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Showing posts from March, 2010

अर्थ आवर पर मैंने बत्ती नहीं बुझाई

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दुनिया को बचाने की तथाकथित अर्थ आवर मुहिम में भारत भला कैसे पीछे रहता। और, दिल्ली-मुंबई हमेशा की तरह ऐसी प्रतीकात्मक मुहिम में इस बार भी देश में सबसे आगे रहे। कम से कम इलेक्ट्रॉनिक-प्रिंट मीडिया के जरिए तो ऐसा ही दिखा। हमेशा ही ऐसा दिखता है। लेकिन, मैं मीडिया में होने, जागरूक होने और दिल्ली से सटे दिल्ली जैसे ही नोएडा शहर में रहने के बावजूद इस अभियान से खुद को जोड़ नहीं सका।
मैंने 27 तारीख को साढ़े आठ बजे से साढ़े नौ बजे के दौरान एक भी बत्ती नहीं बुझाई। बल्कि, IPL भी देख रहा था। वैसे आमतौर पर हमारे घर में जिस कमरे में हम होते हैं या जहां जरूरत होती है वहीं की बिजली जल रही होती है। ये बचपन से आदत मिली है। इलाहाबाद से मुंबई, दिल्ली पहुंच जाने के बाद भी ये आदत बची हुई है। शायद इसीलिए मुझे ज्यादा चिढ़ हो रही थी इस भेड़ियाधसान आयोजन से। कुछ चैनलों ने तो अपने न्यूजरूम में अंधेरा करके गजब का तिलिस्म तैयार किया था।
लेकिन, ये अर्थ आवर कितना बड़ा ढकोसला था। इसका अंदाजा मुझे तब लगा जब मैंने ये अंदाजा लगाने की कोशिश की कि आखिर दुनिया भर में पिछले तीन सालों से चल रही इस मुहिम में आखिर कितनी बिजली ब…

एनसीपी में जा रहे हैं अमर सिंह?

ये सवाल फिर से खड़ा हो रहा है। हालांकि, इसकी कहीं भी चर्चा नहीं हो रही है। मीडिया में चर्चा सिर्फ इस बात की हो रही है कि अमिताभ बच्चन का अपमान कांग्रेस क्यों कर रही है। लेकिन, इस बात की तरफ शायद जानबूझकर लोग ध्यान नहीं दे रहे हैं कि अचानक अमिताभ बच्चन को कांग्रेस-एनसीपी की सरकार में एक ऐसे सीलिंक के उद्घाटन में बुलाने की वजह क्या हो सकती है जिसका शुरुआती उद्घाटन खुद कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने किया हो।
अब भले ही सी लिंक का उद्घाटन सोनिया ने कर दिया था और अब बची चार लेनों का लोकार्पण होना था। लेकिन, सच्चाई तो यही हुई कि सी लिंक की 8 लेनों में से 4 का लोकार्पण सोनिया ने किया और कांग्रेस सरकार, संगठन के न चाहते हुए भी मीडिया में जिस तरह से अमिताभ छाए हैं। बची 4 लेनों का लोकार्पण अमिताभ के हाथों ही याद किया जाएगा। अब अचानक एनसीपी को अमिताभ को सोनिया गांधी के बराबर खड़ा करने की तो नहीं सूझी होगी।
और, अगर आप ध्यान से देखें तो, अमिताभ के सीलिंक उद्घाटन समारोह में आने से सबसे ज्यादा तिलमिलाए दिख रहे हैं मुंबई प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कृपाशंकर सिंह। कृपाशंकर सिंह उत्तर भारतीय हैं, उत्तर प्र…

रामनवमी के बहाने

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रामनवमी के दिन हमारे पूरे सेक्टर में इसी तरह से छोटी बच्चियों का हुजूम घूमता दिख रहा था। ये हमारे सेक्टर की लड़कियां नहीं थीं। ये नोएडा के अतसंपन्न सेक्टरों के अगल-अगल बसे गांवों के परिवारों की बच्चियां थीं। जिन्हें अभाव की आदत होती है। ये बच्चियां हर घर की घंटी बजाकर पूछ रही थीं कि क्या कन्या खिलाना है।
दरअसल वैसे तो, देश के ज्यादातर हिस्सों में पुण्य की तलाश में 9 दिन व्रत रहने वाले कन्याओं को खिलाते हैं। इलाहाबाद में तो, मोहल्ले के लोग एक दूसरे के घर में कन्याओं को भोजन के लिए भेज देते थे। लेकिन, नोएडा के इन सेक्टरों में रहने वालों की मुश्किल ये है कि ये अपने घर की बच्चियों को किसी के यहां खाना खाने नहीं भेजना चाहते। बस बुरा लगता है और क्या। लेकिन, कन्या भोजन कराकर पुण्य भी कमाना है तो, इनकी इस दुविधा को खत्म करती हैं ये कम कमाई वाले परिवारों की बच्चियां।
अच्छा है कि इसी बहाने इन बच्चियों को रामनवमी के दिन बढ़िया पकवान के साथ कुछ दक्षिणा भी मिल जाती है। अब ये पता करने की बात है कि क्या कन्याओं को देवी समझकर ये संभ्रांत परिवार के लोग इन गरीब बस्ती की कन्याओं का पैर भी छूते हैं या नही…

मुलायम ने हराया डिंपल यादव को!

