऊंचे साईं का कटआउट भी चमत्कार जैसा ही दिख रहा था। वैसा ही ढोंगी चमत्कार जिस चमत्कार का जाने कितनी बार अंधनिर्मूलन संस्था और टीवी चैनलों ने पर्दाफाश किया है।
थोड़ा आगे बड़े तो, सिविल लाइंस वाले हनुमान मंदिर वाले चौराहे पर ही सत्यसाई के कार्यक्रम का पूरा विवरण मिला तो, पता चला कि सत्यसाईं 84 साल के हो रहे हैं। उसी होर्डिंग से ये भी पता चला कि सत्यसाईं के जन्मदिन का कार्यक्रम 23 नवंबर के शहर के महंगे रिहायशी इलाकों में से एक अशोक नगर में है। जाहिर है इन बाबा को शायद इलाहाबाद के सिविल लाइंस और अशोक नगर से बाहर के भक्त चाहिए भी नहीं। क्योंकि, इन भक्तों को बाबा चमत्कार से सोने की चेन निकालकर आशीर्वाद देते हैं तो, ये बड़े वाले भक्ते हुंडियां बाबा के चरणों में डाल देते हैं। अब बेचारे असर साईं के भक्त तो शिरडी में उनके दर्शन से ही चमत्कार की उम्मीद में रहते हैं। मैं भी शिरडी गया हूं। किसी तस्वीर में शिरडी वाले साईं बाबा तो बहुत अच्छे कपड़ों में नहीं दिखे। हां, उनके चमत्कार दूसरे बताते अब भी मिल जाते हैं। ये पुट्टापरथी वाले सत्यसाईं लकदक कपड़ों में रहते हैं अपने चमत्कार किसी जादूगर की तरह खुद दिखाते हैं। अब यहां तो मीडिया इनकी तारीफ भी नहीं करता बल्कि, कपड़े उतारता रहता है फिर भी जाने क्यों ...
देश की दशा-दिशा को समझाने वाला हिंदी ब्लॉग। जवान देश के लोगों के भारत और इंडिया से तालमेल बिठाने की कोशिश पर मेरे निजी विचार
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Saturday, November 14, 2009
Sunday, November 01, 2009
फिर से पूछ रहा हूं घूरा बनने में कितना दिन लगता है
2000-2001 में इलाहाबाद महाकुंभ में रिपोर्टिंग के समय दुनिया भर के बाबाओं और साधुओं की हकीकत देखी थी। ऐसा नहीं है कि सब ढोंगी ही थे। कई संत ऐसे भी थे जिन्हें देखकर-मिलकर उनकी संगत का मन होता था। लेकिन, बड़ी संख्या ऐसे ही बाबाओं की थी जिनके लिए प्रयाग के महाकुंभ की रेती पर उनका आश्रम विदेशी-देसी मालदार भक्तों को बढ़ाने का जरिया भर था। मुझे याद है कि रिपोर्टिंग के दौरान एक रमेश तांत्रिक के आश्रम में हम लोग पहुंच गए थे। अब मुझे नहीं पता कि वो, तांत्रिक होने का दावा करने वाला बाबा क्या कर रहा है। लेकिन, उस समय वो सिर्फ और सिर्फ विदेशियों को नशे की पिनक में रेती पर लोटने का आनंद देकर उनसे ज्यादा से ज्यादा वसूली का तंत्र फैला रहा था। हम लोगों को वो ज्यादा सम्मान इसलिए भी दे रहा था कि उसका फंडा एकदम साफ था। उसने कुटिल मुस्कान के साथ कहाकि देखो अखबार-टीवी से विदेशी भक्त नहीं मिलेंगे। विदेशी भक्त तो इंटरनेट से मिलेंगे।
उस समय मैं http://www.webdunia.com/ के लिए रिपोर्टिंग कर रहा था। आपको लग रहा होगा अचानक मुझे करीब 10 साल पहले की घटना क्यों याद आ रही है। दरअसल इसके याद आने के पीछे एक वजह ये भी है कि इसी समय एक वीडियो मैंने देखा था जिसमें सत्यमसाईं बाबा के चमत्कारों की असलियत बताई गई थी। दिखाया गया था कि किस तरह से सत्यसाईं लोगों की आंखों में धूल झोंक रहे हैं। आज अचानक जब मैं आज इंदिरा गांधी के विशेष कार्यक्रमों की खोज में टीवी पर पहुंचा तो, खबर दिखी किस तरह से ढोंगी सत्यसाईं के चरणों में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री के साथ पूरी सरकार झुकने को बेताब है। मुझे लगा कि क्या तमाशा है चव्हाण और उनकी पूरी सरकार कैसे पूरे राज्य को एक ऐसे व्यक्ति का अअंधभक्त बनने के लिए प्रेरित कर सकती है जिसके चमत्कारों की पोल देसी-विदेशी, हिंदी-अग्रेजी चैनल जाने कितनी बार खोल चुके हैं।
