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Showing posts from January, 2017

लतियाना तो बनता है !

पूरा बॉलीवुड अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के लिए उठ खड़ा हुआ है। संजय लीला भंसाली को लतियाए जाने के बाद ये स्वतंत्रता बोध हुआ है। फ़िल्म, कहानी समाज में कोई भी सन्देश देने का सबसे प्रभावी माध्यम है। इसी में टीवी धारावाहिक भी जोड़िए। कब किसी फ़िल्म में हिन्दू समाज की किसी कुरीतियाँ को दिखाए जाने पर कोई भी विरोध करके स्वीकार्यता पा सका है। यहाँ तक कि भारतीय समाज ने लगातार कहानी/फ़िल्मों से भी खुद को सुधारा है और उस अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का पूरा सम्मान किया है। लेकिन भंसाली को लतियाए जाने पर किसी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के लिए बॉलीवुड के प्रगतिशाली कमर कस रह हैं। उस अभिव्यक्ति ने लगातार स्वतंत्रता के नाम पर भारतीय समाज को लतियाने की कोशिश की है। अपराधियों को फिल्में ऐसे महान बना दे रही हैं कि समाज का नौजवान अपराधी बन जाना चाहता है। इतनी प्रसिद्धि,प्रभाव अपराधी को दिखाया जाता है, कौन भला ये नहीं चाहता। इतिहास के चरित्र इनकी कलात्मकता में परिहास बन जात हैं। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की लड़ाई में भंसाली के साथ खड़ा कोई हंसल मेहता है जो कह रहा है कि बॉलीवुड को राष्ट्रगान के समय खड़े न होकर भं…

मजबूर मायावती या मुख्तार अंसारी

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उत्तर प्रदेश की राजनीति हर बीतते दिन के साथ बदल रही है। जिस मुख्तार अंसारी की पारिवारिक पार्टी कौमी एकता दल के समाजवादी पार्टी में विलय की घटना ने मुलायम सिंह के बाद सपा के सबसे ताकतवर नेता शिवपाल यादव को एक विधानसभा का नेता बनाकर रख दिया, अब वही कौमी एकता दल मायावती की बीएसपी में समाहित हो गई है। एक दशक से ज्यादा समय से जेल में बंद अपराधी नेता मुख्तार अंसारी की कौमी एकता दल को बीएसपी का हिस्सा बनाते मायावती ने कहाकि मुख्तार के खिलाफ कोई अपराध साबित नहीं हुआ है। अगर अपराध साबित हुआ तो वो कोई कार्रवाई करने से हिचकेंगी नहीं। कौमी एकता दल के विलय के बदले में अंसारी परिवार को तीन सीटें मायावती ने दे दीं। मऊ सदर विधानसभा सीट से मुख्तार बीएसपी प्रत्याशी होंगे। घोसी से मुख्तार का बेटा बीएसपी से लड़ेगा और बगल के जिले गाजीपुर को मोहम्मदाबाद सीट से मुख्तार के सिबगतुल्लाह अंसारी चुनाव लड़ेंगे। 1996 में पहली बार बीएसपी टिकट पर जीतने के बाद जेल में रहने के बावजूद मुख्तार लगातार मऊ सदर से चुनाव जीत रहे हैं। मोहम्मदाबाद सीट पर भी अंसारी परिवार का ही कब्जा है। यहीं से कृष्णानंद राय की पत्नी बीजेपी से…

