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Showing posts from August, 2013

खुद पर भरोसा नहीं दूसरों से भरोसा करने को कहते हो !

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रुपया कब मजबूत होगा। इस सवाल के जवाब में अब हम भारतीय रुपये की मजबूती की कल्पना करते हैं तो शायद दिमाग में 64-65 का भाव अच्छा दिखता होगा। वजह ये कि जिस तेजी से रुपया डॉलर, पाउंड और दूसरी मुद्राओं के मुकाबले सरक रहा है उसमें हमें ये लगता है कि जहां है वहीं रुक जाए तो बात बन जाए। और, शायद भारत की सरकार भी ऐसे ही सोच रही है। इसी वजह से फिलहाल रुपये की मजबूती के कोई संकेत नहीं मिल रहे हैं। क्योंकि, हमारी सरकार अभी भी रुपये की मजबूती की अपनी नीति पर खास काम करती नहीं दिख रही है। हम दुनिया के भरोसे हैं। लेकिन, भारत सरकार की मौजूदा अर्थनीति को देखकर एक लाइन जो मेरे दिमाग में सबसे पहले आती है वो ये कि हम अगर दुनिया के ही भरोसे हैं तो, दुनिया फिर हमारा भरोसा क्यों करे। इसका सबसे बड़ा उदाहरण ये है कि अमेरिका, यूरोप में जब जबरदस्त मंदी आई तो हमारी सरकार ने कहाकि हम इसी वजह से कमजोर हो रहे हैं और अब जब खबरें आ रही हैं कि अमेरिका के बाजार सुधर रहे हैं तो हमारी अर्थव्वस्था में कमजोरी की वजह फिर से यही बन रही है।  वैसे सच्चाई ये भी है कि 2008-09 में जब अमेरिका, यूरोप बर्बादी के

खाना पक्का करना है तो रुपया मजबूत करो सरकार!

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मेरे एक मित्र अभी हाल ही में बैंकॉक से लौटे। लौटने के बाद उनसे बात हुई तो बड़े ही निराश स्वर में वो बोले अरे यार अपनी असल औकात जाननी हो तो एक बार विदेश होकर आओ। बैंकॉक वैसे तो पर्यटन की वजह से भारतीयों और दुनिया के लोगों को पसंद आता है। लेकिन, एक दूसरी वजह ये भी कि इलेक्ट्रॉनिक सामानों का अच्छा बाजार भी यहां है। जहां भारतीय आधुनिक तकनीक वाले इलेक्ट्रॉनिक भारत से कम कीमतों पर खरीदकर वापस आते थे। लेकिन, अब हालात बदल चुके हैं। भारतीय रुपये की गिरती कीमत ने भारतीयों की औकात दुनिया के हर कोने में घटा दी है। फिर क्या लंदन, अमेरिका जैसे दुनिया के बड़े चमकते शहर और क्या पर्यटन के ही बूते दुनिया के नक्शे पर जाना जाने वाला बैंकॉक। रुपये की कीमत डॉलर के मुकाबले गिरी ये तो रोज रोज अखबार टीवी की सुर्खियां बनने से सब जान गए हैं लेकिन, थाईलैंड की करेंसी थाई बात के मुकाबले भी हमारा रुपया रोने लगा है ये शायद हममें से कम ही भारतीयों को पता होगा। एक अमेरिकी डॉलर देकर हमारा रुपया 6 5 से ज्यादा मिल रहा है लेकिन, अगर हम वही रुपया देकर थाईलैंड के बैंकॉक में कुछ खरीदना चाहें या अपनी छुट्टियों को

ऑफिस चलोगे !

जबरदस्त उमस वाली गर्मी में बच्ची क्लास से बाहर निकला। स्कूल के गेट पर ड्राइवर उसका इंतजार कर रहा था। बच्चा आया। ड्राइवर ने यंत्रवत उसका बैग उतारा। बैग उतारते समय ही बच्चे का सवाल- ऑफिस चलोगे? ड्राइवर का तल्ख जवाब- अभी ऑफिस क्यों चलेंगे ? शाम को चलेंगे। ड्राइवर की तल्खी की वजह शायद ये रही होगी कि बच्चा लगभग हर रोज यही सवाल पूछता होगा। बच्चे ने फिर पूछा- तो कहां चलोगे? ड्राइवर का जवाब आया- डे केयर।

शीर्षक सूझ नहीं रहा!

