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Showing posts from May, 2017

भारत के लिए OBOR बेकार, EWHW पर ध्यान दो सरकार !

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भारत सरकार के लिए ये फैसला लेना इतना आसान नहीं था। लेकिन, सरकार की इस बात के लिए तारीफ की जानी चाहिए कि भारत ने चीन की अतिमहत्वाकांक्षी OBOR योजना से खुद को पूरी तरह बाहर ही रखा है। कठिन फैसला इसलिए भी क्योंकि, भारत के 2 सम्वेदनशील पड़ोसी देशों पर OBOR के जरिए चीन का बढ़ता प्रभाव जल्दी ही दिखने लगेगा। नेपाल ने इस बात को स्वीकारा कि इतनी बड़ी आर्थिक गतिविधि से हम कैसे किनारे रह सकते हैं। और, पाकिस्तान तो OBOR के सबसे महत्वपूर्ण CPEC यानी चीन पाकिस्तान आर्थिक गलियारे का एक अहम पक्ष ही है। पाकिस्तान भारत के लिहाज से दुश्मन देश जैसा है और CPEC के पाक अधिकृत कश्मीर, बलूचिस्तान और दूसरे विवादित इलाकों से गुजरने की वजह से भारत को इस गलियारे पर कई कड़े एतराज हैं। लेकिन, चीन ने इसे पूरी तरह से खारिज कर दिया है। वन बेल्ट वन रोड की इस अतिमहत्वाकांक्षी योजना के जरिए चीन भले ही दुनिया के 60 देशों को जोड़ने का दावा कर रहा हो। लेकिन, सच्चाई यही है कि इसके जरिए वो अपनी टूटती अर्थव्यवस्था को मजबूती से जोड़ने की कोशिश कर रहा है। साथ ही चीन इसके जरिए कमजोर देशों को कर्ज देकर और सामरिक तौर पर निर्भर बनाक…

चीन की इस योजना का पाकिस्तान में जमकर विरोध

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OBOR का सिर्फ भारत ने विरोध किया। और ये भारत के लिए ठीक नहीं है। भारत सहित दुनिया भर की मीडिया में जानकारों को पढ़कर पहली नजर में ऐसा ही लगता है। लेकिन, चीन की इस अतिमहत्वाकांक्षी परियोजना को लेकर उसमें शामिल हो रहे देशों की राय भी अच्छी नहीं है। पाकिस्तान के अलावा दूसरे देशों में इस योजना को लेकर काफी सन्देह है। दिल्ली में जर्मनी के राजदूत मार्टिन ने कहा- “OBOR पुराने सिल्क रूट से बहुत अलग है। ये मुक्त व्यापार का रास्ता नहीं है। ये कारोबार बढ़ाने के लिए चीन की रणनीति है।” सिर्फ जर्मनी ही नहीं दुनिया के कई देश अब OBOR सन्देह जता रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र संघ भी इस परियोजना के जरिए देशों पर लदने वाले कर्ज को लेर चिन्तित है। पाकिस्तान में भी एक बड़ा वर्ग है, जो इस बात को लेकर आशंकित है कि चीन पाकिस्तान को अपने आर्थिक उपनिवेश के तौर पर गुलाम बना रहा है और OBOR के तहत बना रहा CPEC चीन पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरीडोर दरअसल पाकिस्तान की गुलामी की पक्की बुनियाद साबित होगा। सांसद और पाकिस्तानी संसद की प्लानिंग और डेवलपमेंट पर बनी संसदीय स्थाई समिति के चेयरमैन ताहिर मशादी कह रहे हैं कि “दूसरी ईस्ट इ…

रुपये की इतनी औकात बढ़ाने वाले की औकात जान लीजिए !

