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Showing posts from May, 2015

दस प्रतिशत की तरक्की के सपने की मजबूत बनी बुनियाद

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नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने की आहट भर से भारतीय शेयर बाजार में जबर्दस्त तेजी देखने को मिली थी। पिछले तीन साल से लगातार सत्ताइस से अट्ठाइस हजार के बीच घूमने वाले सेंसेक्स ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार में भरोसा दिखाते हुए तीस हजार का जादुई आंकड़ा पार कर लिया। लेकिन, संसद के बजट सत्र के दूसरे चरण में कई अहम बिलों के पास न हो पाने और टैक्स संबंधी मामलों पर अनिश्चितता से ये सवाल खड़ा होता है कि शेयर बाजार के लिए नरेंद्र मोदी की सरकार कितनी अहम है। और क्या शेयर बाजार की अभी की गिरावट या प्रधानमंत्री बनने की आहट के समय की तेजी से सरकार के एक साल के कामकाज का आंकलन किया जा सकता है। इस सवाल का जवाब निश्चित तौर पर यही है कि भारत पी वी नरसिंहाराव के समय में जिस ग्लोबल विलेज में शामिल हुआ। उससे निश्चित तौर पर शेयर बाजार के संकेत अर्थव्यवस्था की मजबूती या कमजोरी का संकेत देते हैं। लेकिन, यहां एक बात समझनी होगी कि शेयर बाजार के एक दो दिन के कारोबार या एक दो महीने की गिरावट या तेजी से अर्थव्यवस्था में मजबूती या गिरावट का अंदाजा लगाना समझदारी नहीं होगी। नई सरकार के एक साल पूरे होने पर …

ऊं नम: शिवाय!

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लगभग हर रोज इनसे पार्क में मुलाकात हो जाती थी। इनके सामने से कोई आ रहो वो इनसे बच जाए, संभव ही नहीं है। उसे रोककर ऊं नम: शिवाय बोलकर अभिवादन करेंगे और प्रयास ये कि वो भी यही अभिवादन करके आगे बढ़े। दूध का एक डब्बा इनके हाथ में होता है। वेशभूषा से मुझे हमेशा यही लगा कि किसी बगल के गांव के होंगे और सामने की किसी सोसायटी में दूध देने जा रहे होंगे। खैर, ये न पूछना बनता था। न मैंने कभी पूछा। और ये गजब के शिव भक्त हैं। एक दिन तो मैंने देखा एक मोहतरमा अपने कुत्ते के साथ टहल रहीं थीं। उस कुत्ते को भी इन्होंने ऊं नम: शिवाय बोला। मोहतरमा ने भी मुस्कुराते हुए सकुचाते हुए ऊं नम: शिवाय बोला। एक दिन मैं अपने सामने की सोसायटी में गया। अमोली वहां ओडिशी नृत्य सीख रही है। नीचे लॉबी में वो फिर मिल गए। मेरे साथ छोटी बिटिया नवेली भी थी। उन्होंने मुझे ऊं नम: शिवाय कहा मैंने भी वही अभिवादन किया। फिर वो नवेली से ऊं नम: शिवाय का अभिवादन कर रहे थे। नवेली ने ऊं नम: शिवाय नहीं बोला तो, उन्होंने कहाकि बिटिया को घर में मंत्र सिखाइए। मैंने कहा घर में सीखती है। उन्होंने कहा कि ये बड़ी मुश्किल है आजकल के बच्चे इस सबको…

बेवकूफ कौन- आम आदमी पार्टी या दिल्ली की जनता?