अब अगर अशोक चव्हाण को उनके मुख्यमंत्री बनने में बाबा का चमत्कार दिख रहा है तो, इसके लिए सत्यसाईं बड़े अपराधी साबित होंगे क्योंकि, चव्हाण को मुख्यमंत्री इसलिए बनाया गया कि तब के कांग्रेसी मुख्यमंत्री विलासराव देशमुख मुंबई और देश की शान ताज पर हमले को भांप-समझ नहीं पाए। उसके बाद जो, घटनाक्रम बने उस शर्म-छीछालेदर से बचने के लिए कांग्रेस को चव्हाण को मुख्यमंत्री बनाना पड़ा। चव्हाण नेताओं में नौजवान थे। मैं उस समय मुंबई में ही था अच्छा लगा था। लेकिन, इस तरह से अशोक चव्हाण सत्यसाईं के चरणों में लोट जाएंगे अंदाजा न था। टीवी की फुटेज में कांग्रेस-एनसीपी सरकार के ढेर सारे मंत्रियों के अलावा पुराने गृहमत्री शिवराज पाटिल भी दिख रहे थे। पता चला कि मुख्यमंत्री के सरकारी निवास 'वर्षा' पर अशोक चव्हाण सत्यसाईं का चरण पूजन करेंगे।
अशोक चव्हाण ने इससे पहले बाबा को बांद्रा वर्ली सी लिंक भी घुमाया था ताकि, पुल को बाबा का 'आशीर्वाद' मिल सके। अब सोचिए खबर जब इसे बरसों की मेहनत के बाद बनाने वाले इंजीनियरों-मजदूरों को पता चली होगी तो, उनके दिल पर क्या गुजरी होगी। खैर, ऐसे बाबाओं के किस्से अनंत हैं और इनके चरणों में गिरने वाले राजनेताओं के भी। नरसिंहाराव के समय में तांत्रिक चंद्रास्वामी के जलवे तो किसी को भूले नहीं होंगे। अब तो बस यही लगता है कि काश घूरा बनने का भी समय तय होता
उस समय मैं http://www.webdunia.com/ के लिए रिपोर्टिंग कर रहा था। आपको लग रहा होगा अचानक मुझे करीब 10 साल पहले की घटना क्यों याद आ रही है। दरअसल इसके याद आने के पीछे एक वजह ये भी है कि इसी समय एक वीडियो मैंने देखा था जिसमें सत्यमसाईं बाबा के चमत्कारों की असलियत बताई गई थी। दिखाया गया था कि किस तरह से सत्यसाईं लोगों की आंखों में धूल झोंक रहे हैं। आज अचानक जब मैं आज इंदिरा गांधी के विशेष कार्यक्रमों की खोज में टीवी पर पहुंचा तो, खबर दिखी किस तरह से ढोंगी सत्यसाईं के चरणों में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री के साथ पूरी सरकार झुकने को बेताब है। मुझे लगा कि क्या तमाशा है चव्हाण और उनकी पूरी सरकार कैसे पूरे राज्य को एक ऐसे व्यक्ति का अअंधभक्त बनने के लिए प्रेरित कर सकती है जिसके चमत्कारों की पोल देसी-विदेशी, हिंदी-अग्रेजी चैनल जाने कितनी बार खोल चुके हैं।
अब अगर अशोक चव्हाण को उनके मुख्यमंत्री बनने में बाबा का चमत्कार दिख रहा है तो, इसके लिए सत्यसाईं बड़े अपराधी साबित होंगे क्योंकि, चव्हाण को मुख्यमंत्री इसलिए बनाया गया कि तब के कांग्रेसी मुख्यमंत्री विलासराव देशमुख मुंबई और देश की शान ताज पर हमले को भांप-समझ नहीं पाए। उसके बाद जो, घटनाक्रम बने उस शर्म-छीछालेदर से बचने के लिए कांग्रेस को चव्हाण को मुख्यमंत्री बनाना पड़ा। चव्हाण नेताओं में नौजवान थे। मैं उस समय मुंबई में ही था अच्छा लगा था। लेकिन, इस तरह से अशोक चव्हाण सत्यसाईं के चरणों में लोट जाएंगे अंदाजा न था। टीवी की फुटेज में कांग्रेस-एनसीपी सरकार के ढेर सारे मंत्रियों के अलावा पुराने गृहमत्री शिवराज पाटिल भी दिख रहे थे। पता चला कि मुख्यमंत्री के सरकारी निवास 'वर्षा' पर अशोक चव्हाण सत्यसाईं का चरण पूजन करेंगे।
अशोक चव्हाण ने इससे पहले बाबा को बांद्रा वर्ली सी लिंक भी घुमाया था ताकि, पुल को बाबा का 'आशीर्वाद' मिल सके। अब सोचिए खबर जब इसे बरसों की मेहनत के बाद बनाने वाले इंजीनियरों-मजदूरों को पता चली होगी तो, उनके दिल पर क्या गुजरी होगी। खैर, ऐसे बाबाओं के किस्से अनंत हैं और इनके चरणों में गिरने वाले राजनेताओं के भी। नरसिंहाराव के समय में तांत्रिक चंद्रास्वामी के जलवे तो किसी को भूले नहीं होंगे। अब तो बस यही लगता है कि काश घूरा बनने का भी समय तय होता
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