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Showing posts from September, 2009

इस बार गलती से भी गलती मत करना

फिर खतरा दिख रहा है फंसने का। कोई हम अपने फंसने की बात नहीं कर रहे हैं खतरा पूरे देश के फंसने का है। फंसने की वजह वही कश्मीर ही है जो, भारत-पाकिस्तान के बंटवारे के साथ से ही ऐसी फांस बन गया है जो, मुश्किल ही किए रहता है। लेकिन, इस बार फंसे तो, पहले से भी बुरा फंसेंगे।


पहली बार कश्मीर का मसला अपने पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू साहब संयुक्त राष्ट्र संघ में क्या ले गए। उसके बाद से तो, संयुक्त राष्ट्र संघ को तो अधिकार मिल ही गया। कोई भी ऐरा-गैरा नत्थू खैरा मुंह उठाकर भारत को पाकिस्तान के साथ शांति से कश्मीर समस्या का हल सुलझाने का अनमोल मशविरा दे डालता। और, अमेरिका ने तो मान लो इस मुद्दे से जितना फायदा उठाया- भारत-पाकिस्तान, दोनों से- वो, कोई कहने वाली बात ही नहीं है।


अच्छी बात ये है कि, अमेरिका हमसे इतना दूर है कि हमारा सीधे कोई युद्ध या फिर जमीन कब्जाने जैसा नुकसान नहीं कर सकता। और, अमेरिका, भारत के बढ़ते प्रभाव से वाकिफ है इसलिए वो, कभी ये भी नहीं कहता कि वो, भारत-पाकिस्तान के बीच कश्मीर मुद्दे पर मध्यस्थता करना चाहता है। हिलेरी भी इतना ही कहती हैं कि दोनों देशों के बीच अच्छे संब…

दलित मंत्र रामबाण से भी बड़ा हो गया है

सिस्टम ही ऐसा है साहब बिना एग्रेसिव हुए बात ही नहीं बनती

हां जी नमस्कार।

हां नमस्कार सर हर्षवर्धन बोल रहा हूं।

आपके ऑफिस आया था। कितनी देर में आ जाएंगे।

मैं तो अभी क्षेत्र के दौरे पर हूं। वहां ऑफिस में बाबू होंगे-बड़े बाबू होंगे। उनसे बात कर लीजिए


सर बिजली के बिल का मामला है यहां ऑफिस में बाबूजी का कहना है कि आपके दस्तखत के बिना नहीं होगा। मुझे ऑफिस निकलना है। आप आ जाते तो, जल्दी हो जाता। मेरे बैंक में पैसा है इसके बावजूद चेक बाउंस हो गया है। जबकि, उसके बाद के महीने का चेक क्लियर है। उस पर पेनाल्टी भी लग गई है। अब पेनाल्टी मैं क्यों भरूं। आप उसे हटा देंगे तो, मैं बिल जमा कर दूं


देखिए पेनाल्टी तो जो लग गई है उसे हटाना संभव नहीं है।


अरे आप कैसी बात कर रहे हैं मेरे अकाउंट में पैसे हैं। मेरी कोई गलती नहीं मैं रेगुलर बिल जमा करता हूं। फिर मैं पेनाल्टी क्यों भरूं। मैं यहीं सीएनबीसी आवाज़ न्यूज चैनल में हूं। और, मुझे ऑफिस के लिए देर हो रही है पिछले एक घंटे से आपके दफ्तरों के ही चक्कर काट रहा हूं।

ठीक है मैं ऑफिस आता हूं आधे घंटे में तो, बात करता हूं।


अब तक तो आप समझ ही गए होंगे कि ये मेरा संवाद किसी राजपत्रित अधिकारी के साथ चल रहा था। दरअसल मे…

