Posts

Showing posts from October, 2011

ये अन्ना की जीत तो बिल्कुल नहीं है!

Image
हिसार में मिले वोट- कुलदीप बिश्नोई 355941, अजय सिंह चौटाला 349618, जय प्रकाश 149785। बिश्नोई चुनाव जीते। भजनलाल के बेटे हैं। हरियाणा के गैर जाट नेता। बीजेपी के समर्थन के बिना बिश्नोई नहीं जीतते, अब तो ये साफ है। भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों से जूझ रहे चौटाला करीब साढ़े तीन लाख वोट पा गए। और, अन्ना का तो सारा आंदोलन ही भ्रष्टाचार विरोधी है। कैसे कोई कह रहा है कि अन्ना की जीत है। कांग्रेस के जयप्रकाश भी डेढ़ लाख पा गए। अब भी लोग कह रहे हैं कि अन्ना इफेक्ट है। अरे कहिए अन्ना की इज्जत बच गई। यूपी में इज्जत बचानी है तो, पहले से तैयारी कर ले टीम अन्ना।

अन्ना को ये फैसला तुरंत लेना होगा

Image
विजय चौक पर हम लोग खड़े थे। तभी खबर आई कि सुप्रीमकोर्ट के चैंबर में कुछ लड़कों ने वकील प्रशांत भूषण को पीट दिया है। तब तक किसी बीजेपी कवर करने वाले पत्रकार ने कहा- अरे तेजिंदर बग्गा ने तो मारा है। वही भारतीय जनता युवा मोर्चा वाला। हम लोग जितने लोग थे सभी पत्रकारों के मुंह से निकला- अब तो बीजेपी का बेड़ा गर्क हो जाएगा। आडवाणी की यात्रा की खबर गई काम से। अब तो, सिर्फ यही चलगा फासीवादी भाजपा का असली चेहरा। लेकिन, हमारा ये आंकलन जल्दबाजी का था। प्रशांत को पीटने वालों के पर्चे में साफ लिखा था- कश्मीर हमारा था, है और रहेगा। दरअसल ये अन्ना टीम के सदस्य अन्ना की पिटाई हुई ही नहीं थी। ये अरुंधति रॉय के दोस्त अन्ना की पिटाई हुई थी। अन्ना हजारे के साथ की वजह से भले ही प्रशांत भूषण की छवि दूसरी हो गई। और, उन्हें सम्मानित नजरों से देखा जाने लगा। लेकिन, ज्यादा समय नहीं हुआ जब प्रशांत भूषण को देखने के लिए सिर्फ विवादित नजरों का ही सहारा लेना पड़ता था। क्योंकि, बिना विवाद के प्रशांत भूषण का मतलब ही नहीं था। हाईप्रोफाइल मामलों के पीआईएल का विवाद हो या फिर। अमर सिंह सीडी विवाद। और, टीम अन्ना के सहयोगिय…

50 घंटे, 12313 फीट की ऊंचाई चूमकर वापस

Image
ये यात्रा बिल्कुल तय नहीं थी। सच तो ये था कि ये यात्रा हमारे मित्र मनीष शुक्ला की वजह से हुई। बहुत दिनों से मनीष कह रहे थे कि बद्रीनाथ दर्शन को जाना है। इच्छा हमारी भी थी लेकिन, परिवार के साथ। समस्या इसमें ये थी कि परिवार के साथ जाने के लिए समय ज्यादा चाहिए था। और, छोटे बच्चों को लेकर जाने के लिए अपनी मन:स्थिति के साथ बच्चों की स्थिति का भी ख्याल रखना था। तो, तय हुआ और हम दोनों मित्र निकल पड़े। शुक्रवार की रात 11.55 पर नई दिल्ली स्टेशन से दिल्ली-देहरादून एसी एक्सप्रेस से निकले। टिकट भी जुगाड़ डॉट कॉम से पक्का हुआ। ठीक चार बजे हम लोग हरिद्वार स्टेशन पर थे। अचानक नींद खुली तो, उठकर देखा तो, हरिद्वार आ गए थे। जल्दी से मनीष को भी जगाया और सीधे पहुंचे वेटिंग रूम में। टैक्सी वाला समय का पक्का था। फोन किया और वहीं वेटिंग रुम में फ्रेश हुए और चाय पीकर शुरू हो गई यात्रा। ऋषिकेश से ऊपर डराने वाली सड़कों का डर मनोहारी दृश्य काफी कम कर देते हैं। हम लोग चूंकि समय से करीब पांच बजे हरिद्वार से निकल चुके थे इसलिए रास्ता खाली मिल रहा था। लेकिन, प्राकृतिक बाधाओं के निशान निरंतर मिल रहे थे। हां, अच्छी ब…