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Showing posts from October, 2016

धनतेरस पर धन बरसे

धनतेरस पर भेजे जा रहे संदेशों में एक संदेश खूब जमकर भेजा गया है। वो संदेश है कि आप इतना धन कमाएं कि आपका नाम काले धन वालों की सूची में आ जाए। मेरे पास भी किसी ने भेजा था। अब मैं उनको क्या जवाब देता कि काले धन की सूची में शामिल होने की तो बात ही अलग है। अगर काले धन की कुछ महक भी आती है, तो हम जैसे लोग भयभीत हो जाते हैं। ऐसे ही भयभीत लोगों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की काले धन की योजना में औसत प्रति व्यक्ति एक करोड़ रुपये का काला धन घोषित किया। कमाल ये कि इसे प्रधानमंत्री, वित्तमंत्री बड़ी सफलता बता रहे हैं। ये तो डरे, सरकार-प्रशासन को साध न पाने वाली प्रजाति है। वरना जो साध पाती है, मजे से काले धन से ही सुखी-सम्पन्न है। ये मानते हुए कि कम से कम हमारे सीधे सम्पर्क वाले ज्यादातर हमारी ही तरह हैं। मैं सबके लिए ये शुभकामना करता हूं। धन-लक्ष्मी जी का आशीर्वाद मुझे भी अच्छी ही लगता है। बस जरा डरपोक किस्म का आदमी हूं, इस मामले में।
धनतेरस पर धन बरसे। 
सब पर बरसे। 
लेकिन औक़ात भर। 
मतलब इतना कि जितने धन का सम्मान करने की औक़ात हो। 
जितने धन से मस्त रहा जा सके। 
डरकर अपना सारा सुख ख़त्म न करना पड़ …

वृहद, विविध, वैचारिक विवेचना का मंच तैयार है

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पांचवां मीडिया चौपाल 22,23 अक्टूबर को हरिद्वार में हो रहा है। संयोगवश सभी मीडिया चौपाल में शामिल होने का अवसर मिला है। पिछले वर्ष ग्वालियर के मीडिया चौपाल में भेड़ियाधंसान ज्यादा होने से चौपालियों में थोड़ा उत्साह कम सा होता दिख रहा था। और ग्वालियर की चौपाल से लौटने के बाद कई लोगों ने मुझसे कहाकि अब अगली चौपाल में नहीं जाऊँगा। ग्वालियर के बाद मेरे मन में भी सवाल बड़ा था कि क्यों मुझे मीडिया चौपाल में जाना चाहिए। इसीलिए हरिद्वार में होने वाली ये पांचवीं मीडिया चौपाल बड़ी महत्वपूर्ण हो चली है। इस चौपाल के लिए पंजीकरण कराने वालों की सूची इस अवसर को और महत्वपूर्ण बना देती है। करीब 300 लोगों ने हरिद्वार में होने वाली इस चौपाल के लिए पंजीकरण किया है। मीडिया चौपाल कराने वाली स्पंदन संस्था के कर्ताधर्ता अनिल सौमित्र का ये व्यक्तित्व प्रभाव दिखाता है कि ग्वालियर के नकारात्मक मोड़ पर खत्म हुए मीडिया चौपाल को उन्होंने सफलतापूर्वक बेहद सकारात्मक मोड़ पर ला दिया है। शायद यही वजह है कि मुझे लग रहा है कि ये अब तक की सबसे अच्छी मीडिया चौपाल होने जा रही है। आयोजन समिति में अनिल सौमित्र ने मुझे शामिल क…

भइया यूपी में किसी नेता के पास जातीय मत हैं नहीं

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घोर कांग्रेसी रीता बहुगुणा जोशी बीजेपी में आ सकती हैं। और वो आएंगी तो बड़े ब्राह्मण नेता के तौर पर आएंगी, ऐसा कहा जा रहा है। एक भाई विजय बहुगुणा पहले से ही बीजेपी में हैं। हालांकि, रीता पहले भी समाजवादी पार्टी में रही हैं। लेकिन, बीजेपी में उनके जाने की अटकलों को ब्राह्मणों को लुभाने की कांग्रेसी कोशिश में एक बड़ी बाधा के तौर पर देखा जा रहा है। जबकि, उत्तर प्रदेश में शायद ही कोई ऐसा नेता हो अपनी जाति को पूरी तरह से बांधकर रखने की ताकत रखता हो। उत्तर प्रदेश में जाति-जाति सब चिल्ला रहे हैं। जातीय नेताओं से लेकर जातीय सम्मेलनों तक की धूम है। एक पार्टी से दूसरी पार्टी में जाने वाला नेता जाति के आधार पर ही अपना प्रभाव जमाने की कोशिश करता दिख रहा है। लेकिन, उत्तर प्रदेश की जातीय सच्चाई ऐसी है नहीं। दरअसल, उत्तर प्रदेश एक ऐसा प्रदेश बन गया है, जहां किसी भी जाति का वोट पक्के तौर पर किस पार्टी को मिलेगा, ये समझ पाना बड़ा कठिन है। बीजेपी ब्राह्मण, बनिया और अगड़ों की पार्टी, समाजवादी पार्टी को छोड़कर यादव कहीं नहीं जाने वाला और बीएसपी का हाथी छोड़ दलितों को कुछ नहीं लुभाता, खासकर जाटव मायावती के…