ये भी तो बाजार की वजह से ही है

बुधवार बाजार में कम दामों का फायदा लेने के लिए ग्रेट इंडिया प्लेस के बड़ा बाजार पहुंचा तो, गेट पर खड़े सिक्योरिटी वाले ने दोनों हाथ जोड़कर मुस्कुराते हुए नमस्कार किया। अंदर बड़ा ही आध्यात्मिक अहसास हो रहा था। समझ में आया कि आम दिनों की तरह बिग बाजार में सुनाई देने वाला फिल्मी, रॉक-पॉप टाइप संगीत की जगह सुमधुर ध्वनि गायत्री मंत्र की आ रही थी।


दरअसल नवरात्रि की वजह से बिग बाजार में ये बदलाव देखने को मिल रहा था। और, ऑफिस जाने की जल्दी की वजह से सुबह साढ़े दस बजे ही मैं बिग बाजार पहुंच गया था वो, भी एक वजह थी। खैर, इससे ये भी साबित हो रहा था कि भारतीय परंपरा में भरोसा रखने वालों की बाजार में खर्च करने की ताकत बढ़ रही थी। और, इसीलिए बाजार में मुनाफा कमाने की इच्छा रखने वालों को भारतीय परंपराओं का भी सम्मान करना पड़ रहा है। देखिए रास्ता बाजार के बीच से भी है। बस ये समझना पड़ेगा कि उसके लिए रास्ता बनाना कैसे हैं।


कल अनिल पुसदकर जी पूछ रहे थे कि क्या फलाहार पार्टी देने से पाप लगेगा। अब ये पाप-पुण्य की नेताओं से आप पूछ ही क्यों रहे हैं। उन्हें पाप-पुण्य वोट से ही समझ में आता है। इस लिहाज से व…

अब ये बात बेवकूफी की लगती है

वंशवाद की बात अब किसी को समझ में नहीं आ रही है। कम से कम उनको तो नहीं ही समझ में आ रही है जिनके बेटे-बेटी या कोई नजदीकी रिश्तेदार इतने बड़े हो गए हैं कि चुनाव लड़ सकें। और, वो पहले से ही किसी पार्टी में इस हैसियत में हैं कि अपने चुनाव लड़ने लायक उम्र वाले बेटे-बेटी या फिर नजदीकी रिश्तेदार को टिकट दिलवा सकें।


दरअसल सारा मामला पलट गया है। कांग्रेस के वंशवाद के खिलाफ लड़ाई लड़ते-लड़ते विपक्षी पार्टियों के लोगों की उम्र बढ़ गई और उन्हें अंदाजा ही नहीं लगा कि कब उनके बेटे-बेटी भी वंशवादी राजनीतिक विरासत को संभालने के लिए तैयार हो गए। लेकिन, अभी रूडी के बेटे-बेटी शायद टिकट लेने भर की उम्र के नहीं हुए हैं इसीलिए बीजेपी प्रवक्ता राजीव प्रताप रूडी ने राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल के बेटे राजेंद्र शेखावत को कांग्रेस का टिकट मिलने का संभावना दिखते ही बयान जारी कर दिया कि “the prez should have refrained from this entire ticket business.... It seems that the prez house too has got infected from this family fiefdom...”


लेकिन, रूडी महाराष्ट्र में ही अपने सबसे बड़े नेता गोपीनाथ मुंडे को शायद याद नहीं रख …

ऐसे संस्कारों को आग लगा दो

ये दावा करते हैं कि हम संस्कृति रक्षक हैं, संस्कार बचा रहे हैं। संस्कृति और संस्कार बचाने के लिए बाकायदा इन्होने कानून बना रखे हैं। इक्कीसवीं सदी में जंगल जैसा या शायद अब तो जंगल कानून भी शर्मा जाए- ऐसा कानून है इनका। लेकिन, कमाल ये कि हम-आप दिल्ली या इनके देस से बाहर बैठकर चाहें जो कहें- इनको इनके देस में हर किसी का समर्थन मिला हुआ है।


