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Showing posts from February, 2017

नानाजी देशमुख की कर्मभूमि में नए पत्रकारों के साथ 2 दिन

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नानाजी देशमुख की आज पुण्यतिथि है। पहली बार हमें भी चित्रकूट में उनका खड़ा किया काम देखने को मिला। 2 दिन रहते समझ आया कि नानाजी को संघ अगर राष्ट्रऋषि कहता है तो वो सर्वथा उपयुक्त है। नानाजी ने जो किया वो देश के किसी सर्वोच्च राजनेता ने भी शायद नहीं किया है। विधायक, सांसद, प्रधानमंत्री होकर आप अधिकतम यही कर सकते हैं कि अच्छी नीतियाँ बनाकर उनके क्रियान्वयन में तेज़ी ला दें। लेकिन एक पूरे समाज के उत्थान की अवधारणा तैयार करना, चित्रकूट के ग्रामीण इलाक़े में खुद रहकर उसे स्वावलम्बनका मज़बूत आधार देने का काम कोई ऋषि ही कर सकता है। नानाजी ने दीनदयाल शोध संस्थान के माध्यम से ये कर दिखाया। लम्बे समय तक लगातार विरोधी विचार की सरकार होने से इतने बड़े काम की चर्चा भी संघ या उससे दुराग्रह न रखने वाले संगठनों के ज़रिये ही होती रही है। आज राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ मोहन भागवत ग्रामोदय मेले के समापन के मुख्य अतिथि हैं। ये काम हिन्दुस्तान की असली विरासत को आगे बढ़ाने वाला है। नानाजी को शत शत नमन। नानाजी से कुछ हम भी प्रेरित हो सकें, इतनी ही उम्मीद।
और उम्मीद की वजहें भी हैं। उम्मीद की वजह य…

रज्जू भइया, जोशी,सिंघल के घर में फिर ताकतवर होती भाजपा

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चौथे चरण का मतदान कई तरह से खास रहा है। चौथे चरण में इलाहाबाद जिले में भी मतदान हुआ, जो पूर्वांचल का प्रवेश द्वार भी कहा जाता है। इलाहाबाद कांग्रेस की पैदाइश वाली जमीन है और यही वो जमीन है, जहां राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्व सरसंघचालक प्रोफेसर राजेंद्र सिंह उर्फ रज्जू भइया का घर है। इतना ही नहीं, इसी शहर में विश्व हिंदू परिषद के संस्थापक अशोक सिंघल का घर है और यही वो शहर है जहां से बीजेपी के दिग्गज नेता मुरली मनोहर जोशी अकेले ऐसा नेता रहे, जो लगातार 3 बार इस सीट से सांसद चुने गए। कांग्रेस की पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रीता बहुगुणा जोशी भले ही लखनऊ की कैंट विधानसभा से चुनाव लड़ रही हों लेकिन, उनका घर भी इलाहाबाद में ही है। फूलपूर से सांसद और उत्तर प्रदेश भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य का भी घर यहीं है। पश्चिम बंगाल के राज्यपाल केशरीनाथ त्रिपाठी भी इसी शहर में रहते हैं। कांग्रेस के दिग्गज नेता प्रमोद तिवारी भी इसी शहर में रहते हैं। देश के सबसे प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय में शामिल इलाहाबाद विश्वविद्यालय भी यहीं है। इस जिले का महत्व इसी से समझा जा सकता है कि चौथे चरण के प्रचार…

