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Showing posts from July, 2011

एक बार थम क्यों नहीं जाता देश

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मीडिया मजबूरी में या ये कहें कि और करे भी तो, क्या। अब यही चलाना-दिखाना है कि मुंबई के जज्बे को सलाम। आखिरकार जिंदादिल मुंबई के लोगों ने आतंक को फिर से मात दे दी। कुछ 22 प्वाइंट की मामूली सेंसेक्स की बढ़त ने एक और हेडलाइन ये भी दे दी कि आतंक को शेयर बाजार का करारा जवाब। लेकिन, क्या सचमुच ऐसा हुआ है। क्या सच्चाई यही है कि मुंबई या फिर शेयर ने आतंक को करारा जवाब दिया है। देश में अगर कश्मीर के बाद कहीं के लोगों के सीने में सबसे ज्यादा आतंकी घाव पक रहा है तो, वो मुंबई शहर ही है। देश की आर्थिक राजधानी कहे जाने वाले इस शहर की मजबूरी को लोगों खासकर हम मीडिया वालों ने जबरदस्ती बहादुरी बनाने की कोशिश बार-बार की है। और, इसे आतंक से लड़ने के लिए जरूरी सकारात्मक सोच साबित कर दिया है।


11/7/2006 के ट्रेन धमाके हों या फिर 26/11/2008 के ताज और मुंबई के दूसरे अहम ठिकानों पर हुए आतंकी हमले हों। मीडिया में लाख ये बात साबित करने की कोशिश की जाए कि हमलों के तुरंत बाद मुंबई के जिंदादिल लोग उठ खड़े होते हैं। मुंबई कभी थमती नहीं, ये जज्बा दिखाते हैं। लेकिन, इन दोनों धमाकों के समय इन घटनाओं को नजदीक से महसू…

सुस्त बाजार, गायब पब्लिक ऑफर

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इस साल शेयर बाजार की डांवाडोल रफ्तार बाजार के जरिए पैसा जुटाने की इच्छा रखने वाली नई कंपनियों पर भारी पड़ती दिख रही है। साल 2011 आधा बीत रहा है और अभी तक शेयर बाजार के प्राइमरी मार्केट में पैसा लगाने वालों के लिए ज्यादा विकल्प नहीं दिख रहे हैं। पिछले साल की तेजी के भरोसे इस साल कई कंपनियों ने अपना आईपीओ लाने का इरादा कर रखा था। लेकिन, प्राइमरी मार्केट में कंपनियां उतरने का साहस ही नहीं जुटा पा रही हैं। जनवरी से जून महीने की ही बात करें तो, 15 आईपीओ बाजार में उतरने थे लेकिन, समयसीमा खत्म होने के बाद भी वो, बाजार में नहीं आए। ये वो 15 आईपीओ यानी इनीशियल पब्लिक ऑफर थे जिन्हें, बाजार रेगुलेटर सेबी से मंजूरी मिल चुकी थी। एक बार समय सीमा खत्म होने का सीधा सा मतलब ये हुआ कि अब इनके पब्लिक ऑफर फिलहाल तो नहीं आ सकेंगे।

जिन कंपनियों के आईपीओ सेबी से मंजूरी के बाद भी बाजार में नहीं आ सके। वो, कंपनियां हैं जिंदल पावर, रिलायंस इंफ्राटेल, गुजरात स्टेट पेट्रोलियम, स्टरलाइट एनर्जी, लोढ़ा डेवलपर्स, बीपीटीपी, एंबियंस, ग्लेनमार्क जेनेरिक्स, नेपच्यून डेवलपर्स, कुमार अर्बन डेवलपर्स और एएमआर कंसट्रक्शंस।…

तरक्की की रफ्तार में महंगाई का बड़ा ब्रेकर

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आम आदमी को आम आदमी की सरकार ने एक बार फिर भरोसा दिया है। इस बार चुप रहने वाले प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह अरसे बाद बोले हैं। और, बोले ये कि मार्च तक महंगाई के बढ़ने की दर छे-साढ़े छे प्रतिशत तक आ जाएगी। इससे ये तो साफ हो गया कि अगले नौ महीने तक 8-9 प्रतिशत की महंगाई दर बनी रहेगी, इसके लिए जनता से उन्होंने लगे हाथ अभयदान भी मांग लिया है। वैसे भी लोकतंत्र में जनता को अपनी सुनाने का मौका पांच साल बाद ही मिलता है। इसलिए मार्च में भी महंगाई दर छे- साढ़े छे प्रतिशत तक आएगी या नहीं ये तो, आगे की आर्थिक परिस्थितियां तय करेंगी। क्योंकि, पिछले दो साल से सरकार, यानी प्रधानमंत्री, वित्त मंत्री और उनकी आर्थिक सलाहकार मंडली दसियों बार आम जनता को ये भरोसा दिला चुकी है कि महंगाई दर बस अगले तीन महीने में छे- साढ़े छे प्रतिशत तक आ जाएगी। लेकिन, हुआ क्या- वही ढाक के तीन पात।


महंगाई दर नौ प्रतिशत के आसपास ऐसी अंटकी है कि जरा सी नीचे उतरती है तो, सरकारी फैसला ही उसे ऊपर चढ़ने की ताकत दे देता है। दरअसल प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और उनकी सलाहकार मंडली से उम्मीद थी कि ये देश की सबसे सुधारवादी सरकार चलाएंगे। और,…