ये देश के सबसे मॉडर्न दो शहरों दिल्ली और चंडीगढ़ के बीच में बसते हैं लेकिन, इनके संस्कार, संस्कृति ऐसी है कि ये अपने ही बच्चों, परिवारों का खून करते हैं। खबर तो, ये आई है कि एक प्रेम में पागल लड़की ने अपने पागल प्रेमी के साथ मिलकर परिवार के 7 सदस्यों को मार डाला। लेकिन, ये खबर जहां से आ रही है वो, है हरियाणा का रोहतक शहर। हरियाणा से ही इसके पहले एक और खबर आई थी कि हाईकोर्ट के आदेश के बाद अपनी ही पत्नी को विदा कराने गए लड़के को संस्कृति-संस्कार के रक्षकों की भीड़ ने पीट-पीटकर मार डाला। अदालत का आदेश धरा का धरा रह गया। पुलिस तमाशा देखती रही।


अदालत का आदेश यहां क्यों धरा का धरा रह गया। इसे समझने के लिए दो चीजें एक तो, ये जाटलैंड है भले दिल्ली से सटा हुआ…

शशि थरूर, जानवर अरे वही cattle clas और हम

अब जब अशोक गहलोत तक शशि थरूर को गरिया रहे हैं। भले सीधे-सीधे नहीं- गहलोत कह रहे हैं कि शशि थरूर ने जो, इकोनॉमी में सफर करने वाले लोगों को जानवर जैसा कहा है, उसके लिए उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए, इससे कम का कुछ नहीं चलेगा। कांग्रेसी मुख्यमंत्री गहलोत गुस्से में हैं, भाजपाई मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का हक बनता है वो, पहले ही बहुत गुस्सा चुके हैं। इतना सब कुछ देखकर मेरे अंदर भी मौका पाते ही गरियाने को उत्प्रेरित करने वाले विषाणु सक्रिय हो गए हैं। अरे भाई, गहलोतजी तो कभी न कभी मुख्यमंत्री, बड़े कांग्रेसी नेता होने की वजह से बिजनेस क्लास का आनंद लिए ही होंगे। नहीं लिए होंगे तो, ले सकते हैं, थे- लेकिन, हम तो भइया जब चले इकोनॉमी क्लास में ही चले। वो, भी कोई बहुत खुशी-खुशी नहीं। लेकिन, इस लिहाज से शशि थरूर को गरियाने का पहला जेनुइन हक हमारे जैसे लोगों का ही बनता है।


लेकिन, बड़ी एक मुश्किल हो गई है ई तीन दिन से मन में गरियाने का विचार संजोए जब अपनी शकल शीशे में देख रहा था तो, कुछ चेहरवा हमारा बदला-बदला सा दिखा। अरे ई कोई रात में सोए सुबह उठकर देखे जैसा फिल्मी बदलाव नही था। ई धीरे-धीरे हो…

हमें सत्ता देने के लिए तुम मर जाओ!!!

ये साबित हो गया तो, राजनीतिक इतिहास की सबसे बड़ी कालिख होगी। आंध्र प्रदेश के जनप्रिय नेता YSR Reddy की दुखद मौत के बाद हिला देने वाला सच सामने आ रहा है। उनकी मौत की घटना के तुरंत बाद करीब डेढ़ सौ लोगों के आत्महत्या करने, सदमे से मरने की खबर थी। अब तक ये आंकड़ा चार सौ के ऊपर बताया जा रहा है।


लेकिन, अब चौंकाने वाली खबर (मुझे तो खबर सुनने के बाद ही घिन सी आ रही है) ये आ रही है कि जगन सेना- ये वो गुलामों की ब्रिगेड है जो, YSR Reddy के बेटे जगनमोहन रेड्डी को मुख्यमंत्री बनाने के लिए अभियान चला रही है। बाप की मौत के बाद उसकी आत्मा की शांति का प्रयास करने के बजाए जगन आंध्र प्रदेश की ज्यादा से ज्यादा मौतों को अपने बाप की दुखद मौत का साझीदार बनाने की कोशिश कर रहा है। अब इन सबकी आत्मा को शांति कैसे मिल पाएगी।