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28 जुलाई 2014 को दिल्ली विश्वविद्यालय के लॉ कॉलेज में हरीश साल्वे मुख्य अतिथि के तौर पर थे। कानून की पढ़ाई कर रहे बच्चों से उन्होंने एक बात कही कि हमारी पीढ़ी के वकीलों ने इस पेशे की इज्जत मिट्टी में मिला दी है। वकीलों की इज्जत मिट्टी में मिलाने का अपनी पीढ़ी का “अपराधबोध” शायद हरीश साल्वे के दिल को गहरे साल रहा था। और आखिरकार मई 2017 में एक भारतीय के पक्ष में अन्तर्राष्ट्रीय अदालत में की गई बहस ने उस सारे “अपराधबोध” को खत्म कर दिया है। भारत की ओर से कुलभूषण के पक्ष में की गई जोरदार तार्किक बहस ने हरीश साल्वे को भारत ही नहीं, दुनिया भर में चर्चा की वजह बना दिया है। हर कोई उस भारतीय वकील हरीश साल्वे के बारे में जानना चाहता है जिसने अन्तर्राष्ट्रीय न्यायालय में पाकिस्तान के तर्कों की बखिया उधेड़कर रख दी है। भारत-पाकिस्तान तो सीधे पक्ष हैं लेकिन, दुनिया में भी इस बात की चर्चा हो रही है कि देश की प्रतिष्ठा के लिए केस लड़ने के लिए हरीश साल्वे ने सिर्फ 1 रुपये की फीस ली है। कहा जा रहा है कि पाकिस्तान की ओर से पैरवी कर रहे वकील ने करीब 5 करोड़ रुपये लिए हैं। हरीश साल्वे की पूरी पीढ़ी ने मि…

अनिल माधव दवे की अन्तिम इच्छा

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अनिल माधव दवे जी से 2 बार मिलना हुआ। पहली बार भोपाल की मीडिया चौपाल में और दूसरी बार#IIMCमें हुई मीडिया चौपाल में। उनसे मिलकर, बातचीत करके ही समझ में आ गया कि वो कितने सरल, सहज हैं, साथ ही पर्यावरण, पानी के लिए गजब के सम्वेदनशील। खुद प्रधानमंत्री ने भी उनकी आखिरी इच्छा वाली चिट्ठी साझा की है। मुझे लगता है कि ये चिट्ठी बार-बार, ज्यादातर बिना किसी प्रयोजन, सन्दर्भ के साझा की जानी चाहिए। संघ के प्रचारक से केंद्र सरकार के मंत्री तक उनके व्यहार में कोई बदलाव नहीं दिखा। बल्कि, आचार-विचार की मजबूती बनी ही रही। ये छोटा काम नहीं था। खासकर ऐसे समय में जब राजनीति करने की मूल शर्त ही यही है कि बिना पैसा कमाए काम नहीं चलेगा। दवे जी के नाम सिर्फ पर्यावरण, पानी की सफाई ही नहीं राजनीति की सफाई की भी चर्चा होनी चाहिए। समाज जीवन में हम जैसे जो लोग आज भी ये मानते हैं कि पैसा बहुत जरूरी हो सकता है लेकिन, समाज जब हमें जीवन में सम्मान देने लगे, तो समाज जीवन का सम्मान बना रहे, ये जिम्मेदारी हमारी बढ़ती जाती है। अनिल माधव दवे जी को पुन: श्रद्धांजलि। जब जिसे मौका लगे, दवे जी की आखिरी इच्छा वाली चिट्ठी ज्यादा …

नीतीश को नेता बनाकर विपक्ष की लड़ाई मजबूत बन सकती है

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ताजा हाथापाई या कहें कि राजनीतिक रस्साकशी राष्ट्रपति चुनाव में होनी है। हालांकि, अभी तक सत्ता पक्ष या फिर विपक्ष का कोई पक्का प्रत्याशी नजर नहीं आ रहा है। सबकुछ कयास ही लगाया जा रहा है। लेकिन, ये माना जा रहा है कि विपक्षी एकता के साथ इस राष्ट्रपति चुनाव से ये भी तय होगा कि 2019 की लड़ाई के लिए विपक्ष साथ-साथ कितना आगे तक जा पाएगा। मोटे तौर पर अगर कोई चमत्कार जैसा नहीं हो गया, तो ये तय माना जा रहा है कि नरेंद्र मोदी जिसे चाहेंगे, उसे रायसीना हिल्स पर बैठाने में सक्षम हैं। उत्तर प्रदेश सहित 5 राज्यों के विधानसभा चुनावों के नतीजे ने मोदी की अगुवाई वाले एनडीए की ताकत बहुत बढ़ा दी है। फिर भी विपक्ष इस कोशिश में लगा है कि एक मजबूत लड़ाई वो सत्तापक्ष के सामने वो राष्ट्रपति चुनाव में रख सके। राष्ट्रपति का पद ऐसा है कि अगर सम्भव हो तो पक्ष-विपक्ष किसी एक नाम पर सहमत हो जाएं, ये आदर्श स्थिति होती। लेकिन, भारतीय राजनीति में आदर्श स्थितियों को कांग्रेस ने अपनी सत्ता रहते बखूबी ध्वस्त किया था। भारतीय जनता पार्टी भी पहली बार राष्ट्रपति चुनाव के समय पूर्ण बहुमत के साथ सरकार में है। इसलिए भारतीय जनता…

