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Showing posts from September, 2007

बेशर्मी की हदें टूट गईं मुलायम राज में

उत्तर प्रदेश में जिस्म बेचकर सिपाही की नौकरी मिली। ये सब उस समय हुआ जब मुलायम सिंह यादव उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री थे। पुलिस भर्ती घोटाले की जांच में अब तक का ये सबसे चौंकाने वाला और शर्मनाक तथ्य सामने आया है। मामले के जांच अधिकारी शैलजाकांत मिश्रा पत्रकारों को ये बात बताते हुए खुद शर्म महसूस कर रहे थे। उन्होंने बताया कि जांच के दौरान सिपाही की भर्ती में शामिल हुई कई लड़कियों ने उनसे बताया कि उन्हें सिपाही बनाने के एवज में बिस्तर गर्म करने को कहा गया। जब ऐसा चल रहा हो तो, जाहिर है जिसने भी मना किया वो, सिपाही की सूची से बाहर हो गया।

उत्तर प्रदेश में गलत तरीके से नौकरी पाने वाले 18,000 सिपाहियों की भर्ती अब तक मायावती रद्द कर चुकी हैं। पहले 6504 सिपाहियों की भर्ती रद्द हुई, अब 7,400। 25 IPS अफसर भी निलंबित किए जा चुके हैं। बड़े पुलिस अधिकारियों की भी गर्दन जब मायावती ने नापनी शुरू की तो, मुलायम इसे अपने ऊपर राजनीतिक हमला बता रहे थे। वैसे मुलायम अभी भी बेशर्मी के साथ कह रहे हैं कि सब कुछ राजनीतिक साजिश है। वो, मायावती को चेतावनी भी दे रहे हैं कि मायावती की भी सरकार जाएगी। अच्छा है मुल…

प्रियदर्शन की ही ढोल बज गई

आज मैं प्रियदर्शन की एक और फिल्म ढोल देखकर आया। सुबह अखबारों में रिव्यू और रेटिंग देखकर गया था। तो, लगा था कि फिल्म अच्छी ही होगी। खैर, मैं इस फिल्म को कॉमेडी समझने की गलती करके देखने गया था। कुछ जगहों पर राजपाल यादव की चिरपरिचित कॉमेडी को छोड़ दें तो, कहानी ने कहीं नहीं हंसाया। लेकिन, राजपाल यादव भी अब एक जैसा ही मुंह बनाकर लोगों को हंसाने की कोशिश करते दिखे।

कुल मिलाकर पूरी फिल्म में प्रियदर्शन की ही ढोल बजती नजर आई। एक भी चरित्र ऐसा नहीं था जो, भूमिका पर खरा उतर सका हो। ओमपुरी जैसा शक्तिशाली अभिनेता भी फिल्म में किसी काम का नहीं दिखा। प्रियदर्शन की पुरानी फिल्मों की ही तरह इस फिल्म में भी लोगों को हंसाने के लिए चरित्रों को हर दस मिनट पर बुरी तरह पिटवाया। एक-दो रहस्य भी थे। जो, दर्शकों को पहले से ही पता था कि कुछ खास नहीं निकलने वाला।
प्रियदर्शन ने अपने पुराने फॉर्मूले के तहत चरित्रों को खूब भगाया। इतना कि ढोल भी कहीं-कहीं पर भागमभाग होने का भ्रम देने लगती है। फिल्म में मासूम हीरोइनें कॉमेडी का हिस्सा नहीं थी। प्रियदर्शन की फिल्मों से दर्शक हमेशा यही उम्मीद लेकर जाते हैं कि वो कु…

मुंबई रहने के लिहाज से सबसे अच्छा शहर नहीं है

रहने के लिहाज से दिल्ली देश का सबसे अच्छा शहर है। इसका मतलब ये है कि आधुनिक सुविधा, जीने-रहने की आसानी दिल्ली में सबसे ज्यादा है। सड़कें अच्छी हैं। सड़कों पर जाम कम है और जरूरी सुविधाओं के मामले में बहुत खराब मुंबई से अभी भी सस्ता है। ये बात कह रही है शहरी विकास मंत्रालय की हाल ही में मुंबई में जारी रिपोर्ट।

दिल्ली रहने के लिए देश का सबसे अच्छा शहर है। इसके लिए तो, ढेर सारे तर्क हैं। दिल्ली- देश की राजधानी है। दिल्ली- देश के सारे नेता-बड़े अधिकारी यहीं रहते हैं। विदेशों से आने वाले प्रतिनिधिमंडल-नेताओं को यहीं रुकाया जाता है। इन सब छोटी-बड़ी वजहों से दिल्ली को बुनियादी सुविधाओं यानी सड़क, बिजली, पानी के लिहाज से बेहतर होना ही पड़ता और, वो है। दिल्ली सरकार के साथ ही केंद्र की सरकार भी इस शहर/राज्य को सजाने-संवारने की हर संभव कोशिश करती रहती है।