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अब तो ये सबको पता चल चुका है कि मुलायम सिंह यादव नहीं चाहते थे कि उनके घर की बहू डिंपल यादव संसद में चुनकर पहुंचे। दरअसल मुलायम को डर ये था कि संसद में डिंपल के पहुंचने पर लड़के डिंपल को देखकर सीटी बजाएंगे और भला ये नेता जी को कैसे बर्दाश्त होता। बेवजहै बेचारे अमर सिंह इस इल्जाम के ही भार से दबकर बरसों की समाजवादी निष्ठा छोड़कर अब क्षत्रिय सम्मान जगाने में जुट गए हैं।
आज मुलायम सिंह ने महिला आरक्षण के विरोध में वो सारी हदें लांघ दीं जो, उनके और लालू यादव के सांसद राज्यसभा और ये दोनों यादव नेता संसद के बाहर अब तक नहीं लांघ पाए थे। मुलायम सिंह यादव ने भरी सभा में कहाकि --- वर्तमान विधेयक में कैसी महिलाएं आएंगी। मैं आप सबके सामने कहना नहीं चाहता। इसमें बड़े-बड़े उद्योगपतियों, बड़े-बड़े अफसरों के घरों की लड़कियां आएंगी। और, उन्हें देखकर (महिला सांसदों को) लड़के सीटी बजाएंगे। उन्होंने इस बयान पर फिर से मुहर लगाते हुए कहाकि हां ऐसी ही लड़कियां चुनकर आएंगी। उसके बाद उन्होंने गांव-गांव में बड़े आक्रमण की तैयारी भी करने को अपने समाजवादी कार्यकर्ताओं को कह दिया।
अब इस पर अगर कहीं से कोई डिंपल या…

मैं महिला आरक्षण का विरोधी क्यों हूं?

आखिरकार जैसी आशंका सबको थी वही हुआ और एक बार फिर मुश्किल बाधा दौड़ पार करने के बाद आम सहमति के नाम पर कांग्रेस ने महिला आरक्षण बिल की आसान बाधा दौड़ पूरी करने से इनकार कर दिया। ज्यादातर लोग यही कहेंगे कि ये तो होना ही था। लेकिन, क्यों। इसका जवाब ज्यादातर लोग यही देंगे कि कांग्रेस यही चाहती थी। लेकिन, क्या कांग्रेस और देश की सबसे ताकतवर महिला सोनिया गांधी भी यही चाहती थीं। जवाब कड़े तौर पर ना में हैं। वैसे तो, ज्यादातर टीवी चैनलों और अखबारों ने बिल के राज्यसभा में पास होने को सोनिया गांधी का निजी संकल्प बताया ही लेकिन, मुझे एक सांसद ने जब ये बताया कि प्रणव बाबू तो, बिल के खिलाफ थे। उन्होंने कहाकि सरकार चली जाएगी, बावजूद इसके सोनिया ने कहा- सरकार जाती है तो, जाए- बिल पास कराइए। फिर कौन क्या कहता और बिल राज्यसभा में पास हो गया। फिर बिल में अड़ंगा क्यों लग रहा है। सरकार को इस मसले पर बीजेपी, लेफ्ट का पूरा समर्थन है। लेकिन, दरअसल इसी में महिला आरक्षण के अंटकने की असली वजह छिपी है।
कांग्रेस और बीजेपी भले ही व्हिप जारी करके अपने सांसदों को महिला आरक्षण पर वोट डालने के लिए राजी कर लें, सच्चाई …