गांव की समृद्धि के लिए सबसे पहले बिजली चाहिए

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मई 2014 में नरेंद्र मोदी की सरकार आई, तो सबसे बड़ा सवाल यही था कि किसके अच्छे दिन आएंगे और कब आएंगे। अच्छे दिनों का हर किसी का पैमाना अलग है और इसी लिहाज से हर कोई अच्छे दिन आ गए या आने वाले हैं, की बात कर सकता है। लेकिन, इतना जरूर है कि ग्रामीण भारत के सशक्तिकरण, समृद्धि की इतने सलीके से चिन्ता करने वाली ये पहली सरकार है। ढेर सारी ऐसी योजनाएं हैं, जिसके आधार पर मजबूती से ये बहस की जा सकती है कि ये सरकार देश के गांवों के लिए क्या कर रही है। और इस सबमें एक योजना ऐसी है, जो चमत्कारिक कही जा सकती है। सिर्फ योजना चमत्कारिक नहीं है। इसे पूरा करने की रफ्तार भी चमत्कारिक है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जब सत्ता संभालने के साल भर बाद कहाकि देश के सभी गांवों में अगले 1000 दिनों में बिजली पहुंचा दी जाएगी। तो भारत में पिछली सरकारों के काम करने के तरीके के आधार पर ये न पच पाने जैसा एलान था। खैर, दीनदयाल ग्राम ज्योति योजना कैसे और किस तेजी से काम कर रही है, इसकी चर्चा में आगे करूंगा। पहले ये बात कर लें कि आखिर प्रधानमंत्री को इस योजना की जरूरत क्यों पड़ी। आजादी के 67 साल बाद 21वीं सदी में जब दुनि…

भाई ब्रजेश पांडे के किसी भी गलत के लिए रवीश कुमार जिम्मेदार कतई नहीं

इलाहाबाद विश्वविद्यालय में विद्यार्थी परिषद#ABVPसे जुड़े रहे एक छात्रनेता पर छात्रसंघ चुनाव में कांग्रेस के छात्र संगठन#NSUIसे जुड़े छात्रनेता ने एक नारा उछाला। बालभोगी, बालभोगी। विद्यार्थी परिषद के लोगों ने दूसरा नारा निकाल लिया। भुक्तभोगी, भुक्तभोगी। जब तक बालभोगी का आरोप था वो मजे का विषय था। परिषद में काम करने वाले उस समय के हर कार्यकर्ता का मजाक ये कहकर उड़ाया जा सकता था। यहां तक कि संघी के नाम पर अभी भी बहुत से- - सामान्य और चरित्रहीन टाइप के भी- बुद्धिजीवी ये आरोप लगाकर दांत चियार देते हैं। संघी होने भर से लोगों पर ऐसे आरोप ये तथाकथित बुद्धिजीवी लगा देते थे और त्याग, संयम से जीने वाले प्रचारकों का मजाक जमकर उड़ाते थे। संघियों की सरकार आने के बाद थोड़ा ठिठकते हैं, डरते हैं, ये कहने से। और वही संघी जब पलटकर बालभोगी का आरोप लगाने वाले को भुक्तभोगी साबित करने पर जुट जाता है, तो चिट चिट की आवाज सुनाई देने लगती है। ऐसा ही कुछ पत्रकार रवीश कुमार के भाई पर सेक्स रैकेट में शामिल होने के आरोपों पर भी दिख रहा है। बड़का-बड़का पत्रकार, बुद्धिजीवी लोग रवीश पर आरोप न लगाने की बात कर रहे हैं। …