दिल्ली रहने के लिहाज से सबसे अच्छा है, इसके पक्ष में ऐसे सैकड़ो तर्क हैं। लेकिन, ऐसे ही सैकड़ो तर्क होने के बाद भी देश की आर्थिक राजधानी मुंबई को रहने लायक देश के सबसे अच्छे शहर का खिताब नहीं मिल सका। आपको लगेगा कि इसमें क्या बात हुई ये तो, च…

फिर एक दिल्ली वाले ने आग लगा दी!

इंडियन आइडल प्रतियोगिता से कौन बाहर हुआ। कौन अंदर आया। इस पर हर बार की तरह इस बार भी खूब विवाद हुआ। लेकिन, इस बार जब फाइनल मुकाबला प्रशांत तमांग और अमित पॉल के बीच हुआ तो, एक जो सबसे अच्छी बात दिखी वो ये कि इंडियन आइडल के बहाने पूरा पूर्वोत्तर भारत, भारत में खुशी-खुशी शामिल हो गया था। पूर्वोत्तर भारत के कई शहर प्रशांत तमांग और अमित पॉल के पोस्टरों से लदे पड़े थे। सबको लग रहा था पूर्वोत्तर भारत का भाई, बेटा, पूरे भारत का हीरो बनने जा रहा है। ये पहली बार हो रहा था।

वैसे इससे पहले भी असम के देबोजीत उर्फ देबू इंडियन आइडल बन चुके हैं। और, देबोजीत की प्रतिभा पर भी किसी को कोई शक नहीं है। लेकिन, पिछली बार मीडिया में बार-बार ये बात आती रही कि असम के उग्रवादी संगठन उल्फा ने कहा है कि अगर देबोजीत नहीं जीता तो, वो हिंसा फैला देंगे। उल्फा की ओर से देबोजीत के समर्थन में एक फरमान जारी करने की भी खबर थी। इस बार के इंडियन आइडल की दौड़ में लगे सुर के सरताजों के लिए न तो किसी ने फरमान जारी किया और न ही इस बार कहीं से किसी क्षेत्रवाद या भाषावाद की बदबू आई।

पिछले जाने कितने सालों से भारत से कटे होने का …

स्वीडन की जांच एजेंसी सोनिया माइनो गांधी से सवाल पूछना चाहती है?

बीस साल पुराना बोफोर्स मामला फिर सुर्खियों में है। इस बार सुर्खियों की वजह देश के किसी नेता के आरोप से नहीं बल्कि स्वीडन से आ रही है। बोफोर्स मामले की जांच कर रहे स्वीडन के अधिकारी सोनिया गांधी से जवाब मांग रहे हैं। स्वीडन के जांच अधिकारी स्वेन लिंडस्टॉर्म सोनिया और क्वात्रोची के रिश्ते की पूरी हकीकत जानने के लिए सोनिया से सवाल पूछना चाहते हैं। जो आरोप अब तक कांग्रेस की विरोधी पार्टियों के नेता लगाते थे, उसकी पुष्टि स्वीडन के जांच अधिकारी लिंडस्टॉर्म कर रहे हैं। शुक्र है कि लिंडस्टॉर्म के विदेशी होने से कांग्रेस इसे त्याग की देवी सोनिया गांधी पर राजनीतिक हमला बताकर देश को धोखा नहीं दे सकती। एक निजी टीवी चैनल पर लिंडस्टॉर्म ने साफ कहा कि बोफोर्स की खरीद के मामले में कमीशन के तौर पर अलग-अलग खाते में करोड़ो रुपए जमा किए गए। ये खाते बोफोर्स मामले के मुख्य आरोपी ओटावियो क्वात्रोची के नियंत्रण वाले थे। इन्हीं में से एक खाते में जमा तीस करोड़ रुपए सीबीआई की लापरवाही से करीब दस महीने पहले क्वोत्रोची लंदन से निकालने में सफल हो गया। कांग्रेस की अगुवाई वाली भारत सरकार ने खाता फ्रीज करने तक की अ…