हरामखोर, कमीने सिर्फ एक गर्लफ्रेंड, ब्वॉयफ्रेंड के साथ जिंदगी ... नामुमकिन है

किसी भी समाज की पहचान वहां के साहित्य और आसपास के माध्यमों की रंगत देखकर पहचाना जा सकता है। अकसर हम इस बात की चर्चा तो करते रहते हैं कि देश में हर क्षेत्र में गिरावट आ रही है। क्या नेता, क्या पत्रकार, क्या न्यायपालिका, क्या प्रशासन, व्यापारी और क्या .. कोई भी, सबका स्तर दिनोंदिन गिरता जा रहा है। अब सवाल ये है कि जिसे हम समाज की गिरावट मानकर चल रहे हैं कि उसे क्या सचमुच समाज गिरावट मान रहा है या ये पुराने-नए का ऐसा फर्क हो गया है कि नए के जीने के तरीके को पुराने लोग समाज की गिरावट मानकर खारिज कर रहे हों। पता नहीं हम तो पीढ़ी के लिहाज से न तो अतिआधुनिक में हैं न पुरातनपंथी। तो, सबसे ज्यादा भ्रमित भारत हम जैसे लोग ही हैं।
UTV Bindass चैनल पर एक शो आजकल आ रहा है इमोशनल अत्याचार। ये फिल्म DEV D के गाने कैसा तेरा जलवा ... कैसा तेरा प्यार .. तेरा इमोशनल अत्याचार। फिल्म में अभिनेता के इमोशनल अत्याचार में ढेर सारी लड़कियों के साथ संबंध थे तो, बिंदास के शो में लड़की या लड़का अपने प्रेमी की परीक्षा लेता है जिसमें अकसर लड़की का प्रेमी चैनल की हीरोइन के चक्कर में फंस ही जाता है। ये एक नमूना है। इस…

बीजेपी ने अरसे बाद सही राह पकड़ी है

इंदौर के राष्ट्रीय अधिवेशन से लौटने के बाद उत्तर प्रदेश के एक युवा बीजेपी नेता ने मुझसे कहाकि गडकरी जी अलग तो हैं। पार्टी सही रास्ते पर जाएगी। उस युवा नेता की आंखों की चमक नए अध्यक्ष नितिन गडकरी में भरोसा साफ दिखा रही थी। इसकी वजहें भी साफ हैं। गडकरी शायद पहले बीजेपी अध्यक्ष होंगे जिन्होंने राष्ट्रीय अधिवेशन में अपनी पत्नी को भी मंच पर जगह दी। राजनीतिक मंच पर पत्नी को बैठाना प्रतीकों की राजनीति है। और, नागपुर के इशारे पर अध्यक्ष बने गडकरी प्रतीकों की ये राजनीति अच्छे से समझते हैं। उन्हें साफ दिखता है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का दलितों के बीच काम करना शायद ही कभी सुर्खियां बन पाता हो लेकिन, जब कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी उत्तर प्रदेश के एक दलित के यहां रात रुके तो, वो सबसे बड़ी खबर बन गया। इसीलिए अधिवेशन से पहले गडकरी खुद एक दलित के यहां पूरी मंडली लेकर भोजन करने पहुंच गए। गडकरी पैर न छूने की बात कहते हैं, फूल लाने के बजाए उस पैसे को विदर्भ की विधवा महिलाओं के भले के लिए बॉक्स में डालने को कहते हैं। प्रतीकों की राजनीति का इस देश में बहुत महत्व है। एकदम से हिंदुत्व से नाता तोड़ने का …

देश की भगदड़ का जिम्मेदार कौन खोजेगा

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अमेरिकन आइडल की नकल पर बने इंडियन आइडल रियलिटी शो के नोएडा ऑडीशन में इंडियन आइडल बनने की चाह रखने वालों की ऐसी भीड़ उमड़ी कि आयोजकों के सारे इंतजाम धरे के धरे रह गए। अनियंत्रित भावी इंडियन आइडल्स ने जमकर हंगामा किया, भगदड़ में रौंदे गए कई आइडल अस्पताल पहुंच गए। नोएडा की सड़कों पर घंटों के लिए जाम लग गया। अखबार-टीवी चैनलों पर आयोजकों की बदइंतजामी खबर बन गई। भला हुआ कि इस भगदड़ में कोई अनिष्ट नहीं हुआ। लेकिन, क्या सचमुच कहीं-कोई इस सवाल का जवाब खोजने की कोशिश कर रहा है कि इस देश की भगदड़ की असली वजह क्या है। क्यों, हर दूसरे-चौथे देश भगदड़ लेने लगता है और अगर भगदड़ में देश के कुछलोगों की मौत हो गई तो, थोड़ी बहुत खबर बन जाती है नहीं तो, भगदड़ों के बारे में कोई चर्चा तक नहीं होती। क्या भगदड़ इस देश की नियति बन गई है।
अभी कुछ दिन ही हुए हैं जब एक और भगदड़ देश की सबसे बड़ी खबर बन गई थी। इस भगदड़ के देश की सबसे बड़ी खबर बनने के पीछे कई वजहें थीं। सबसे पहली कि ये एक स्वघोषित जगतगुरु कपालु महाराज के आश्रम में आयोजित भंडारे के दौरान हुई भगदड़ थी। दूसरी ये कि पहले के कई मंदिरों में मची भगदड़ों की …