Posts

Showing posts from October, 2012

निजी कंपनियों को रियायत के रास्ते में रोड़ा थे रेड्डी

कहते हैं बदलाव हमेशा अच्छे के लिए होता है। शायद यही सोचकर यूपीए सरकार के अपने दूसरे कार्यकाल में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कैबिनेट में कई बड़े बदलाव कर डाले। लेकिन, इस बदलाव के बाद अच्छे की कौन कहे। सरकार के खिलाफ माहौल और खराब हो गया है और इस माहौल को खराब करने में सबसे बड़ी वजह बन रहा है पेट्रोलियम मंत्रालय से जयपाल रेड्डी से बाहर जाना। पेट्रोलियम मंत्रालय छिनने से रेड्डी खुद खफा हैं ये उन्होंने साबित भी कर दिया। रेड्डी वीरप्पा मोइली को मंत्रालय सौंपने नहीं आए। अरविंद केजरीवाल के ट्वीट और मीडिया में रेड्डी की रिलायंस इंडस्ट्रीज को रियायत के रास्ते में रुकावट की खबर ने सरकार के लिए मुश्किलें बढ़ा दी हैं। भ्रष्टाचार के आरोपों से जूझ रही सरकार के लिए ये एक और बड़ी मुश्किल हो गई है कि आरोप साफ लग रहे हैं कि रेड्डी की विदाई सिर्फ इस वजह से हुई है क्योंकि, रेड्डी रिलायंस को उसकी मनचाही शर्तें सरकार पर लादने की छूट नहीं दे रहे थे।

पेट्रोलियम मंत्रालय से जब मुरली देवड़ा की विदाई हुई और जयपाल रेड्डी ने पेट्रोलियम मंत्रालय का जिम्मा संभाला तो, एक संदेश साफ गया कि अब रिलायंस इंडस्ट्रीज को …

चरित्र निर्माण की शाखा नए सिरे से लगानी होगी

Image
ये बात हमेशा सच साबित होती है कि और एक बार फिर तथ्यों के साथ साबित हो रही है कि किसी भी घटना का बीज कभी न कभी पड़ता है तभी आगे जाकर वो बड़ा पौधा बन जाता है। पार्टी विद् डिफ्रेंस का दावा करती रही भारतीय जनता पार्टी आजकल अजीब स्थिति में है। सबसे ज्यादा ईमानदारी, चरित्र, शुचिता के दावे वाली इस पार्टी की मुश्किल ये हो रही है कि जब देश में लंबे अर्से के बाद आंदोलन का माहौल है और सबसे ज्यादा भ्रष्टाचार के खिलाफ मुहिम ताकतवर हो रही है तो, इस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन गडकरी पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लग रहे हैं। बड़ी मुश्किल की बात ये है कि ये राष्ट्रीय अध्यक्ष भारतीय जनता पार्टी को शुचिता, चरित्र, त्याग और ईमानदारी की शिक्षा देने वाले मातृ संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रिय होने की वजह से पद पर आसीन हुआ माना जाता है।

जब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की बागडोर संघ के पहले सरसंघचालक डॉक्टर केशवराव बलिराम हेडगेवार की तरह दिखने वाले मोहनराव भागवत ने संभाली थी तो, लगा था कि पार्टी नई उर्जा से पुराने आदर्शों को फिर से लौटा पाएगी। पार्टी बुजुर्ग हो चुकी भारत मां की तीन धरोहर अटल-आडवाणी-मुर…

एक विचार

अटल-आडवाणी-जोशी दरअसल संघ के स्वयंसेवक पहले थे। बीजेपी नेता बाद में। शुरुआती विरोध के बाद सर्वस्वीकार्य हो गए। क्या संघ अपने किसी ऐसे स्वयंसेवक को प्रचारक के तौर पर बीजेपी में नहीं निकाल सकता जिसने दरअसल त्याग का जीवन जिया हो। बेदाग हो और कम से कम 2 पीढ़ियों से जिसका ठीक संवाद हो और आगे की एक पीढ़ी से तरीके से संवाद करने लायक हो। रकम से राजनीति होती है इसे ध्वस्त करने वाला हो। ये स्थापित कर सके कि राजनीति ठीक रही तो, रकम तो, आती ही रहती है।

ये है किराया या घर की कीमत न घटने का गणित

Image
18000 रुपए महीने की नौकरी है और 18000 रुपए का 3 बेडरूम फ्लैट लेकर रहता हूं। सवाल- अरे, कैसे? जवाब- सर, नोएडा में 3 दोस्त मिलकर रहते हैं। बैचलर हैं ना। कोई लाइबिलिटी नहीं है। ये एक हैं जो, रहेंगे और दिल्ली-एनसीआर में फ्लैट-घर का किराया बढ़ाते रहेंगे।


यही नहीं हैं। एक और हैं सैनी जी। सेक्टर 55 में जनरल स्टोर, पानी की दुकान चलाते हैं। बताते हैं कि वो, क्लास 1 राजपत्रित अधिकारी रहे हैं। तब सस्ते में दुकान खरीद ली थी। अब 50 लाख से कम की क्या होगी एक बेटा विदेश में बसने के आखिरी पायदान पर है, दूसरा यहीं नोएडा में कारोबार कर रहा है। घर बैठे बोर हो जाते हैं इसलिए दुकान पर आकर बैठ जाते हैं। एक कोठी 56 में, एक कोठी, वही सस्ते दाम वाली, सेक्टर 40 या 41 में है। और, फिर निवेश करना था तो, एक फ्लैट क्रॉसिंग रिपब्लिक में भी ले लिया। अब बताइए सैनी जी और 18000 रुपए महीने कमाने वाले ये बैचलर रहेंगे तो, कोई भी आफत आकर भला घरों को सस्ता कैसे कर पाएगी। और, ये हुआ तो, 60-70% मुनाफा बनाने वाले बिल्डर 6 महीने पुराने मुनाफे पर रोते हुए घर की कीमत बढ़ाए रहेंगे। अब बताओ कोई है सस्ता घर के इंतजार में।