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Showing posts from January, 2014

मनमोहिनी सिद्धांतों की कब्र पर होगी राहुल की ताजपोशी!

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भारतीय जनता पार्टी के प्रधानमंत्री पद के दावेदार नरेंद्र मोदी ने दिल्ली के रामलीला मैदान पर कहाकि दिल्ली आए थे कांग्रेसी कार्यकर्ता प्रधानमंत्री लेने और लेकर लौटे तीन गैस के बॉटल। नरेंद्र मोदी के मुंह से ये बात भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में निकली तो इस पर चर्चा भी शुरू हो गई। हालांकि, ये जुमला नरेंद्र मोदी के श्रीमुख से निकला था तो इसे सिर्फ कांग्रेस भाजपा के बीच के विरोधी बयान के तौर पर देखा जाना भी स्वाभाविक है। कुछ लोग इसे भाषण की तुकबंदी की तरह ही देख रहे हैं कि अच्छा लगता है इस तरह से अपने कार्यकर्ताओं के बीच में तुकबंदियां उछालना। और खुद राहुल गांधी 17 जनवरी की तालकटोरा वाली एआईसीसी बैठक में मान चुके हैं कि भाजपा और नरेंद्र मोदी की मार्केटिंग रणनीति इतनी अच्छी है कि वो गंजों को कंघी बेच देते हैं और अब तो उनका हेयर स्टाइल भी बनाने लगे हैं। बड़ा हिट हुआ था राहुल गांधी का ये वाला बयान और इतना ही हिट हुआ था राहुल गांधी का वो वाला बयान जिसमें वो प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से चहकते हुए कह रहे थे कि प्रधानमंत्री जी 9 सिलिंडर से घर नहीं चलता। हमें 12 सिलिंडर चाहिए। जिन्होंने …

तानाशाही विचारधारा के हैं अरविंद केजरीवाल!

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अरविंद केजरीवाल मुझे बहुत लुभाते थे। गलत कह रहा हूं सच बात ये है कि अभी भी बहुत लुभाते हैं। बिनाकिसी बहस के अरविंद केजरीवाल का खुद में भरोसा गजब है। और ऐसा ही भरोसा हमजैसे लोगों को भी अरविंद में दिखता है लेकिन, उससे भी ज्यादा भरोसा मुझे इसतर्क में दिखता है कि केजरीवाल कांग्रेस का विकल्प हो सकते हैं। या ये कहें कि दिखता था। लेकिन, अब उससे भी ज्यादा भरोसा इसतर्क में कि कांग्रेस की मदद ये मजबूती से करेंगे। ठंडी की एक रात में प्रदर्शन के दौरान जागने के बाद अरविंद केजरीवाल के ज्ञान चक्षु खुल गए हैं। पता नहीं ये दिव्य ज्ञान बीती रात ही हुआ या उससे पहले से ही है। ये दिव्य ज्ञान ये है कि आधा मीडिया नरेंद्र मोदी के साथ है और आधा राहुल गांधी के साथ। शोले फिल्म में अंग्रेजों के जमाने के जेलर असरानी की वो बात मेरे दिमाग में आ गई कि आधे दाएं जाओ, आधे बाएं जाओ- बाकी मेरे पीछे आओ। वो पिक्चर थी। कॉमेडी थी। लेकिन, अरविंद केजरीवाल तो मुख्यमंत्री हैं और प्रधानमंत्री बनने का सपना भी देखने लगे हैं। वो क्यों कॉमेडी कर रहे हैं। मीडिया के बारे में बार-बार बात होती है और ऐसा नहीं है। सोशल मीडिया पर और निजी बा…

सीधे राहुल के दिल से लाइव

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आज सुबह से देश में बड़ी बेचैनी थी। बेचैनी इस बात की नहीं थी कि  राहुल गांधी प्रधानमंत्री पद के दावेदार बनेंगे या नहीं। बेचैनी इस बात को लेकर थी कि क्या-क्या नौटंकी होगी तालकटोरा स्टेडियम में। जिस तरह से कल से देश को ये दिखाने की कोशिश हो रही थी कि लोकतंत्र मतलब कांग्रेस है उसे कांग्रेसी कार्यकर्ताओं के साथ तालकटोरा स्टेडियम से देश की जनता को लाइव देखने की बेचैनी थी। सुबह जब सोनिया गांधी के बोलते समय कांग्रेसी कार्यकर्ताओं ने राहुल-राहुल के नारे लगाने शुरू किए तो लगा कि क्रिकेट के स्टेडियम है, तालकटोरा स्टेडियम नहीं। राहुल गांधी को उठकर आना पड़ा और कहना पड़ा कि दोपहर 3.30 बजे वो अपने दिल की बात बोलेंगे। उस समय कांग्रेस प्रेसिडेंट सोनिया गांधी को देखकर, सुनकर लगा कि वो कांग्रेस अध्यक्ष नहीं, मां की तरह व्यवहार कर रही हैं जिसके लिए बेटा कभी बड़ा नहीं होता। या यूं कहें कि बेटे को वो तब तक घर से बाहर नहीं निकलने देती जब तक तय न हो जाए कि बाहर सब ठीक है। सोनिया गांधी चाहती हैं कि किसी तरह से कांग्रेस या यूपीए की तीसरी बार सरकार बनने की नौबत आ जाए और वो सीधे युवराज को राजा बना दें। खैर राहुल…

'आप' की नीति समझ में नहीं आती

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