नेताओं को शर्म क्यों नहीं आती

भारतीय क्रिकेट की दुनिया की सबसे बड़ी जीत हासिल कर नई टीम इंडिया भारत लौटी तो, मुंबई के लोगों ने टीम का ऐतिहासिक सम्मान किया। जीत जितना ही ऐतिहासिक। विश्व विजेता टीम के हर खिलाड़ी को सम्मान के साथ ही इनाम से भी लाद दिया गया। आखिर ऐसा मौका 24 साल बाद जो देश को मिला था। लेकिन, ऐसे ऐतिहासिक मौके पर भी नेताओं ने देश को शर्मसार कर दिया।
मुंबई एयरपोर्ट से वानखेड़े स्टेडियम पहुंचने तक बीसीसीआई अध्यक्ष शरद पवार सहित कांग्रेस-एनसीपी के नेता विश्व विजयी टीम को इस तरह से घेरे रहे जैसे, धोनी ब्रिगेड महाराष्ट्र सरकार या फिर कांग्रेस-एनसीपी की टीम हो। केंद्रीय कृषि मंत्री शरद पवार के साथ ही पवार के भरोसेमंद महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री ने टीम इंडिया को बंधक सा बना लिया था। अच्छा हुआ दो मंजिल की खुली बस में भारतीय सूरमाओं को आना था नहीं तो, पवार-पाटिल जैसे नेता तो शायद ही असली हीरोज की हमें शक्ल भी देखने देते। टीम के साथ लोगों के उमड़े सैलाब का कांग्रेस-एनसीपी राजनीतिक फायदा उठाने की कोशिश में ऐसे लगे थे कि पार्टी के कार्यकर्ता इस ऐतिहासिक जीत पर भी भारत झंडा लहराने के बजाए अपनी पार्टी का झंडा लहरा…

डेरा सच्चा सौदा के खिलाफ कार्रवाई करने से डरती सरकारें

डेरा सच्चा सौदा के आश्रम से एक और साध्वी गायब हो गई। एक और साध्वी इसलिए कि इसके पहले भी बाबा राम रहीम सिंह पर साध्वियों को गायब कराने और उनके साथ बलात्कार तक के आरोप लग चुके हैं। कमाल ये है कि इस मामले में सीबीआई की चार्जशीट दाखिल होने के बाद भी अब तक राम रहीम के खिलाफ न तो, पंजाब या हरियाणा की राज्य सरकार और न ही केंद्र सरकार कुछ कर पाई है।

आश्रम से गायब हुई साध्वी सुखजीत कौर का गायब होना इसलिए भी ज्यादा महत्व का हो जाता है। क्योंकि, सुखजीत कौर, खट्टा सिंह की भतीजी है। वही खट्टा सिंह जिसने सीबीआई के सामने राम रहीम के खिलाफ ये बयान दिया है राम रहीम सिंह ने उसे और दूसरे 6 लोगों को रंजीत सिंह की हत्या करने का आदेश दिया था। सिरसा में बाबा के आश्रम के बारे में पहले से ही ये खबरें आती रही हैं कि आश्रम के हर तरह के कुकर्म होते हैं। और, बाबा के चोले की वजह राम रहीम का पाप लोगों के सामने नहीं आ पाता।

रंजीत सिंह की हत्या 2002 में हुई थी। कहा जाता है कि राम रहीम सिंह के खिलाफ रंजीत सिंह ने अखबारों में सूचनाएं दी थीं। और, उस समय खट्टा सिंह राम रहीम का निजी वाहन चलाता था। कुछ दिन पहले ही एक टीवी…

हम अब भी गुलाम हैं क्या

आजाद भारत में अंग्रेज इंग्लैंड से आकर विजय दिवस मना रहे हैं। 1857 के भारतीय सैनिकों के विद्रोह को दबाने में मारे गए अंग्रेज सैनिकों-अफसरों को उनके परिवार के लोग भारत में हर उस जगह जाकर महान बता रहे हैं। जहां उनके बाप-दादाओं ने हमारे स्वाधीनता सेनानियों का खून बहाया था। अंग्रेज हुकूमत के खिलाफ भारतीय सैनिकों की बगावत का वो मजाक उड़ा रहे हैं। 1857 के भारतीय सैनिकों को विद्रोह को बेरहमी से कुचलने वाले मेजर जनरल हैवलॉक के पड़पोते को विजय दिवस मनाने की इजाजत हमारी सरकार ने ही दी है।

कमीने हैवलॉक का पड़पोता मार्क एलेन हैवलॉक के साथ हम भारतीयों का मजाक उड़ाने के लिए पूरा अंग्रेज दस्ता साथ आया है। हमें तो पता भी नहीं चलता। वो आकर हम पर 200 साल हुकूमत करने का जश्न मनाकर चले भी जाते। लेकिन, मेरठ में विद्रोह दबाने वाले अंग्रेज अफसरों के बचे निशानों पर विजय दिवस मनाने की खबर मीडिया में आने के बाद इसका विरोध शुरू हुआ तो, लोगों के गुस्से को दबाने के लिए लखनऊ में गोरी चमड़ी वालों को भारतीयों की बगावत को कुचलने वाले अफसरों के रिश्तेदारों को विजय दिवस मनाने की इजाजत वापस ले ली गई।

लेकिन, सवाल यही है …

कांग्रेस के नेता राहुल गांधी, बीजेपी में नेता कौन?

