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Showing posts from August, 2012

बेशर्म होता संसदीय लोकतंत्र

संसदीय लोकतंत्र के इतिहास में ऐसा कभी नहीं हुआ। हुआ भी तो, सामने कभी नहीं आया। संसदीय कार्य मंत्री के तौर पर राजीव शुक्ला ने उपसभापति के कान में जाकर बोला। शोर बहुत होगा। पूरे दिन के लिए कार्यवाही adjourn (स्थगित) कर देना।

लेकिन, एक बात जो, इससे भी ज्यादा चुभ रही है कि मीडिया में ये खबरें आईं। एकाध चैनलों को छोड़कर किसी ने इसे बड़ा सवाल नहीं बनाया। इस तरह से मीडिया से जरूरी खबरें गायब होने पर सवाल तो, मन में उठता ही है कि क्या ये सरकार के दबाव में खबर गायब हुई।
अब कल सुबह के अखबारों का इंतजार है। साथ ही कल विपक्ष के एतराज के तरीके का भी।

भोपाल चौपाल

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विस्फोटक संजय तिवारी से बात हो रही थी तो, उन्होंने कहाकि भोपाल चलेंगे क्या। हमने कहा बताइए, कुछ खास हो तो, जरूर चलेंगे। उन्होंने कहा- नए मीडिया पर कुछ चर्चा होनी है। मैंने कहा अच्छा है, जरूर चलेंगे। भोपाल शहर इतना पसंद आता है कि वहां से आया निमंत्रण लपकने में देर क्या करना। उसके अनिल सौमित्र का फोन आया। आभासी दुनिया में पहले से परिचित थे। सोचा चलो अच्छा है भौतिक परिचय/मिलन भी हो जाएगा। अनिल जी ने मेल पर सारा विवरण भेजा। शानदार चर्चा की चुनौती वाली मेल आई थी। चर्चा के मुख्य विषय न्यू मीडिया : समस्याएं, अवसर और चुनौतियांविज्ञान के लोकव्यापीकरण में न्यू मीडिया की भूमिकाइसके अंतर्गत निम्न बिन्दु हो सकते हैं, इसे एक मित्र ने सुझाया है- 1. क्या अब नया मीडिया ही मुख्यधारा है? मीडिया बनाम न्यू मीडिया, 2. न्यू मीडिया पहुच और प्रभाव, 3. राजीनति के झरोखे से वेब मीडिया. 4. जय किसान जय विज्ञान. 5. जय किसान, जय विज्ञान. 6. भाषाई शिष्टता बनाम वेब, 6. अंतर्राष्ट्रीय वेब जगत में हिन्दी., 7. ब्लॉग बनाम माइक्रो ब्लोगिंग साईट, 8. जनांदोलन और वेब, 9. मिस्र, लीबिया और भारत?, 10. वेब जगत का आर्थिक मॉडल., 11.…