इस बार इटावा, औरैया में “नेताजी” नहीं “जाति” तय करेगी जीत

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बेटी की विदाई हो जाने के बाद पिता/परिवार और चुनाव में मतदान हो जाने के बाद प्रत्याशी/समर्थक शांत से हो जाते हैं। स्थिर से हो जाते हैं। लेकिन, तीसरे चरण का चुनाव हो जाने के बाद समाजवादी पार्टी के गढ़ इटावा, औरैया में यादव परिवार में गजब हलचल मची हुई दिख रही हैं। समाजवादी पार्टी के गढ़ इटावा, औरैया में समाजवादी पार्टी के लिए वही कमजोरी बन सकती है, जिसे मुलायम सिंह यादव ने अपनी ताकत के तौर पर इस्तेमाल किया था। मुलायम सिंह यादव जातिवादी राजनीति के अगुवा राजनेता रहे हैं, जिसे उन्होंने बड़े सलीके से समाजवादी राजनीति की पैकिंग में बेचा। इटावा, औरैया में काफी संख्यायादव मतदाताओं की है। पिछड़े और मुसलमान के साथ मिलकर वो एक मजबूत आधार बन जाते हैं। यही वजह है कि इस इलाके में समाजवादी पार्टी अपने गठन के बाद से ही स्वाभाविक पार्टी के तौर पर दिखती है और मुलायम सिंह निर्विवाद नेता। अपनी जाति के आधार पर राजनीति करने वाले नेताओं की अगर देश में एक सूची बनाई जाएगी, तो शायद पहले स्थान के लिए मुलायम सिंह यादव से ही सभी को लड़ना होगा। कमाल की बात ये रही कि मुलायम के यादववाद में लम्बे समय तक सारी पिछड़ी जात…

पति फंसे मजबूरी में, तो पत्नियां कूदीं चुनावी मैदान में

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तीसरे चरण के चुनाव में यादव परिवार की प्रतिष्ठा तो दांव पर है ही। लखनऊ की 2 सीटों पर पत्नी अपने पति की प्रतिष्ठा बचाने के लिए भी चुनाव लड़ रही हैं। अपर्णा यादव और स्वाति सिंह की सीटों पर कड़ा मुकाबला है। महादेव अर्धनारीश्वर के तौर पर पूजे जाते हैं। महादेव जैसा पति चाहने वाली स्त्रियां हर दूसरे-चौथे मंदिरों में शिवलिंग पर जल चढ़ाते देखी जा सकती हैं। शंकर-पार्वती की तस्वीरें भी अर्धनारीश्वर स्परूप वाली बहुतायत मिल जाती हैं। भारतीय जोड़ियां शंकर पार्वती जैसी ही होती हैं। आधी स्त्री-आधा पुरुष तभी सम्पूर्ण, ये भारतीय सनातन परम्परा में माना जाता है। आपको लग रहा होगा कि घनघोर चुनावी दौर में मैं क्यों इस तरह से हिन्दू देवी-देवताओं की चर्चा कर रहा हूं। इस चर्चा की खास वजह है। दरअसल, इसी सनातन परम्परा का दर्शन उत्तर प्रदेश के चुनावों में भी हो रहा है। फर्क बस इतना है कि यहां पार्वती अपने महादेव की लड़ाई लड़ रही हैं। मायावती पर टिकट लेकर पैसे बांटने का आरोप बीजेपी नेता दयाशंकर सिंह ने कुछ इस तरह से शर्मनाक तुलना करते लगा दिया कि दयाशंकर की बीजेपी सदस्यता तो चली ही गई थी, राजनीतिक वनवास भी झेलना …

दीनदयाल उपाध्यायऔर नाना जी देशमुख की जन्मशती पर बड़ा जमावड़ा

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साभार- स्पन्दन फीचर्स संघ प्रमुख डा. मोहनराव भागवत की उपस्थिति में ग्रामोदय और विकास की अवधारणा पर होगा मंथन 24 से 27 फरवरी तक चित्रकूट में ज़ुटेंगे संघ, सरकार और मीडिया के दिग्गज गोवा की महामहिम राज्यपाल श्रीमती मृदुला सिन्हा, गुजरात और मध्यप्रदेश के महामहिम राज्यपाल श्री ओमप्रकाश कोहली के साथ ही मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान, केन्द्रीय ग्रामीण विकास मंत्री श्री नरेन्द्र सिंह तोमर सहित अनेक नीति-निर्धारक और विचारक उपस्थित रहेंगे। भोपाल। इस साल दो महान व्यक्तियों का जन्म शताब्दी वर्ष है। देश वर्ष 2016-17 में एकात्म मानव दर्शन के प्रणेता पं. दीनदयाल उपाध्याय और इस दर्शन के शिल्पकार नानाजी देशमुख की जन्म शताब्दी मना रहा है। इसी परिप्रेक्ष्य में 24 फरवरी से 27  फररवरी तक चित्रकूट में ग्रामोदय मेला -प्रदर्शनी और संवाद का कार्यक्रम आयोजित किया गया है। यह आयोजन दीनदयाल शोध संस्थान द्वारा किया जा रहा है। उल्लेखनीय है कि दीनदयाल शोध संस्थान चित्रकूट में नाना जी की सप्तम पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि कार्यक्रम 24 से 27 फरवरी तक देश की विरासत, प्रगति एवं विकास को प्रदर्शित करने वाली वि…

