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Showing posts from June, 2015

शिमला, सोनिया गांधी और सुविचार

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ये कल्पना से बाहर की बात थी। भला ये कैसे सोचा जा सकता है कि सोनिया गांधी हिंदी पर महान विचारक हो सकती हैं। वो भी केंद्र सरकार के अधीन एक सरकारी कंपनी के अतिथि विश्राम गृह में। शिमला में एनएचपीसी के अतिथि विश्राम गृह के तीनों तलों पर सीढ़ियों की शुरुआत में एक विचार पट्टिका लगी हुई है।  सबसे पहले मेरा ध्यान मुंशी प्रेमचद के विचार पर गया। अच्छा लगा कि सरकारी कंपनी के अतिथि गृह में इस तरह के सद्विचार लिखने का यत्न किया है। लेकिन, एक दूसरी ऐसी ही सद्विचार वाली तख्ती पर नजर पड़ी तो पहले उस कहे को कहने वाले से मैं जोड़ने में थोड़ा असहज हुआ। 


उसके बाद में सोचने लगा कि आखिर सोनिया गांधी के ये विचार किस हैसियत से एक केंद्र सरकार की कंपनी के अतिथि गृह में लिखे हुए हैं। अब जरा सोचिए कि क्या बीजेपी के किसी राष्ट्रीय अध्यक्ष के विचार ऐसे किसी सरकारी कंपनी के अतिथि गृह में लिखे जा सकते हैं। अभी के संदर्भ में सोचिए तो बीजेपी पूर्ण बहुमत से केंद्र की सरकार में है। अब अगर सरकारी कंपनियों के दफ्तरों और अतिथि गृहों में बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह का कहा सुविचार के तौर पर ऐसे चिपका दिया जाए तो कैसा लगेगा। सुविच…

ये अर्थव्यवस्था कमजोर हो तो, असल अर्थव्यवस्था मजबूत हो!

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कुछ ही महीने में ये दूसरी बार हुआ। मैं फिर से धोखाधड़ी का शिकार हो गया। पहली बार एक पूरे परिवार ने मिलकर बेवकूफ बनाया था। इस बार अकेली बूढ़ी महिला ने बेवकूफ बना दिया। दोनों बार मेट्रो स्टेशन के बाहर मेरे साथ ये धोखाधड़ी हुई। पहली बार बॉटैनिकल गार्डेन मेट्रो स्टेशन से निकलते और दूसरी बार अभी ताजा-ताजा पटेल चौक मेट्रो स्टेशन से निकलते। मुझे धोखा हुआ ये मुश्किल नहीं है। मुश्किल ये है कि इन धोखेबाजों की वजह से किसी जरूरतमंद पर भी भरोसा नहीं होगा। रात में दिल्ली से लौटा। पार्किंग के पहले ही पूरा सामान लिए बैठे एक परिवार ने रोक लिया। कहा- ठेकेदार ने पैसे नहीं दिए। हम सब मजदूर हैं। महाराष्ट्र से आए हैं। खाने तक का पैसा नहीं है। वापस घर जाना है। खाने भर का पैसा मिल जाए तो, सुबह किसी भी ट्रेन से निकल जाएंगे। पत्नी, बच्चे सब थे। मैंने पूछा कितने में खान खा लोगे। बोला- पाँच सौ। मेरी करीब तीन सौ रुपये थे। पार्किंग के तीस रुपये छोड़कर सब मैंने उसे दे दिया। कई बार खुद को भरोसा दिलाता रहा। हालांकि, बार-बार लगता रहा कि ये मुझे बेवकूफ बना रहा है। लेकिन, बच्चे की शकल देखकर पैसे दे दिए। थोड़ी दूर जाकर फ…