उत्तर प्रदेश में 17वीं विधानसभा हवा में उड़ते वोटों का चुनाव है

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उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा प्रदेश है। ये सबसे बड़ा प्रदेश कई बार देश की राजनीति के बदलावों को भी सबसे आगे बढ़कर रास्ता दिखाता रहा है। 2017 के विधानसभा चुनावों में भी एक ऐसा ही रास्ता बनता दिख रहा है। वो रास्ता है जाति संघर्ष से आगे बढ़कर जाति प्रतिस्पर्द्धा की राजनीतिक यात्रा के शुरू होने का। बेहद कठिन जातीय खांचे में बंटे उत्तर प्रदेश में इस बार जातियों के वोट पाने के लिए राजनीतिक दलों को गजब की मशक्कत करनी पड़ रही है। कुल मिलाकर जातीय चेतना का एक चक्र पूरा हो चुका है। दिसंबर 1989 में जब पहली बार मंडल की लहर पर सवार होकर मुलायम सिंह यादव उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने थे, उस समय वो ऐसे गैरकांग्रेसी मुख्यमंत्री थे, जिन्होंने उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की राजनीतिक जमीन बंजर कर दी थी। इससे पहले चरण सिंह, बनारसी दास और रामनरेश यादव गैरकांग्रेसी मुख्यमंत्री रहे लेकिन, उनका कार्यकाल बड़ा छोटा रहा। लेकिन, जब मुलायम सिंह यादव मुख्यमंत्री बने, तो वो अति पिछड़ी जातियों के अकेले नेता बन गए। किसी एक जाति समूह को लेकर राजनीति की ऐसी मजबूत बुनियाद उत्तर प्रदेश में मुलायम सिंह यादव ने ही तैयार क…

100000 करोड़ रुपये का बैड लोन है राहुल गांधी का किसान मांग पत्र

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देवरिया से दिल्ली पहुंचे राहुल गांधी ने संसद मार्ग पर एक ऐसा शब्द बोल दिया कि जिस मकसद से राहुल गांधी और कांग्रेस ने पूरी खाट पर चर्चा की थी, उसके मायने ही खत्म हो गए। नरेंद्र मोदी पर सैनिकों के खून की दलाली के लिए राहुल गांधी की जमकर आलोचना हुई। इस कदर कि कांग्रेस को अपने युवराज को बचाना मुश्किल सा हो गया। ये ऐसा बयान था जिसकी आलोचना होनी ही चाहिए। लेकिन, ये बयान पूरी तरह से राजनीतिक बयान है और इसका कोई बहुत सीधा असर नहीं पड़ने वाला है। लेकिन, राहुल गांधी की बड़ी आलोचना जिस बात के लिए होनी चाहिए। उसकी चर्चा शायद ही कहीं हो रही है। राहुल गांधी और कांग्रेस एक ऐसी जमीन तैयार कर रहे हैं जिससे देश की तेज तरक्की की राह में बड़ी रुकावट आ सकती है। जब केंद्र सरकार सरकारी बैंकों के डूबते कर्ज पर पूर्व सीएजी विनोद राय की अगुवाई में बनी समिति से ये चाह रही है कि सरकारी बैंकों के डूबते कर्ज से बैंकों को डूबने से बचाने की कोई राह निकाली जाए, ऐसे समय में राहुल गांधी ने सरकारी बैंकों को कम से कम 100000 करोड़ रुपये के बैड लोन के जाल में डालने की जमीन तैयार कर दी है। और ये जमीन तैयार हो रही है राहुल ग…

यूपी में बीजेपी की पॉलिटिकल “सर्जिकल स्ट्राइक”

करीब एक महीने पहले ही ये तय हो गया था कि स्वाति सिंह को उत्तर प्रदेश भारतीय जनता पार्टी की महिला मोर्चा का अध्यक्ष बनाया जाएगा। लेकिन, एक सही मौके का इंतजार किया जा रहा था। और जब मायावती ने सर्जिकल स्ट्राइक पर सरकार को नसीहत दी और कहाकि बीजेपी को इसका राजनीतिक फायदा नहीं उठाना चाहिए, तो भारतीय जनता पार्टी ने उत्तर प्रदेश में एक राजनीतिक “सर्जिकल स्ट्राइक” कर दी। ये राजनीतिक “सर्जिकल स्ट्राइक” है स्वाति सिंह को भारतीय जनता पार्टी महिला मोर्चा का प्रदेश अध्यक्ष बनाया जाना। ये वही स्वाति सिंह हैं, जिनकी पहचान अभी भी @BJPSwatiSingh की पहचान ट्विटर पर बीजेपी के पूर्व उपाध्यक्ष दयाशंकर सिंह की पत्नी के तौर पर ही है। स्वाति सिंह के पति दयाशंकर सिंह जिस मायावती के खिलाफ टिकट बेचने के आरोप को लेकर शर्मनाक बयान देने की वजह से निकाले गए। उन्हीं मायावती की पार्टी के नसीमुद्दीन सिद्दीकी और दूसरे बड़े नेताओं की मौजूदगी में दयाशंकर सिंह की पत्नी स्वाति सिंह और उनकी नाबालिग बेटी के खिलाफ अभद्र बयानों ने स्वाति सिंह को घर की दहलीज से बाहर लाकर उत्तर प्रदेश में नारी स्वाभिमान की लड़ाई का बड़ा चेहरा बना…