सबको ‘बेईमान’ बनाकर सत्ता हासिल करने वाला ‘ईमानदार’ नेता आज ‘बेईमान’ बन गया

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मंत्री पद से हटाए जाने से ठीक पहले तक आम आदमी पार्टी का सबसे चमकता चेहरा रहे कपिल मिश्रा जब प्रेस कांफ्रेंस के दौरान ही बेहोश से होकर गिरे, तो ये बात साबित सी हो गई कि कपिल मिश्रा अरविन्द केजरीवाल स्कूल ऑफ पॉलिटिक्स से पूरी दीक्षा लेकर निकले हैं। हालांकि, बेहोश होकर गिरने से पहले तक कपिल मिश्रा अरविन्द केजरीवाल को साथ लेकर जितना नीचे तक गिर सकते थे, गिर चुके थे। कपिल मिश्रा ने अरविन्द केजरीवाल पर पार्टी के जरिए काले धन को सफेद में बदलने का बड़ा आरोप लगाया। कपिल ने कहाकि आम आदमी पार्टी फर्जी कम्पनियों से मिले चन्दे की रकम के बारे में जानकारी छिपाई है। उन्होंने आरोप को और मजबूत करते हुए बताया कि मोतीनगर से आम आदमी पार्टी के विधायक शिवचरन गोयल के नाम पर 16 फर्जी कम्पनियां बनाई गई हैं। और उन्हीं कम्पनियों ने अरविन्द केजरीवाल को रात 12 बजे 2 करोड़ रुपये दिए। कपिल ने आरोपों को धार देते हुए ये भी बताया कि इन कम्पनियों से मिला फन्ड एक्सिस बैंक की उन्हीं शाखाओं में जमा कराया गया, जहां नोटबन्दी के दौरान काला धन सफेद करने की शिकायतें मिली थीं। काला धन सफेद करने के मामले में कपिल मिश्रा ने सोमवार…

जिस डाल पर बैठे, उसी को काटते जा रहे हैं अरविन्द केजरीवाल

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अरविन्द केजरीवाल ने आम आदमी पार्टी बनाने की घोषणा के साथ ही वो काम करना शुरू कर दिया था, जिसे पार्टी की बुनियाद को ही कमजोर करना कहा जा सकता है। जो भी अरविन्द के बराबर आधार वाले या आसपास के चेहरे दिखते थे, एक-एक करके अरविन्द ने किसी न किसी बहाने से उन्हें किनारे कर दिया। और अरविन्द केजरीवाल ने अपनी पार्टी और अपनी छवि पर सबसे तगड़ी चोट 21 अप्रैल 2015 को की थी। वो चोट आज कपिल मिश्रा के अपनी आंखों के सामने 2 करोड़ रुपये लेने के आरोप वाली चोट से भी बड़ी चोट थी। हालांकि, उस समय अरविन्द केजरीवाल और मीडिया विश्लेषकों को इस बात का उतना अहसास नहीं हुआ था। क्योंकि, उस समय अरविन्द का सूरज पूरब में ही था। योगेन्द्र यादव, प्रशान्त भूषण, आनन्द कुमार और अजीत झा को पार्टी विरोधी गतिविधि में शामिल होने के आरोपों में आम आदमी पार्टी से निकाल दिया गया था। योगेन्द्र यादव और प्रशान्त भूषण ये वो चेहरे हैं, जिन्होंने सही मायने में आम आदमी पार्टी और अरविन्द केजरीवाल का आधार तैयार करने का काम किया था। अरविन्द के अगल-बगल खड़े रहकर योगेन्द्र यादव और प्रशान्त भूषण आम आदमी पार्टी से जुड़ रहे नए चेहरों के साथ पुरान…

