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हर मौत का अपना अर्थशास्त्र है

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भगदड़ में होने वाली मौतें अखबार की सुर्खियां तो बनती ही हैं। एक साथ कुछेक, कुछ सैकड़ा लोगों की मौत हमेशा टीवी को विशेष तौर पर आकर्षित करती है। जब अचानक टीवी न्यूज चैनलों पर फ्लैश चलता है कि आईटीबीपी में भर्ती के लिए गए लाखों छात्रों ने शाहजहांपुर में हंगामा कर दिया है। बवाल मचा दिया है तो, बस बदइंतजामी भर की खबर थी। लेकिन, जब करीब सात लाख के अनुमानित बेरोजगारों का मेला वापसी के लिए रेलवे स्टेशन पर पहुंचा तो, ट्रेनों की छत पर चढ़े कई नौजवानों की स्टेशन पर बने पुल और बिजली के तारों से टकराने से हुई मौत असली खबर बन गई। और, इस खबर को मीडिया में जगह मिल गई। क्योंकि, ढेर सारी हंगामे के विजुअल थे, तस्वीरें थीं, आग थी। अब रेलवे और उत्तर प्रदेश सरकार सारा ठीकरा आईटीबीपी पर ठोंककर किनारा ले रहे हैं। लेकिन, इस बात पर बमुश्किल चर्चा हो पा रही है कि आखिर क्या वजह है कि देश में हर दूसरे-चौथे ऐसे किसी भर्ती अभियान, किसी रियल्टी शो या फिर किसी जगह कुछ मुफ्त में पाने की दौड़ में लोगों की जानें जा रही हैं।

अभी आईटीबीपी की नौकरी पाने की भगदड़ में मरे लोग चर्चा में हैं। सेना के भर्ती अभियानों में भी अक…