कांग्रेस अभी से 2009 के लोकसभा चुनाव की तैयारी में लग गई है। सारे मीडिया सर्वेक्षण बता रहे हैं कि अगर अभी लोकसभा चुनाव होते हैं तो, इसका सबसे ज्यादा फायदा कांग्रेस को और सबसे ज्यादा नुकसान लेफ्ट को होगा। इसमें बीजेपी की तस्वीर कुछ साफ नहीं दिखती। अंटकी हुई सी है। जैसे बीजेपी में नेता कौन का सवाल अंटका हुआ है। बीजेपी की भोपाल की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में अटल बिहारी बाजपेयी नहीं गए तो, लाल कृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी से लेकर दूसरी पांत के नेता भी अपनी दावेदारी का अपनी तरह से हल्ला करने लगे। तब तक बुढ़ऊ अटल बिहारी ने फिर बोल दिया- हम लौटेंगे।

वैसे आज बीजेपी की तरफ से ये बात रही है कि नेता तो अटल बिहारी ही हैं। लेकिन, आज जो दिन की सबसे बड़ी खबर रही वो थी, राहुल गांधी को कांग्रेस का महासचिव बनाने की। वैसे इस खबर का ऐलान भर होना था। लेकिन, आज ऐलान के बाद ये तय हो गया कि अब इसमें कुछ दबा छिपा नहीं है कि कांग्रेस की चौथी पीढ़ी से कौन देश की अगुवाई करने वाला है। अब राहुल न तो विदेशी मूल के हैं और न ही अभी तक कोई ऐसा कृत्य किया है, जिससे किसी को उंगली उठाने का मौका मिले। वैसे सोनिया ने राहु…

ये वाला नुस्खा याद रहेगा ना

मैं चक दे इंडिया फिल्म देखने के बाद से ही लगातार ये सोच रहा था कि ये कबीर खान कहां मिलेगा। जो, हमारी क्रिकेट, हॉकी या दूसरी टीमों को टीम की तरह खेलना सिखा सके। बहुत दिमाग लगाने पर भी समझ में नहीं आ रहा था। लेकिन, अब समझ में आया कि हमें कबीर खान की जरूरत ही नहीं है। क्योंकि, जिस बात के लिए कबीर खान की जरूरत थी वो तो, टीम इंडिया ने सीख लिया है। आज के जमाने की फटाफट क्रिकेट यानी 20-20 में भारत विश्वविजेता हो गया है। फाइनल मैच से पहले तक धोनी की धाकड़ धुरंधरों की टीम कमाल दिखाती रही। लेकिन, हम यही समझते रहे कि शायद तुक्का लग रहा है। इंग्लैंड के मैच में युवराज के छक्कों को छोड़ इस बात की चर्चा कम ही हुई कि टीम इंडिया खेली। सहवाग-गंभीर की सलामी जोड़ी की तेज-ताकतवर पारी लोगों के जेहन से गायब हो गई। दरअसल हम भारतीयों की आदत ही कुछ ऐसी है। हमारे लिए हर जगह एक नेता चाहिए और नेता भी ऐसा जो, अपने पूरे साथियों के बराबर काम खुद करे। यानी हर जीत का सेहरा नेता के ही सिर बंधे। वो, नेता चाहे कभी कपिल बने, गावस्कर बने, सौरभ गांगुली बने, सचिन तेंदुलकर बने या फिर युवराज, सहवाग या टीम इंडिया का कोई और खिल…

हम भ्रष्टन के भ्रष्ट हमारे! तीसरी कड़ी

भ्रष्टाचार जगह-जगह कितना संगठित तंत्र बन गया है। इसका अंदाजा आज मायावती सरकार के एक फैसले से हुआ। उत्तर प्रदेश में मायावती सरकार ने 6504 सिपाहियों की भर्ती रद्द कर दी गई है। ये सभी भर्तियां मुलायम सिंह यादव के शासनकाल में हुई थीं। इस भर्ती के दौरान रहे 12 IPS अफसरों को निलंबित कर दिया गया है। इन पर भर्ती में गड़बड़ी का आरोप है। इन अधिकारियों पर विभागीय कार्रवाई भी की जाएगी। निलंबित 12 आईपीएस अधिकारियों में 1 आईजी, 9 डीआईजी हैं। 2 एसपी रैंक के अधिकारी भी निलंबित हुए हैं। इसके अलावा 18 एएसपी और 40 डीएसपी रैंक के अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की सिफारिश की गई है।