अटल-आडवाणी-जोशी की तैयार की जमीन दूसरों को सौंप रहे हैं मोदी-अमित शाह

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अमित शाह हर हाल में उत्तर प्रदेश जीतना चाहते हैं। मूल वजह ये कि अमित शाह जानते हैं कि चुनाव जीतकर ही सब सम्भव है। गुजरात में अमित शाह ने चमत्कारिक जीत का जो मंत्र जाना था, उसे वो 2014 के लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में दोहरा चुके हैं। लेकिन, उसी लोकसभा चुनाव की चमत्कारिक जीत ने अब अमित शाह के ऊपर ये दबाव बहुत बढ़ा दिया है कि वो हर हाल में उत्तर प्रदेश में बीजेपी का सरकार बनवा पाएं। अच्छे प्रदर्शन के लिए दबाव कारगर होता है। लेकिन, कई बार अपेक्षित परिणाम पाने के दबाव में ऐसे उल्टे काम हो जाते हैं, जिसका पता बहुत बाद में चलता है। उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी अमित शाह की अगुवाई में कुछ ऐसे ही काम कर रही है। भारतीय जनता पार्टी की 2 सूची आ चुकी है। 149 और 155 मिलाकर 299 सीटों के प्रत्याशियों की सूची पर नजर डालने से दूसरी पार्टियों की तरह बेटा-बेटी को प्रत्याशी बनाना साफ दिख रहा है। साथ ही ये भी कि बाहरी-भीतरी, अब वाली बीजेपी में फर्क नहीं डालता। लेकिन, एक बात जो नहीं दिख रही, वो ये कि उत्तर प्रदेश में 2017 का विधानसभा चुनाव इसलिए भी याद रखा जाएगा कि बीजेपी ने अपनी कई परम्परागत सीटे…

बाबा साहब का “आरक्षण” न होता, तो बीएसपी में दलित कहां होते?

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बहुजन समाज पार्टी दलितों की पार्टी है। ये जवाब बताने के लिए कोई राजनीतिक-सामाजिक जानकार होने की जरूरत नहीं है। लेकिन, क्या ये जवाब 2017 के विधानसभा चुनावों के समय भी सही माना जाएगा। छवि के तौर पर अभी भी यही सही जवाब है। क्योंकि, देश की सबसे बड़ी दलित नेता मायावती बीएसपी की अध्यक्ष हैं। इसलिए बहुजन समाज पार्टी बहुजन यानी दलितों की ही पार्टी मानी जाएगी। लेकिन, अब जब मायावती उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए 403 में से 400 प्रत्याशी घोषित कर चुकी हैं, तो बीएसपी के दलितों की पार्टी होने पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। सबसे पहले बात कर लेते हैं बांटे गए टिकटों में दलितों की संख्या की। टिकटों की संख्या के लिहाज से बीएसपी यानी दलितों की पार्टी में दलितों का स्थान चौथा आता है। मायावती ने सबसे ज्यादा टिकट सवर्णों को दिया है। उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में 403 में 113 सीटों पर सवर्ण उम्मीदवार हाथी की सवारी कर रहे हैं। दूसरे स्थान पर पिछड़ी जाति के प्रत्याशी हैं। पिछड़ी जाति से आने वाले कुछ 106 प्रत्याशियों को बीएसपी ने टिकट दिया है। इसके बाद बीएसपी में मुसलमानों का स्थान आता है। 97 मुसलमानों …

मां-बाप का मजबूत साथ होता, तो जायरा माफी न मांगती

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हरियाणा में लड़कों के मुकाबले लड़कियां बहुत कम हैं। फिर भी हरियाणा में लड़कों की चाहत सबको है। और हरियाणा ही क्या हिन्दुस्तान में लड़कों की चाहत सबको ही है। महावीर सिंह फोगट की पत्नी भी लड़के की चाहत में मन्दिर जाने से लेकर मन्नत मांगने तक सब करती रहीं। और यही वजह रही होगी कि महावीर सिंह फोगट के 4 लड़कियां हुईं। लड़के की चाहत मन में रही होगी। पति-पत्नी के खुद भी और समाज के दबाव में भी। लेकिन, महावीर सिंह फोगट सिर्फ शरीर से ही पहलवान नहीं थे। फोगट कलेजे से भी पहलवान निकले। इस कदर कि अपनी सभी बेटियों को अखाड़े में उतार दिया। हरियाणा में पहलवानी खूब होती है। लेकिन, अपनी सभी बेटियों को अखाड़े में उतारने वाले महावीर सिंह फोगट शायद अकेले पहलवान होंगे। और यही असली पहलवान होने को साबित करता है। महावीर सिंह फोगट की जीवन चरित्र इतना ऊंचा उठ गया कि नीतेश तिवारी ने दंगल फिल्म की कहानी ही महावीर पर लिख डाली। इस फिल्म में महावीर सिंह फोगट का अभिनय आमिर खान ने किया है। इस फिल्म की खूब तारीफ हुई है। सिर्फ आमिर खान की ही तारीफ नहीं हुई महावीर सिंह फोगट बनने के लिए। फिल्म में गीता फोगट का अभिनय करने वा…

