हिंदी-अंग्रेजी का व्यवहार-बोलचाल हमें गजब का बदल रहा है। हिंदी के जिन शब्दों, क्रिया कलापों को हम हिंदी में सुनना नहीं चाहते वही अंग्रेजी भाषा में तब्दील होते ही अरुचिकर नहीं लगता। और, ये ऐसे घुस रहा है हमारे घर, परिवार, समाज में कि जाने-अनजाने हम भी इसका हिस्सा बनते जाते हैं। गालियों का तो है ही। बेहद आधुनिक दिखने वाले लड़के-लड़कियां ऐसे अंतरंग शब्दों को अंग्रेजी में सरेआम प्रयोग कर लेते हैं जिसे हिंदी में कह दिया जाए तो, असभ्य, जाहिल, जंगली जाने क्या-क्या हो जाएं। लेकिन, अंग्रेजी में उन्हीं शब्दों का इस्तेमाल करके स्मार्ट।
हिंदी की टट्टी गंदी लगती है उसमें से बदबू भी आती है लेकिन, अंग्रेजी की potty होते ही उसमें की गंध और गंदगी पता नहीं कहां गायब हो जाती है। और, हम इन शब्दों को बोलते वक्त भाव भी चेहरे पर ऐसे ही लाते हैं जाने या अनजाने। कैसे हो जाता है ये चमत्कार। हिंदी-अंग्रेजी किसी में भी बताइए ना ...
देश की दशा-दिशा को समझाने वाला हिंदी ब्लॉग। जवान देश के लोगों के भारत और इंडिया से तालमेल बिठाने की कोशिश पर मेरे निजी विचार
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Monday, November 23, 2009
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जिम में रामधुन, जन्माष्टमी प्रभाव
सुप्रभात राम राम भारत अद्भुत है और हम भारतीय भी आमतौर पर सुबह की सैर ही मुझे रुचती है, लेकिन बीच-बीच में जिम में भी जाता हूं। जिम में ट्र...
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हमारे यहां बेटी-दामाद का पैर छुआ जाता है। और, उसके मुझे दुष्परिणाम ज्यादा दिख रहे थे। मुझे लगा था कि मैं बेहद परंपरागत ब्राह्मण परिवार से ह...
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उत्तर प्रदेश की जनता को कर्कश आवाज में मुलायम के जंगलराज के खिलाफ चीखकर मायावती ने ठग लिया है। जिन दलितों के दबे होने को लेकर वो सत्ता में आ...
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आप लोगों में से कितने लोगों के यहां बेटियों का पैर छुआ जाता है। यानी, मां-बाप अपनी बेटी से पैर छुआते नहीं हैं। बल्कि, खुद उनका पैर छूते हैं...