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Showing posts from March, 2014

गरीबी, भारत और दुनिया की नजर

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एक सुबह ऑस्ट्रेलिया के एक रेडियो स्टेशन से फोन आया कि मेकेंजी ग्लोबल इंस्टिट्यूट की रिपोर्ट पर आपसे बात करनी थी। मैंने कहाकि रिपोर्ट नहीं देखी है एक बार देख लूं फिर फोन करिए। रेडियो स्टेशन के एंकर ने बताया कि मेकेंजी की रिपोर्ट ये कह रही है कि भारत की आधी आबादी गरीबी में चली जाएगी अगर सुधारों को लागू नहीं किया गया तो। खैर, मैंने बाद में उस पर बात करने के लिए कहा और फोन रख दिया। फिर मैंने मेकेंजी की उस रिपोर्ट को देखा। उस रिपोर्ट का शीर्षक था फ्रॉम पावर्टी टू एमपावरमेंट। रिपोर्ट की शुरुआत भारत की तारीफ से की गई है जिसमें कहा गया है कि भारत ने गरीबी दूर करने में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। रिपोर्ट के आंकड़े कह रहे हैं कि 1994 में भारत में 45 प्रतिशत यानी लगभग आधा भारत गरीब था और 2012 में सिर्फ 22 प्रतिशत यानी करीब एक तिहाई ही गरीब रह गए हैं। रिपोर्ट कहती है कि ये जश्न मनाने वाली उपलब्धि है लेकिन, इससे भारत के लोगों में एक नए तरह की उम्मीदें जग गई हैं।


मेकेंजी की रिपोर्ट ये भी कहती है कि भारत में दरअसल गरीब उनको गिना जा रहा है जो बिल्कुल दयनीय हालत में हैं। जबकि, खुद इस रिपोर्ट को तैयार कर…

चुनाव लाएगा अर्थव्यवस्था में तेजी

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अंतरिम बजट में जब वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने छोटी कारों के साथ एसयूवी गाड़ियों पर भी एक्साइज ड्यूटी घटाने का एलान किया तो उसे बेहद कमजोर बिक्री आंकड़ों से मूर्छित सी हो रही ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री को संजीवनी देने के लिहाज से देखा गया। खुद वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने भी यही दलाल देकर एक्साइज ड्यूटी घटाई। लेकिन, बजट अंतरिम भले था। बजट चुनावी भी था। इसलिए इसमें चुनावी वजह खोजना स्वाभाविक है। निजी तौर पर मुझे लगता है कि ऑटो इंडस्ट्री के साथ एसयूवी गाड़ियों पर एक्साइज ड्यूटी घटाकर वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने अपनी नेताओं की जमात का भी बड़ा भला किया है। ये कोई छिपा तथ्य नहीं है कि देश में ज्यादातर राजनेताओं की पहली पसंद एसयूवी कारें हैं। यानी वो गाड़ियां जो थोड़ी ऊंची और बड़ी होती हैं। जो आम जनता के बीच ही खास का अहसास देती है। खैर, भले ही वित्त मंत्री पी चिदंबरम के इस फैसले से नेताओं को चुनावी जरूरत के समय थोड़ी सस्ती एसयूवी मिले। लेकिन, इतना तो तय है कि अगर ये एसयूवी गाड़ियां थोड़ा कम दामों में भी बिकती हैं तो भले सरकारी खजाने में एक्साइज टैक्स के तौर पर कम रकम आए। इंडस्ट्री को इस …

गैस की कीमत और चुनाव का गणित

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