#MumbaiGangRape की खबर आ गई थी। वो मुंबई जहां रात 2 बजे भी एक लड़की दस लड़कों के साथ घूमने जा सकती है। और, अकेले लड़के के साथ भी। और, बिना किसी लड़के के साथ भी। उस मुंबई में शाम 6 बजे एक वीरान पड़ी मिल में किसी पत्रकार बनने की शुरुआत करने वाली लड़की के साथ 5 लड़कों ने दुष्कर्म किया। उसके साथी भी था जिसे बांध दिया गया था। मुंबई से आई इस खबर के दूसरे दिन राज ठाकरे के प्रेस कांफ्रेंस करने की खबर आई। हमारे 4-5 बिहारी साथियों ने तुरंत अंदेशा जताया हो न हो इसमें बिहारी ही होंगे। और, कमाल की बात ये कि उन बिहारी साथियों ने ये मान भी लिया कि ऐसे करेंगे तो राज ठाकरे जैसों को मौका मिल ही जाएगा। डर की वजह भी थी। पिछली बार जब 2007 की आखिरी रात को मुंबई के एक होटल के बाहर एक लड़की को निर्वस्त्र करने की कोशिश हुई थी तो, राज ठाकरे ने सारा ठीकरा बिहारियों, यूपी से आए लोगों परडाल दिया था। हालांकि, वो आशंका इस बार सच साबित नहीं हुई। लेकिन, ये डर मीडिया में बना हुआ है कि बलात्कार किसने किया या गलत काम किसने किया उसके आधार पर खबर बढ़ाई जाएगी, पहचान बताई जाएगी। खैर धीरे-धीरे उस लड़की के साथ दुष्कर्

गड्ढा !

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अटल बिहारी वाजपेयी के शासनकाल में बेहतर हुई सड़कों ने देश में सड़क के रास्ते कितना यातायात बढ़ाया इसका कोई ठीक ठाक आंकड़ा मुझे नहीं मिल सका। लेकिन, नेशनल हाईवेज के सफर पर लोगों का बढ़ा भरोसा साफ दिखता है। पहले हाईवेज पर ट्रकों बसों के बीच में इक्का दुक्का ही कारें नजर आतीं थीं। दिखतीं भी थीं तो वो टैक्सी वाली कारें होती थीं। लेकिन, अब ये दृश्य उलट हो चुका हैं। सड़क के रास्ते अपनी कार से रफ्तार वाला सफर सहूलियत के लिहाज से करने का मोह मैं भी छोड़ नहीं पाता हूं। वैसे भी दिल्ली से इलाहाबाद का सफर यमुना एक्सप्रेस वे बनने के बाद और बेहतर हुआ है। इसीलिए इस बार भी मैं इलाहाबाद अपनी कार से ही गया। दिल्ली से इलाहाबाद जाने का सफर बेहद शानदार रहा और सुबह 8.30 पर नोएडा छोड़ा तो शाम 5 बजते-बजते इलाहाबाद पकड़ में आ गया। यही उम्मीद वापसी की भी थी। लेकिन, इस बार धोखा हो गया। और उस पर भी बुरा ये कि मैं सपरिवार था। अच्छा ये था कि छोटे भाई जैसा छोटे भाई का दोस्त साथ था वरना तो हाईवे का सफर बेहद मुश्किल हो जाता। NH 2 राष्ट्रीय राजमार्ग 2 जो दिल्ली से कोलकाता जाता है। मथुरा, आगरा, इटावा, कानपुर, इला

इंडिया फर्स्ट नरेंद्र मोदी प्राइवेट लिमिटेड

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नरेंद्र मोदी के विरोधी और समर्थक जितने मुखर हैं उतने शायद भारतीय राजनीति में कभी किसी नेता के नहीं रहे। नरेंद्र मोदी के विरोधी ऐसे कि गलती से कोई छोटी सी बात भी मोदी के खिलाफ हो तो उसको पहाड़ बनाने में नहीं चूकते और समर्थक भी ऐसे कि देश की हर समस्या की रामबाण औषधि मोदी को ही मानते हैं। फिर कोई नरेंद्र मोदी के रास्ते में बाधा बनता दिखता है तो, उसकी मिट्टी पलीद करने से भी नहीं चूकता। फिर वो चाहे नोबल पुरस्कार विजेता, भारत रत्न अमर्त्य सेना ही क्यों न हों। यहां तक कि पत्रकार से नेता बने चंदन मित्रा जैसे लोग भी बहककर दोबारा एनडीए की सरकार आने की आशा में अमर्त्य सेन से भारत रत्न छीनने तक की बात कर बैठते हैं। हालांकि, बाद में वो माफी मांग लेते हैं। लेकिन, अभी टीवी पर जो चेहरे नरेंद्र मोदी के समर्थक के तौर पर नजर आते हैं उनकी बात ही इस सहमति के बाद शुरू होती है कि नरेंद्र मोदी ही प्रधानमंत्री बनकर देश की सारी समस्याओं को सुलझा सकते हैं। ऐसा ही नरेंद्र मोदी की सोशल मीडिया ब्रिगेड का है। दरअसल नरेंद्र मोदी का करिश्मा ही कुछ ऐसा है। नरेंद्र मोदी का बोलना करना उनके समर्थकों को अंधभरोसा देता है