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Showing posts from November, 2012

पैसा देकर वोट जुटाने का जुगाड़

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भारत में आम जनता गजब बेवकूफ बनती है। पहले से कम पैसा, कम लोगों को पैसा लेकिन, सीधे खाते में #directcashsubsidy से जानकार उम्मीद जताने लगे हैं कि MNREGA (मनरेगा)की तरह #directcashsubsidy से यूपीए 3 हो सकती है।

माना जा रहा है कि करीब 10 करोड़ गरीब परिवारों को ये सब्सिडी सीधे खाते में मिलेगी। आगे इसमें सब्सिडी के साथ वजीफा, पेंशन या फिर दूसरी सरकारी योजनाओं का फायदा भी जोड़ दिया जाएगा। 10 करोड़ परिवार मतलब 40 करोड़ लोगों को सीधे खाते में रकम आने का भ्रम। और, भारतीय लोकतंत्र में जिस तरह मतदान होता है। उसमें 10-12 करोड़ वोट अगर मिले तो, पार्टी सत्ता में। बस यही फॉर्मूला है यूपीए 2 का यूपीए 3 बनाने के लिए। इसीलिए वित्त मंत्री पी चिदंबरम इस योजना  का एलान करते हुए इसे खुलेआम गेम चेंजर कह रहे हैं। अब वोट के लिए नोट देने के लिए ये चुनाव आयोग के कानूनी दायरे में भी नहीं आएगा। और, सब्सिडी घटाने पर रोज सवाल करने वाली जनता भी शांत रहेगी।

महंगाई, भ्रष्टाचार यूपीए 2 के लिए मुसीबत बन रहे हैं। उसका जवाब ये #directcashsubsidy है। सरकार कह रही है ये अलादीन का चिराग है। इससे सारे रोग दूर हो जाएंगे। देश क…

मीडिया का परिपक्व व्यवहार

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मुंबई के पालघर की दो बहादुर कन्याओं Shaheen Dhada और Rinu Shrinivasan ने वो कर दिखाया जो, न होता तो, बाल ठाकरे का असल चरित्र उनके मरने के साथ दफन हो जाता। दरअसल यही सारे जीवन बाल ठाकरे रहे। विवादित, दबंग, अपने खिलाफ खड़े लोगों को मुंहतोड़ जवाब देने वाले और मृत्यु के बाद कम से कम हिंदू संस्कार में तो, किसी को बुरा कहने का रिवाज नहीं है। सो, मीडिया ने भी नहीं कहा। इसमें गलत भी क्या था। अब जब Shaheen Dhada और Rinu Shrinivasan की फेसबुक पोस्ट के बाद शिवसैनिक मूल चरित्र में आए तो, मीडिया फिर फॉर्म में आ गया। कतार में लगे अनुशासित, आंसू बहाते शिवसैनिकों को भी अगर कोई मीडिया से गालूी खिलाना चाहता था तो, अच्छा हुआ वो, मंशा पूरी न हुई। मीडिया जाने-अनजाने खुद ही परिपक्व हो रहा है। दुखी होने वाले दुखी होते रहें।