55 केंद्रों में से 14 पर हुई भर्ती की जांच के बाद मायावती सरकार ने ये फैसला लिया है। जांच में पाया गया है कि इन सिपाहियों की भर्ती में कॉपी सेंटर से बाहर लिखी गई। कई कॉपियों में नंबर काटकर फिर से बढ़ाए गए। जांच में ये भी सामने आया है कि इन सिपाहियों ने भर्ती के लिए दो से चार लाख रुपए दिए हैं। यानी उत्तर प्रदेश के लोगों की सुरक्षा के लिए भर्ती होने वाले इन सिपाहियों की शुरुआत ही रिश्वत के जरिए हुई। अब अगर ये दो से चार लाख…

हम भ्रष्टन के भ्रष्ट हमारे! दूसरी कड़ी

आज ही सुबह मैंने महाराष्ट्र के डीजीपी पी एस पसरीचा और पंजाब के पूर्व डीजीपी एस एस विर्के के भ्रष्टाचार के किस्से लिखे। शाम को मैं टीवी चैनल देख रहा था तो, एक और राज्य बिहार के डीजीपी के भ्रष्ट आचरण का नमूना सामने आ गया। बिहार के डीजीपी जनता दरबार में फरियादियों से चरण स्पर्श कराकर उन्हें कार्रवाई का आशीर्वाद दे रहे थे। ये भ्रष्टाचार तो ऐसा फैल गया है कि इनके नमूना तो, कहीं से भी कोई भी उठा ले।
हैदराबाद से एक खबर आई कि फ्लाईओवर गिरने से कई लोगों की मौत हो गई। ये फ्लाईओवर अभी बना भी नहीं था। बन रहा था, बन चुका होता तो, न जाने कितने और लोगों को मौत के गाल में ले जाता। फ्लाईओवर कोई छोटा-मोटा ठेकेदार नहीं बना रहा था। ऐसे कामों के लिए कॉन्ट्रैक्ट लेने वाली बड़ी कंपनी गैमन इंडिया के पास इसका काम था।

हैदराबाद से ताजा खबर थी, इसलिए पूरे देश को दिख गया। लेकिन, मैं मुंबई में भ्रष्टाचार के नमूने रोज ही देख लेता हूं। मुबंई से उसके पड़ोसी शहर ठाणे जाने के रास्ते में तो, मुझे भ्रष्टाचार के नमूने ऐसे मिल जाते हैं, जैसे मधुमक्खी के किसी छत्ते से शहद टपक रही हो। मुंबई की सड़कों को दुरुस्त करने को लेकर…

हम भ्रष्टन के भ्रष्ट हमारे!

दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ के चुनाव में NSUI के चारों प्रत्याशी जीत गए हैं। इन्हें दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्रों का भरोसा मिल गया है। अगले साल भर तक ये चारों दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्रों के नेता रहेंगे। सीधे-सीधे देखने में इनका नेता बनना एक सामान्य प्रक्रिया लगती है। लेकिन, ये इतनी सामान्य प्रक्रिया है नहीं, जितनी दिख रही है। दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ के उपाध्यक्ष बन गए हैं NSUI के देवराज तेहलान। देवराज तेहलान ने चुनाव के एक दिन पहले एक निजी चैनल के खुफिया कैमरे पर बोला था कि लाखों रुपए खर्च कर उन्हें टिकट मिला है और वो चुनाव जीतने के लिए कुछ भी कर सकते हैं। लाखों रुपए खर्च कर सकते हैं। छात्रों को शराब बांट सकते हैं और जो, भी जरूरी होगा वो करेंगे।
दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्रों ने और कांग्रेस के आलाकमान ने तेहलान का ये इकबालिया बयान सुना होगा। लेकिन, न तो कांग्रेस ने तेहलान के खिलाफ कुछ किया और न ही छात्रों ने तेहलान को उपाध्यक्ष बनने से रोका। इसके बाद तो यही लगता है कि अब भ्रष्टाचार मुद्दा ही नहीं रह गया है, हमें भ्रष्ट होने में और भ्रष्टाचार करने में मजा आने लगा है।

जि…