खबर ये आ रही है कि YSR Reddy की मौत के बाद राज्य भर में जितनी भी मौतें हुईँ। उन सबको रेड्डी के बाद के दुखद असर के तौर पर प्रचारित करने की कोशिश हो रही है। सबसे घिनौनी बात ये कि इसमें रेड्डी के गुलाम अफसर भी मदद कर रहे हैं। खुद जिला कलेक्टर किसी भी कारण से मरने वाले लोगों के घर जाकर ये जा…

काफी कुछ अच्छा दिख रहा है मगर ...

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ये तो तय ही रहता है कि हर अगली पीढ़ी पहले से बहुत ज्यादा स्मार्ट होती है। इसका अंदाजा भी समय-समय पर होता रहता है। मुझे अभी मौका लगा दिल्ली के द्वारका के एक इंस्टिट्यूट के छात्रों से बातचीत का। ट्रिनिटी इंस्टिट्यूट ऑफ प्रोफेशनल स्टडीज के इन हाउस सेमिनार आलेख्य 09 में गया था। जितने शानदार वहां के मास कम्युनिकेशन के बच्चों ने पावर प्वाइंट प्रजेंटेशन बनाए थे उससे भी तीखे सवाल उन लोगों ने हमारे लिए तैयार कर रखे थे।


ज्यादातर सवाल ऐसे थे जिनके जवाब अगर खोज लिए जाएं तो, मीडिया की भूमिका क्या हो इसे सलीके से तय करने की गाइडलाइंस बन सकती है। खबरों के मामले में खुद पर नियंत्रण से लेकर सच का सामना और भूत-प्रेत, अंधविश्वास तक क्यों न्यूज चैनल पर दिखना चाहिए- इसका जवाब बच्चे मुझसे मांग रहे थे। सलीके से बनाए गए 5 प्रजेंटेशन में भले ही एक ही चीज कई प्रजेंटेशन में आ गई थी लेकिन, फोकस साफ था। पहले प्रजेंटेशन में मीडिया के अच्छे पहलुओं को दिखाते हुए, अंत में support media, suppport nation जैसा स्लोगन था तो, उसी के तुरंत बाद के प्रजेंटेशन में मीडिया पर दिखाई जा रही ऊल जलूल खबरों का तीखा पोस्टमार्टम था। क…

ये गजब की इकोनॉमी है!!!

लग ऐसे रहा है जैसे आजकल पूरा देश ताजा-ताजा बचत करना सीख रहा हो। नए काम की शुरुआत जैसा दिख रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा, फिर प्रधानमंत्री से भी बड़ी सोनियाजी ने कहा, फिर सबसे बड़े आदर्श राहुलजी ने कहा। फिर इन लोगों ने करके दिखाना शुरू कर दिया। अब इकोनॉमी की चर्चा हो रही है। लोग इकोनॉमी में चलने लगे हैं। ये मनमोहन-मोंटेक वाली इकोनॉमी नहीं है। ये हवाई जहाज की इकोनॉमी वाली सीट है। इस पर सफर खबर बन रही है।


दिख कुछ ऐसे रहा है जैसे इस बचत क्रांति को देश की हरित क्रांति और दुग्ध क्रांति के बराबर ले जाकर खड़ा कर दिया जाएगा। या शायद उससे भी बड़ी क्रांति हो। शनिवार को वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने दिल्ली से कोलकाता इकोनॉमी क्लास में सफर किया। फिर सोनिया गांधी ने दिल्ली से मुंबई की यात्रा इकोनॉमी क्लास में की। ये अलग बात है कि सुरक्षा के मद्देनजर जो इंतजाम सोनियाजी के लिए जरूरी हैं उसकी वजह से खर्च कम तो हुआ नहीं। क्योंकि, अगर सोनियाजी बिजनेस क्लास में यात्रा करतीं तो, खर्च आता 62,000 रुपए और इकोनॉमी में आगे 5 कतारें बुक की गईं जिसका खर्च आया 55,000 रुपए यानी किराए में बचत हुई सिर्फ 7,000 रुपए की…

