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Showing posts from June, 2008

कश्मीर में बैलेट पर कब्जे के लिए फिर हावी हो रही है बुलेट पॉलिटिक्स

इस समय मेरा परिवार कश्मीर में है। तीन दिनों तक दहशत में श्रीनगर में जीने के बाद अब वो, वैष्णो माता का दर्शन करके कटरा लौट आए हैं। पिताजी ने जब घूमने का कार्यक्रम बनाया तो, मैंने सबसे मुखर तौर पर कश्मीर जाने को ही कहा। दरअसल दो साल पहले जब मेरी शादी हुई तो, घूमने जाने के लिए मुझे वैष्णो देवी के दर्शन के साथ श्रीनगर की वादियों में घूमना सबसे मुफीद कार्यक्रम लगा। और, कश्मीर में एक हफ्ते – इसी में श्रीनगर में 4 दिन (गुलमर्ग भी शामिल) रहना इतना सुखद अनुभव रहा था कि घर वालों को मैंने कहा- श्रीनगर जरूर घूमकर आइए।

शादी के बाद का पहला घूमना तो वैसे भी किसी को नहीं भूलता है। लेकिन, श्रीनगर इसलिए भी मेरी यादों का जबरदस्त हिस्सा बन चुका है कि यहीं से मेरी हिंदी ब्लॉग की पहली पोस्ट निकली थी। जिसमें मैंने वहां बह रही शांति की बयार का जिक्र किया था। और, ये भी लिखा था कि बाजार किस तरह से बंदूक पर भारी पड़ रहा हैलेकिन, अब दो साल बाद मुझे साफ दिख रहा है कि राजनीति, बाजार की वजह से जन्नत (कश्मीर) के सुधरे माहौल को बिगाड़कर उसे दोजख बनाने पर आमादा है।

बिना मुद्दे के किसी तिल जैसी बात को ताड़ कैसे बन…

ट्रांसफर सीजन

मुझे आज एक ई मेल मिली। जिसमें किसी ने बिना नाम बताए उत्तर प्रदेश की राजनीतिक-नौकरशाही जुगलबंदी पर कुछ लाइनें भेजी हैं। मैं मेल सहित वो लाइनें आप सबके सामने पेश कर रहा हूं।

हर्षजी, आपका बतंगड़ पढ़ता रहता हूँ। आप यूपी से हैं और यहाँ की राजनीति व नौकरशाही से परिचित हैं। आज-कल यहाँ जो कुछ चल रहा है उसकी एक बानगी इस कविता में है। यदि बात कुछ जमे तो अपने ब्लॉग पर डाल सकते हैं। अपनी ही ओर से। धन्यवाद।

बीत गया है मार्च, मई ने दस्तक दी है।
वित्त वर्ष की लेखा बन्दी, सबने की है॥

'जून आ गया भाई',यूँ सब बोल रहे हैं।
तबादला-सीजन है, अफसर डोल रहे हैं॥


शासन ने तो पहले, इसकी नीति बनायी।
अनुपालन होगा कठोर, यह बात सुनायी॥

अब ज्यों सूची-दर-सूची, जारी होती है।
घोषित नीति ट्रान्सफर की, त्यों-त्यों रोती है॥

सक्षम अधिकारी को, भूल गया है शासन।
तबादलों के नियम, कर रहे हैं शीर्षासन॥

मंत्री जी के दर पर, जाकर शीश झुकाओ।
स्वाभिमान, ईमान, दक्षता मत दिखलाओ॥

टिकट कट रहे वहाँ, मलाईदार सीट के।
बिचौलिए भी कमा रहे, धन पीट-पीट के॥

जैसी भारी थैली, वैसी सीट मिलेगी।
मंत्रीजी तक परिचय है, तो छूट मिलेगी॥

देखो प्यारे आया कैसा, विकट जमा…

हम सबको राज ठाकरे के साथ खड़े हो जाना चाहिए

राजनीतिक फायदे के लिए ही सही लेकिन, इस बार बात राज ठाकरे की बात एकदम कायदे की है। सबसे बड़ी बात ये वो, मुद्दा है जिस पर राज ठाकरे ने शायद ही कभी कायदे की बात की हो। पहली बार है कि मराठी अस्मिता से जुड़ा मुद्दा होने के बाद भी राज ठाकरे भावना को उबारने की बजाए तर्क दे रहे हैं।

मामला मराठी स्वाभिमान के सबसे बड़े प्रतीक का है इसलिए राज सीधे विरोध करने के बजाए तर्क दे रहे हैं। टाइम्स ऑफ इंडिया ने राज ठाकरे की ये पूरी दलील पहले पन्ने पर छापी है। और, अब तक ऐसी कोई खबर नहीं आई है कि राज ठाकरे के घर पर किसी शिवसैनिक, किसी शिवसंग्राम के सिपाही या फिर और किसी मराठी अस्मिता के ठेकेदार ने हमला किया हो (शायद किसी में इतना दम ही नहीं है)। अभी तक तो बयान भी नहीं आया है पूरी उम्मीद है कि बयान तो आएंगे ही। लेकिन, सबको याद होगा कि छत्रपति शिवाजी महाराज की मूर्ति समुद्र में लगाने के सरकार के फैसले का विरोध अपने संपादकीय में करने के बाद लोकमत के संपादक का क्या हाल हुआ था। अच्छा हुआ कुमार केतकर ने घर का दरवाजा नहीं खोला। नहीं तो, एनसीपी विधायक की शिवसंग्राम सेना के सिपाही जाने क्या कर गुजरते। अब विनायक म…