"ज्योति" को "निर्भया" बनाकर कहां पहुंचे हम

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निर्भया के साथ हैवानियत की इंतेहा कर देने वाले कुकर्मियों को फांसी ही दी जाएगी। ये फैसला तो सितम्बर 2013 में ही सुप्रीमकोर्ट के निर्देश पर बनी फास्टट्रैक अदालत ने सुना दिया था। लेकिन, भारत गजब का लोकतांत्रिक देश है, इसलिए ऐसे हैवानों को भी न्याय का हर मौका दिया गया। मार्च 2014 में उच्चन्यायालय में हैवानों ने फिर से अर्जी डाली, वहां भी अदालत ने न्याय का माथा ऊंचा रखा और उसके बाद 2 जून 2014 को हैवानों को फांसी न देने की मांग करने वाली अर्जी सर्वोच्च न्यायालय के सामने आई। फैसला आज आया। कुकर्मियों की फांसी की सजा बरकरार है। लेकिन, एक बड़ा सवाल छोड़ गई है, हमारी न्याय व्यवस्था में होने वाली देरी पर। सोचिए देश के मन:स्थिति बदल देने वाले अपराध के मामले में भी सर्वोच्च न्यायालय ने फास्टट्रैक अदालत और उच्चन्यायालय के ही फैसले को बरकरार रखने में करीब 3 साल लगा दिया। खैर, उन कुकर्मियों को जल्द से जल्द फांसी दी जाए। हालांकि, इसमें भी नाबालिग कुकर्मी 3 साल की सजा काटकर बाहर निकल चुका है। लेकिन, मैं इन दोनों ही बातों को अभी छोड़ देता हूं, फिर भी मुझे इस फैसले के साथ एक बड़े फैसले का न आना निराश करत…

जनता के भरोसे का सवाल बड़ा होता जा रहा है मोदी जी

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#BadlaLo is still trending on twitter @narendramodi @PMOIndia  इसका सीधा सा मतलब हुआ कि सब जानने वाली जनता जानती है कि अभी कुछ भी ऐसा नहीं हुआ है। पूरे १ घंटे से ज़्यादा पाकिस्तानी अख़बार, टीवी चैनलों को देखने के बाद इतना तो पक्का है कि अभी कोई ऐसी कार्रवाई नहीं हो सकी है जिसे पाकिस्तान तिलमिलाए। वहाँ का मीडिया अभी तक यही खबर सबसे ऊपर रखे हुए है कि पाकिस्तान ने भारतीय जवानों के साथ बर्बरता को ख़ारिज किया है। हमारी भारतीय मीडिया अब उस खबर से आगे बढ़ गई है और बता रही है कि ३ पाकिस्तानी चौकियाँ ध्वस्त की गईं और ७ जवान मारे गए। हालाँकि, ये पाकिस्तानी मीडिया की रणनीति भी हो सकती है कि वो पाकिस्तानी सैनिकों के मारे जाने की खबर दबा दें। जिससे भारत में लोगों का ग़ुस्सा सरकार के ख़िलाफ़ बना रहे। सच्चाई का पता लगाना भारत-पाकिस्तान जैसी स्थिति में टेढ़ी खीर है। लेकिन भारत सरकार से, ख़ासकर मोदी सरकार, भारतीय इतनी तो उम्मीद रखते ही हैं कि वो ऐसा करे जिससे समझ में आए कि मोदी-मनमोहन में कोई अन्तर है। सवाल पाकिस्तान के साथ युद्ध करने का नहीं है। हिन्दुस्तान में कोई भी युद्ध का पक्षधर नहीं है। लेकिन, स…

हिन्दुत्व के सहारे मुख्यमंत्री बने आदित्यनाथ को हिन्दू युवा वाहिनी की चुनौती

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उत्तर प्रदेश में पूर्ण बहुमत की भाजपा सरकार के मुख्यमंत्री के तौर पर योगी आदित्यनाथ ने 19 मार्च को शपथ ली। उग्र हिन्दुत्व की छवि के नेता होने की वजह से योगी आदित्यनाथ को लेकर ढेरों आशंका लोगों के मन में थी। उसमें सबसे बड़ी आशंका गोरखपुर के सांसद और गोरक्षपीठ के महंत आदित्यनाथ की सरपरस्ती में चल रहे संगठन हिन्दू युवा वाहिनी की गतिविधियों को लेकर थी। हिन्दू युवा वाहिनी के संरक्षक योगी आदित्यनाथ हैं। और ये वही हिन्दू युवा वाहिनी है, जिसके कार्यक्रमों में विवादित भाषणों की वजह से योगी आदित्यनाथ को उग्र हिन्दू नेता के तौर पर देखा जाता रहा है। अब योगी आदित्यनाथ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बन चुके हैं। लेकिन, योगी आदित्यनाथ अभी भी हिन्दू युवा वाहिनी के संरक्षक हैं। अब अगर संगठन का संरक्षक प्रदेश का मुख्यमंत्री बन जाए तो, कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ना स्वाभाविक है। इसी बढ़े मनोबल की वजह से हिन्दू युवा वाहिनी के कई कार्यकर्ताओं के गलत व्यवहार चर्चा में आ गए। आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनते ही प्रदेश में कई जगहों पर होर्डिंग में वही नारे लिखे गए जो, गोरखपुर सांसद के तौर पर आदित्यनाथ के लिए लगाए जात…