अरविंद केजरीवाल की एक के बाद एक क्रांतिकारी हरकतों के बाद कई लोग दिल्ली की जनता का मजाक उड़ाते दिख रहे हैं। क्योंकि, दिल्ली की जनता ने साल भर में ही दो बार अरविंद और उनकी आम आदमी पार्टी को सत्ता सौंपी। अब जरा सोचकर देखिए कि दिल्ली की जनता कितनी समझदार है। उसका मजाक उड़ाने वाले मूर्खता कर रहे हैं। लोकतंत्र संतुलित रहे, इसे दिल्ली की जनता ने तय कराया। बीजेपी दिल्ली चुनाव के समय जिस तरह का व्यवहार कर रही थी, क्या उस समय बीजेपी का दिल्ली जीतना लोकतंत्र के लिए बेहतर होता। अरविंद को राजनीति के एक नए प्रयोग के तौर पर दिल्ली की जनता ने परखने की कोशिश की। एक बार अल्पमत में और दोबारा बहुमत में सत्ता देकर। भारतीय राजनीति और लोकतंत्र की यही खूबी है। जब कांग्रेस पार्टी पूर्ण बहुमत के साथ लोकतंत्र में राजशाही जैसा व्यवहार करने लगी थी। तभी क्षेत्रीय पार्टियों का उदय हो गया। और ऐसा उदय हुआ कि कांग्रेस को इन क्षेत्रीय पार्टियों के सामने नाक रगड़नी पड़ी। राष्ट्रीय पार्टियों की तानाशाही से क्षेत्रीय पार्टियों के चंगुल में फंसी राष्ट्रीय पार्टियों की सरकार का चक्र पूरा हुआ। लगने लगा था कि अब तो देश में प…

पप्पू पंडित की दुकान!

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वैसे तो ये देखने में जय श्रीराम हनुमान का मन्दिर दिखता है। लेकिन, असल में ये पप्पू पंडित की निजी दुकान है और वो भी पक्का वाला अतिक्रमण करके। नोएडा सिटी सेंटर से सेक्टर 70 चौराहे की और चलेंगे तो, होशियारपुर बाजार के सामने सड़क के बीच की जगह में ये मंदिर बना है। ऐसा मंदिर, मस्जिद या फिर ऐसा कोई भी धर्म स्थान अधर्म को बढ़ावा दे रहा है। अधिकारी भी इसके पक्की तौर हिंदुओं की भावना में बसे श्रीराम, हनुमान हो जाने का इंतजार करेंगे। तब तक नहीं तोड़ेंगे।

एकाकार!

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ये दिल्ली के एक बड़े होटल की तस्वीर है। महिला, पुरुष के लिए प्रसाधन के दरवाजे पर HE या SHE की बजाए M और W लिखा है। लिखावट ऐसी है कि अलग-अलग दोनों एक दूसरे के एकदम उलट दिखते हैं। और थोड़ा समझ लें तो दोनों एक दूसरे के साथ ऐसे फिट हो जाते हैं कि लगता है एकाकार हो गए हैं। बस यही समझ का फर्क है स्त्री-पुरुष के रिश्ते के किसी भी हाल में पहुंचने का।

मेक इन इंडिया का भगवान है ग्राहक!

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ग्राहक भगवान है। ये ज्यादातर दुकानों पर लिखा दिख जाता है। अब थोड़ा आधुनिक भारत में मार्केटिंग के उस्तादों ने कंज्यूमर इज किंग में इसे बदल दिया है। अब कंज्यूमर इज किंग कहें या ग्राहक को भगवान। सच्चाई यही है कि ग्राहक देवता या किंग कंज्यूमर को अगर ठीक से समझ लिया जाए तो मेक इन इंडिया की प्रधानमंत्री की योजना अद्भुत तरीके से अर्थव्यवस्था के हक में असर दिखा सकती है। भारत में कंज्यूमर ड्यूरेबल पूरा सेक्टर है जिसकी तरक्की अगर सही तरीके से हो और इसका सही इस्तेमाल मेक इन इंडिया की महत्वाकांक्षी योजना में हो पाए तो, चमत्कार हो सकता है। देश में कंज्यूमर ड्यूरेबल्स लोगों के खर्च का चालीस प्रतिशत हिस्सा है। और सबसे बड़ी बात ये है कि कंज्यूमर ड्यूरेबल उद्योग जबर्दस्त तरीके से रोजगार के मौके बढ़ाने वाला है। कंज्यूमर ड्यूरेबल इंडस्ट्री में मिलने वाले हर एक रोजगार के मौके से तीन अप्रत्यक्ष रोजगार के मौके भी बनते हैं। इसका सीधा सा मतलब हुआ कि अगर कंज्यूमर ड्यूरेबल इंडस्ट्री में 100 लोगों को रोजगार मिला दिखता है तो, ये सीधे-सीधे चार सौ लोगों को रोजगार मिलता है। देश की कुल उद्योगों की तरक्की में कंज्यूम…