कोई कुछ भी कहे.. मायाराज ही ठीक है

मायावती सरकार के पूर्व मंत्री आनंदसेन यादव के खिलाफ आखिरकार गैरजमानती वारंट जारी हो गया। इसी हफ्ते में मायावती ने अपनी सरकार के एक और मंत्री जमुना प्रसाद निषाद को भी दबंगई-गुंडई के बाद पहले मंत्रिमंडल से बर्खास्त किया। उसके बाद जमुना निषाद को जेल भी जाना पड़ा। इससे पहले भी मायावती की पार्टी के सांसद उमाकांत यादव को पार्टी से बर्खास्त कर दिया गया था और उन्हें भी जेल जाना पड़ा था।

अब अगरउत्तर प्रदेश में कोई रामराज्य की उम्मीद लगाए बैठा है तो, इस दिन में सपने देखना ही कहेंगे। लेकिन, सारी बददिमागी और अख्कड़पन के बावजूद मुझे लगता है कि बरबादी के आलम में पहुंच गई उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था मायाराज में ही सुधर सकती है। ऐसा नहीं है कि मायाराज में सबकुछ अच्छा ही हो रहा है। लेकिन, इतना तो है ही कि मीडिया में सामने आने के बाद, आम जनता की चीख-पुकार, कम से कम मायावती सुन तो रही ही हैं।

मुझे नहीं पता कि मायावती के आसपास के लोग सत्ता के मद में कितनी तानाशाही कर रहे हैं। लेकिन, मायावती ने जिस तरह से कल राज्य के पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को जिस तरह से लताड़ा है वो, इतना तो संकेत दे ही रहा है…

... जाने चले जाते हैं कहां

आज मुंबई मिरर में एन विट्ठल का लेख पढ़ रहा था। जिसमें वो कंसल्टेंसी फर्म मैकेंजी के किसी प्रजेंटेशन का हवाला दे रहे हैं। और, जिस प्रजेंटेशन में भारत के सुपरपावर बनने की इम्मीद दिखी थी। ये प्रजेंटेशन मैकेंजी ने तब प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को दिखाया था। पूरा प्रजेंटेशन देखने के बाद अटल बिहारी वाजपेयी ने पूछा- आखिर ये सब होगा कैसे।

पूर्व मुख्य सतर्कता अधिकारी (chief vigilance officer) एन विट्ठल कहते हैं कि यही वो सवाल है कि हम सोचते बड़ा अच्छा हैं। योजनाएं बहुत बड़ी-बड़ी बनाते हैं। लेकिन, उसका क्रियान्वयन (implementation) बहुत ही कमजोर होता है, जिसकी वजह से बड़ी-बड़ी योजनाएं बेकार (flop) हो जाती हैं। विट्ठल ने अपने लेख में टी एन शेषन और तमिलनाडु के एम्प्लॉयमेंट डिपार्टमेंट के एक डिप्टी रजिस्ट्रार का हवाला देकर कहा है कि अटल बिहारी वाजपेयी की बात का जवाब हैं ये लोग। जिन्होंने अपने अधिकारों का सही इस्तेमाल करके क्रियान्वयन (implementation) को धारदार बना दिया।

विट्ठल साहब की ये बात एकदम सही है। विट्ठल साहब उन अफसरों में से हैं जिन्होंने इस देश में चीफ विजिलेंस ऑफीसर की पोस्ट के सह…

साहब, खाली पेट और भूख लगती है

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कर्नाटक में ब्लैकमेलर देवगौड़ा परिवार की धोखाधड़ी और ऐन मौके पर दिखी महंगाई (महंगाई खतरे के निशान पर पहुंच तो, साल भर पहले ही गई थी। आज शुक्रवार है और फिर महंगाई दर बढ़ गई है।) इन दोनों ने दक्षिणपंथी बीजेपी को दक्षिण दुर्ग का द्वार भेदने में मदद कर दी। वरना फिलहाल ऐसा कोई मुद्दा नहीं था जो, बीजेपी के पक्ष में वोट का अंबार लगा पाता। कांग्रेस के युवराज को डिस्कवर इंडिया में कुछ काम का नहीं मिला जो, नेहरू जी के डिस्कवरी ऑफ इंडिया से आगे बढ़ पाता। पूरा देश घूमने वाले युवराज की महंगाई से भी मुलाकात नहीं हुई। जबकि, मेरी महंगाई से मुलाकात एक ही दिन में नैनीताल के स्टेट गेस्ट हाउस में मुन्ना खां की शक्ल में हो गई।

बीजेपी कर्नाटक में सत्ता में आ गई है। और, उत्तरांचल में पहले से ही है। अचानक बने प्रोग्राम में एक दिन के लिए मैं नैनीताल पहुंच गया। रात की फ्लाइट से मुंबई से दिल्ली। रात भर चलकर सड़क के रास्ते से रुद्रपुर और वहां से नैनीताल। एक रात नैनीताल में दूसरे दिन शाम को फिर वापस और रात की फ्लाइट से फिर मुंबई। वैसे तो नैनीताल पहुंचना ही बहुत सुखद अनुभव रहा। लेकिन, नैनीताल के स्टेट गेस्ट हाउस …