“यूपी के लड़कों” की हवा खराब हो रही है !

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आमतौर पर अच्छा रसोइया हो या भारतीय गृहणी, भगोने में पक रहे चावल के पकने का अंदाजा ऊपर के 1-2 चावल को हाथ में लेकर लगा लेती है। उत्तर प्रदेश के चुनावी मिजाज को समझने भर का काम उत्तर प्रदेश विधानसभा के 2 चरणों के चुनावों में हुए मतों के मिजाज को समझकर लगाया जा सकता है। इस चुनाव में एक कमाल की बात ये रही कि सत्ताधारी पार्टी के परिवार का झगड़ा चुनाव के ठीक पहले ऐसा उभरकर सामने आया कि चुनावी हवा खत्म सी हो गई। और इसीलिए ये लगने लगा कि समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के गठजोड़ की हवा बन गई है। क्योंकि, समाजवाद-कांग्रेस गठजोड़ बनते ही समीक्षकों की नजर में ये पक्का हो गया कि फरवरी के महीने में हो रहे इन चुनावों में मुसलमान आंख मूंदे किसी प्रेमी जैसा व्यवहार करेगा और पूरी तरह से इस गठजोड़ के आगे समर्पण कर देगा। लेकिन, समीक्षक इस प्रेम त्रिकोण के तीसरे कोण को ठीक से नहीं देख पा रहे थे। उसकी वजह भी बड़ी साफ थी। अखिलेश यादव ने चाचा-पिता के खिलाफ लड़ाई इस अंदाज में लड़ी कि सारा मीठा गप्प गप्प चला आया अखिलेश के खाते में और कड़वा कड़वा थू थू हो गया मुलायम और शिवपाल पर। उसी में किसानों का मांगपत्र भरवाते…

शशिकला जी, सत्ता के शीर्ष पर बैठी महिला भारत में कभी कमजोर नहीं रही

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हर तरह की तिकड़मबाजी बेकार गई। शशिकला को सुप्रीमकोर्ट से सजा हो गई। अब वो तमिलनाडु की मुख्यमंत्री बनना तो दूर, किसी भी तरह के चुनाव में शामिल भी नहीं हो सकेंगी। जेल जाते शशिकला ने अपने विश्वासपात्र एक पुरुष नेता को उसी तरह से मुख्यमंत्री का दावेदार बनाया है, जैसे जयललिता ने जेल जाते समय अपने विश्वासपात्र पुरुष नेता पन्नीरसेल्वम को मुख्यमंत्री की कुर्सी दे दी थी। जैसे जयललिता के चरणों में पन्नीरसेल्वम लोटे रहते थे, वैसे ही शशिकला के सामने ई के पलनीसामी रहते हैं। इसके बावजूद शशिकला ने जयललिता के विश्वस्त पुरुष पन्नीरसेल्वम से लड़ते हुए कह दिया कि वो महिला हैं, इसीलिए उन्हें परेशान किया जा रहा है। उन्होंने कहाकि कुछ लोगों को राजनीति में महिलाएं बर्दाश्त नहीं होतीं। शशिकला भले कह रही हैं कि महिला होने की वजह से वो मुख्यमंत्री नहीं बन पाईं। लेकिन, हिन्दुस्तान दावा कर सकता है कि ये राजनीतिक तौर पर दुनिया में सबसे ताकतवर महिलाओं का देश है। और ये दावा खोखला भी नहीं है। इसका मजबूत आधार है। ये वो देश है, जिसने 1966 में ही पहली महिला प्रधानमंत्री चुन लिया था। इस देश में अब तक अगर किसी राजनेता की…

