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चिदंबरम साहब इतनी भी नहीं सुधरी है अर्थव्यवस्था

12 जून को अंतर्राष्ट्रीय रेटिंग एजेंसी फिच ने भारत की रेटिंग बढ़ाने का एलान किया। हालांकि, इसे अगर ध्यान से समझें तो ये रेटिंग बढ़ने से ज्यादा बद से बदतर हुई साख के थोड़ा सुधरने का मसला था। लेकिन, लंबे समय से ऐसी किसी खबर के इंतजार में बैठी सरकार और उसके वित्त मंत्री के लिए इससे बेहतर खबर भला क्या हो सकती थी। फिच के मुताबिक अब भारत में निवेश करने वालों के लिए माहौल बेहतर हुआ है। ढेर सारे आर्थिक सुधारों की जरूरत है लेकिन, सरकार सही रास्ते पर जा रही है। और, इसीलिए रेटिंग एजेंसी ने भारत का आउटलुक निगेटिव से बढ़ाकर स्थिर कर दिया। और, सरकार के वित्त मंत्री पी चिदंबरम को भी फिर से वित्त मंत्रालय में आए 9 महीने भी बीत चुके हैं। ठीक 9 महीने बाद आई इस शुभ खबर के बहाने वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने देश को ये बताने की कोशिश की कि उनके आने के बाद अर्थव्यवस्था के हालात कितने बेहतर हुए हैं। इसलिए रेटिंग सुधरने के अगले दिन चिदंबरम साहब मीडिया के जरिए देश के सामने थे। रेटिंग सुधारने के फिच के फैसले के जरिए उन्होंने समझाने की कोशिश कि ज्यादातर मोर्चों पर अर्थव्यवस्था पूरी तरह से पटरी पर लौट आई है। और जह…