ये क्या हिंदी-हिंदी लगा रखा है

हिंदी दिवस पर हिंदी का हल्ला- रुदन जमकर हो रहा है। हर कोई बस इस एक 14 सितंबर के दिन में हिंदी को दुनिया की सबसे महत्वपर्ण भाषा बना देने को उतावला हो रहा है। मैंने भी सोचा हिंदी की कमाई खा रहा हूं तो, थोड़ा मैं भी चिंतित हो लेता हूं। लेकिन, लगा कि ये क्या बेवकूफी है। हिंदी ने जिस तरह से बाजार में अपनी ताकत बनाई है क्या उसके बावजूद एक दिन हिंदी के लिए रोकर हम ठीक कर रहे हैं। दरअसल सारी मुश्किल ये है कि जिन्हें हिंदी ने सबसे ज्यादा दिया है वो, इसको ठीक से संभाल नहीं पा रहे हैं पहला मौका पाते ही अंग्रेज बन जाना चाहते हैं।


और, हिंदी को खास परेशानी नहीं है। आज भी देश के सबसे ज्यादा पढ़े जाने वाले 10 अखबारों में अंग्रेजी के टाइम्स ऑफ इंडिया छोड़ कोई अखबार नहीं है। विज्ञापन जगत से लेकर फिल्म और मीडिया तक हिंदी ही हावी है। व्यवहार में भी-बाजार में भी। इसलिए हिंदी दिवस मनाना छोड़िए- बस इस बाजार व्यवहार को हिंदी के लिहाज से ढालने में मदद करिए। बाकी तो अपने आप ही हो जाएगा।


दो साल से ज्यादा समय हो गया एक पोस्ट मैंने लिखी थी। 16 जून 2007 को। और, आज दो साल बाद भी वो पोस्ट पूरी की पूरी मौजूं लग रही …

भविष्य का मीडिया है वेब जर्नलिज्म

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रवि रतलामी जी से पहली बार मुलाकात कुछ दिन पहले हुई। वर्चुअली यानी नेट के जरिए तो, बहुत पहले से भेंट है लेकिन, आमने-सामने की पहली मुलाकात मुंबई में संभव हुई। वो, भी तब जब मैंने मुंबई साढ़े चार साल के बाद छोड़कर दिल्ली का रुख कर लिया। मुलाकात में मैंने उनको इलाहाबाद विश्वविद्यालय के इंस्टिट्यूट ऑफ प्रोफेशनल स्टडीज की पत्रिका बरगद की एक प्रति दी। जिसमें वेब जर्नलिज्म पर मेरा भी एक लेख है। रविजी ने कहा- इसे अपने ब्लॉग पर क्यों नहीं डालते हैं। अभी चिट्ठा चर्चा पर गया तो, उनकी चिट्ठा चर्चा देखा तो, फिर याद आ गया। ये फरवरी में लिखा गया लेख है।


भविष्य का मीडिया है वेब जर्नलिज्म

 भारत में इंटरनेट पत्रकारिता अभी अपने शैशवकाल में है। लेकिन, अगले 10 सालों में ये माध्यम मजबूत और विश्वसनीय माध्यम बनकर उभरने वाला है। इस माध्यम की सबसे अच्छी बात ये है कि इसमें टीवी मीडिया की तेजी और अखबार की ज्ञान बढ़ाने वाली पत्रकारिता दोनों का अच्छा गठजोड़ है। इंटरनेट की बढ़ती महत्ता का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि शायद ही आज कोई ऐसा बड़ा अखबार या टीवी चैनल होगा- जिसकी अपनी वेबसाइट नहीं है। यहां तक कि रा…