खिसकती दिख रही समाजवादी पार्टी की “बुनियादी ईंट”

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उत्तर प्रदेश में मुलायम सिंह यादव के राज में इटावा अति महत्वपूर्ण जिले में गिना जाता रहा है। अखिलेश यादव के राज में भी इटावा का ये रुतबा कायम रहा। ऐसा सुख शायद ही देश में किसी जिले को हासिल हो। मुलायम राज में इटावा के लोग खुद को सबसे ऊपर समझते रहे हैं। और इसी वीआईपी होने की चाहत में इटावा के लोगों ने आंख मूंदकर मुलायम सिंह यादव का समर्थन किया है। इसी जिले की जसवंतनगर सीट से मुलायम सिंह यादव ने अपनी राजनीतिक यात्रा शुरू की और उसके बाद ये शिवपाल की सीट हो गई। मुलायम सिंह यादव ने जसवंतनगर में भाई शिवपाल यादव के समर्थन में कहाकि अखिलेश जिद्दी है। कई बार वो बात सुन लेता है, कई बार नहीं सुनता। ऐसा कहते मुलायम भावुक हो गए। उन्होंने कहाकि शिवपाल को वही सम्मान दीजिए, जो आप मुझे देते रहे हैं। दरअसल जसवंतनगर एक ऐसी सीट है जिस पर पिछले 4 दशक से ज्यादा में 2 बार छोड़कर मुलायम सिंह यादव का कब्जा पक्का होता रहा है। 1967 में पहली बार मुलायम यहां से चुनकर विधानसभा में पहुंचे। उसके तुरंत बाद 1969 में हुए चुनाव में उन्हें बिशंभर सिंह यादव ने हरा दिया और एक बार 1980 में बलराम सिंह यादव ने हराया। इसके अला…

राहुल गांधी जी, ये कूड़ा नहीं कांग्रेस के मजबूत खंभे थे !

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दाग अच्छे हैं! किसीविज्ञापन की ये पंक्तियां बीजेपी के लिए उत्तराखंड में सही साबित होती दिख रही हैं। और जब अपने दाग दूसरों पर फबने लगें, तो वो और बुरे लगने लगते हैं। कुछ ऐसा ही कांग्रेस के साथ होता दिख रहा है। उत्तराखंड में चुनाव के आखिरी दौर में राहुल गांधी ने कहाकि कांग्रेस का कूड़ा बीजेपी ने बटोर लिया है। दरअसल राहुल गांधी हरिद्वार में कांग्रेस के रोड शो के दौरान कांग्रेस से बीजेपी में गए नेताओं के बारे में बात कर रहे थे। सतपाल महाराज, उनकी पत्नी अमृता रावत, पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष यशपाल आर्य, पूर्व मंत्री हरक सिंह रावत, सुबोध उनियाल, प्रणव सिंह, केदार सिंह रावत, प्रदीप बत्रा- यही वो कांग्रेसी हैं, जो कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में गए हैं। और यही कांग्रेसी बीजेपी में जाते ही अब राहुल गांधी की नजर में कूड़ा हो गए हैं। तो क्या सचमुच बीजेपी ने उत्तराखंड में कांग्रेस का कूड़ा बटोर लिया है। सबसे पहले बात पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा की। बहुगुणा की अगुवाई में ही कांग्रेसी नेताओं ने हरीश रावत के खिलाफ विद्रोह किया था। बीजेपी ने विजय बहुगुणा की सीट सितारगंज से उ…