उत्तर प्रदेश में "परिवर्तन" का क्या होगा?

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प्रख्यात समाजवादी नेता राम मनोहर लोहिया कहा करते थे कि जिन्दा कौमें 5 साल तक इंतजार नहीं करती हैं। लेकिन, देश के सबसे बड़े सूबे में समाजवादी सरकार के मुखिया अखिलेश यादव 5 साल के बाद भी उत्तर प्रदेश की जनता को “परिवर्तन की आहट” ही सुना पा रहे हैं। और इसी परिवर्तन की आहट के जरिये वो उत्तर प्रदेश की जनता को संदेश देना चाह रहे हैं कि प्रदेश के लोगों की भलाई दोबारा समाजवादी पार्टी की सरकार लाने में ही है। और इसे बौद्धिक तौर पर मजबूती देने के लिए अखिलेश यादव के इस कार्यकाल पर एक किताब आई है। इस किताब में “परिवर्तन की आहट” बताता अखिलेश के भाषणों का संकलन है। कमाल की बात ये है कि आमतौर पर परिवर्तन की बात विपक्ष सत्ता हासिल करने के लिए करता है। लेकिन, उत्तर प्रदेश एक ऐसा राज्य बनने जा रहा है, जहां चुनावी लड़ाई परिवर्तन के ही इर्द गिर्द हो रही है। फिर चाहे वो सत्ता पक्ष हो या विपक्ष। सरकार में आने के लिए विपक्ष सत्ता परिवर्तन की लड़ाई लड़ता है। इसीलिए भारतीय जनता पार्टी का परिवर्तन पर खास जोर देना आश्चर्यजनक नहीं लगता। बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष विशेषकर परिवर्तन पर जोर देते हैं। भारतीय जनता पा…

कांग्रेस को एक पूर्णकालिक राजनेता की जरूरत

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साल के आखिरी दिन जो बोला, उस पर टिप्पणी के लिए कांग्रेस की तरफ से दूसरी, तीसरा कतार के नेता ही मिल पाए। उसकी वजह ये कि उनके अभी के सबसे बड़े नेता राहुल गांधी छुट्टी पर हैं। ये पहली बार नहीं है, जब राहुल गांधी छुट्टी पर गए हैं। संसद सत्र का समय हो या बिहार चुनाव राहुल गांधी ने ऐसा कई बार किया है। यहां तक कि देश में रहते भी राहुल गांधी अपनी सुविधानुसार ही राजनीतिक सक्रियता रखते हैं। 90 के दशक में इलाहाबाद विश्वविद्यालय में छात्रसंघ की राजनीति करते/कराते और संगठन का काम करते/कराते दो बातें जो सबसे ध्यान में रहती थीं। पहली ये कि दूसरा नेता/संगठन क्या कर रहा है और उससे बेहतर हम क्या कर सकते हैं। दूसरी बात ये कि कल सुबह आने वाले अखबार में हमारा किया कैसे छपेगा। हालांकि, छात्रसंघ या छात्र संगठन की राजनीति करते कुछ लोग ऐसे भी होते थे जो सिर्फ इस बात कि चिन्ता करते थे कि कैसे छप जाया जाए। अच्छा, बुरा कुछ भी, कैसे भी। पहली दोनों बातें ध्यान में रखने वाले राजनीति में धीरे-धीरे तपे-तपाए नेता के तौर पर स्थापित होते जाते। और इस प्रक्रिया में वो पूर्णकालिक राजनेता बन जात…