बंबई, ब्लॉगर, बाजार, भाषण

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कई महीनों बाद मुंबई जाने का अवसर हाथ आया था तो, ऐसा हो ही नहीं सकता था कि मैं इसे छोड़ देता। दरअसल, अनीताजी के मन में सेमिनार कराने की इच्छा ने मुझे ये अवसर प्रदान किया था। अनीताजी के ब्लॉग पर सेमिनार की चर्चा है। इसी सेमिनार के लिए दिल्ली से मुंबई की रेलयात्रा का विवरण बतंगड़ पर है। मैंने सोचा कि सेमिनार में दिया गया मेरा भाषण भी अब पोस्ट किया जा सकता है।



The Role of MEDIA in Financial Market Awareness

Money … Market .. mudra ये कुछ ऐसे शब्द हैं जो, एक दूसरे के समानार्थी यानी synonymus हैं। और, इन सबको आम लोगों तक पहुंचाने में एक और M यानी Mumbai … का बड़ा रोल रहा है। दरअसल यहां विषय रखा गया है The Role of MEDIA in Financial Market Awareness। लेकिन, मुझे लगता है कि MEDIA से भी पहले अगर किसी ने फाइनेंशियल मार्केट के बारे में सबसे ज्यादा लोगों को Aware किया उन्हें जानकार बनाया तो, वो है ये शहर मुंबई।


मुंबई शहर की पहचान मायानगरी के तौर पर होती है और वैसे भले लोग इसे INDIA’S FINANCIAL CAPITAL बोलते हैं लेकिन, जब सपने पूरे करने की बात होती है तो, ज्यादातर माना यही जाता है कि यहां आने वालो…

ये मानेगी नहीं जब करेगी नंगई ही करेगी

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बहुत दिनों से आपके घर में कोई झगड़ा नहीं हुआ। बहुत दिनों से आपके परिवार के लोगों ने एक दूसरे के खिलाफ साजिश रचनी बंद कर दी है। बहुत दिनों से पड़ोसी के परिवार को देखकर आप बेवजह ईर्ष्या नहीं कर रहे हैं तो, परेशान मत होइए। भारतीय टेलीविजन इतिहास की सबसे बड़ी अदाकारा फिर से अपनी सारी अदा के साथ वापसी कर रही है।


एकदम सही पहचाना आपने- ये हैं क . क . क किरन नहीं। क . क . क K फैक्टर वाली एकता कपूर। वही अपने चिरयुवा जीतेंदर बाबू की काबिल बिटिया। अब एकता कोई ऐसा सीरियल बनाने जा रही हैं जिसमें सिर्फ नंगई होगी। क्यों-क्योंकि, सास-बहू की लड़ाई, पति-पत्नी के ढेरो अवैध संबंधों की चाशनी में भी कपूर साहिबा के धारावाहिक कोई देख नहीं रहा है। सब रियलिटी शो देख लेते हैं या फिर बालिका वधू या लाडो को देख ले रहे हैं।


एकता कपूर दुखी हैं कि सारे टेलीविजन दर्शकों ....

ये अभी और शर्मसार करेंगे

5 star embarrassment – ये शब्द ठीक से मेरे अनुभव में कल पहली बार आया। वैसे अंग्रेजी भाषा ही है कि कब कौन प्रेम में लड़िया रहा है और उसी शब्द पर कौन गुस्से से लतिया रहा है। खास फर्क मालूम नहीं पड़ता। खैर, कल ये 5 star embarrassment हुआ है यूपीए सरकार को।


वजह बने हैं उनके 2 मंत्री। विदेश मंत्री एस एम कृष्णा और उनके डिप्टी साहब शशि थरूर। थरूर साहब तो बरसों यूनाइटेड नेशंस में रहे हैं और उन्हें महंगे होटलों की-शानो शौकत की आदत रही है। इसलिए शायद उन्हें अंदाजा ही नहीं लगा कि होटलों में रहने से कौन सा वो देश की जनता के साथ धोखा कर रहे हैं। भारतीय जनता के जरिए उनका चुनाव भी पहली बार हुआ है। इससे पहले के चुनाव तो, वो इलीट स्टाइल के लड़ते थे, कभी जीतते थे-कभी हारते थे। लेकिन, कृष्णा साहब तो, भारतीय जनता की नुमाइंदगी करते आ रहे हैं- क्या उन्हें भी समझ में नहीं आया कि वो, क्या कर रहे हैं। ...

भारतीयों में गुलामी का इनबिल्ट सॉफ्टवेयर

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YSR रेड्डी की दुखद मौत के बाद आंध्र प्रदेश से करीब 150 लोगों की जान जाने की खबर आई है। कुछ लोगों ने अपने प्रिय नेता की मौत के बाद आत्महत्या कर ली। कुछ इस अंदाज में कि अब मेरे भगवान न रहे तो, हम रहकर क्या करेंगे। और, कुछ बेचारों ने आत्महत्या तो, नहीं की लेकिन, रेड्डी की मौत की खबर सुनने के बाद वो, ये सदमा झेल नहीं पाए। इससे जुड़ी-जुड़ी दूसरी खबर ये कि आंध्र प्रदेश से संदेश साफ है कि YSR रेड्डी का बेटा जगनमोहन रेड्डी की राज्य की बागडोर संभालेगा तो, राज्य का भला हो पाएगा। पिता के अंतिम संस्कार के समय टेलीविजन पर दिखती जगनमोहन की हाथ जोड़े तस्वीरें किसी शोक में डूबे बेटे से ज्यादा राज्य की विरासत संभालने के लिए तैयार खडे, दृढ़ चेहरे वाले प्रशासक की ज्यादा दिख रही है।



हालांकि, कांग्रेस हाईकमान के कड़े इशारे के बाद जगनमोहन का मुख्यमंत्री बनने का सपना फिलहाल हकीकत में बदलता नहीं दिख रहा है। लेकिन, सवाल यहां मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री बनने का नहीं है। सवाल ये है कि क्या ये नेताओं की भगवान बनने की कोशिश नहीं है जिसमें भगवान के खिलाफ खड़ा हर कोई राक्षस नजर आता है। जैसा दृष्य आज जगनमोहन को मुख्…

100 रुपए खुल्ला होता है

करीब 9 महीने बाद मुंबई जाने का मौका मिला। मुंबई राजधानी में दिल्ली से मुंबई के लिए सफर शुरू हुआ। मुंबई का रोमांच- मुंबई की भीड़, गणपति, मुंबई की नई पहचान ताजा बना बांद्रा-वर्ली सी लिंक- अपनी ओर खींच रहा था।



यात्रा शुरू हुई। मेरे सामने की चार सीटों पर सिर्फ एक महिला यात्री थीं। लेकिन, माशाअल्ला पर्सनालिटी क्या पूरा पर्सनालटा था। लंबाई-चौड़ाई सब ऐसी थी कि शायद उन्हें हमारी तरह साइड की बर्थ मिली होती तो, उनके लिए उसमें समाना मुश्किल होता। किसी संभ्रांत मुस्लिम परिवार की बुजुर्ग भद्र महिला थीं। उनको छोड़ने संभवत: उनकी भतीजी और दामाद आए थे। माशाअल्ला भतीजी भी आपा पर ही गई थी। भतीजी के पति ने ऊपर वाली बर्थ एकदम से ऊपर उठा दी जिससे आपा का सर शान से उठा रहे कोई तकलीफ न हो। और, चूंकि चारो सीटों पर वो अकेली ही थीं तो, इस इत्तफाक के बहाने दामाद ने पूरी आत्मीयता उड़ेल दी और आपा के ना-ना करने के बावजूद सीट ऊपर कर दी। एसी द्वितीय श्रेणी के कूपे की ऊपर वाली सीटें फोल्डिंग हैं और, अगर आपको भी संयोग मिले कि नीचे आप हों और ऊपर की सीट खाली हो तो, इसका मजा ले सकते हैं।


कुली आपा का सामान रख चुका था। उसे …