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Showing posts from May, 2016

विज्ञापन के डिब्बे में बंद खुलेआम घूस

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नरेंद्र मोदी की सरकार को दो साल हुए और उस पर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने किसी स्रोत के हवाले से ट्वीट करके कहा है कि मोदी सरकार ने दो साल के समारोह पर ही हजार करोड़ रुपये खर्च किए हैं। जबकि, दिल्ली सरकार ने पूरे साल में सिर्फ डेढ़ सौ रुपये खर्च किए हैं। विज्ञापन देकर अपनी योजनाओं की जानकारी जनता पहुंचाना हमेशा से होता रहे है। लेकिन, हाल के दिनों में जिस तरह से विज्ञापन मीडिया को साधने का जरिया बन गया है। उसमें अरविंद केजरीवाल का ये ट्वीट बड़ा महत्वपूर्ण है। सही भी है कि मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ या फिर किसी और राज्य के मुख्यमंत्री या सरकार का विज्ञापन दिल्ली के अखबारों में प्रधानमंत्री को बधाई देते हुए क्यों होना चाहिए। आम आदमी पार्टी के प्रवक्ता ट्वीट कर रहे हैं कि क्या मोदी सरकार के दो साल पर हो रहे खर्च पर मीडिया बहस करेगा। बड़ा जरूरी है कि इस पर मीडिया बहस करे। क्योंकि, मीडिया साधने के जरिए से विज्ञापन आगे बढ़ गया है। और ये आगे बढ़ाने का काम बखूबी मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल कर रहे हैं। सही मायने में समझें तो सीधे-सीधे मीडिया को विज्ञापन की रिश्वत दी जा रही है। हालांकि, …

जैक का हिंदुस्तान प्रेम !

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ये जैक रोजर हैं। अमेरिकी हैं। लेकिन, अब ये खुद को गढ़वाली कहलाना ही पसंद करते हैं। जैक के साथ काम करने वाले ज्यादातर गढ़वाली ही हैं। वो कहते हैं जैक साहब उनसे ज्यादा गढ़वाली हैं। जैक पहाड़ बचाना चाहते हैं और उनके मन में ये पक्का है कि बिना पहाड़ के लोगों की जेब में कुछ रकम हुए पहाड़ बचने से रहा। गढ़वाल के 5 जिलों में इनका संगठन महिला सशक्तिकरण के लिए काम कर रहा है। आधे साल से ज्यादा जैक गुप्तकाशी में ही रहते हैं। जैक के हाथ का रक्षा (कलावा) बता रहा है कि जैक हिंदू मान्यता से कितना बंध चुके हैं। ये अनायास है। कोई हिंदू संगठन इन्हें ये करने को नहीं कह गया। जैक के घर में केदारनाथ मंदिर भी है। जैक अमेरिका से 1966 में पहली बार आए थे।

जैक के हिंदुस्तान के प्यार में पड़ने की कहानी भी थोड़ा हटके है। जैक रोजर अपनी जवानी के दिनों में अमेरिका से भारत एक सरकारी कार्यक्रम के तहत आए थे। वो 1966 में अपना पहली बार भारत आना बताते हैं। हालांकि, उस समय अमेरिका के राष्ट्रपति Lyndon B Johnson थे लेकिन, जैक अमेरिकी राष्ट्रपति John F. Kennedy का जिक्र करते हैं। अमेरिकी सरकार ने भारत-अमेरिका के लोगों के बीच स…

थर्ड डिग्री की राजनीति

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पढ़ाई की विवाद गजब चर्चा का विषय है। चर्चा का विषय बना भी इसीलिए है कि आईआईटी खड़गपुर से पढ़ाई करके भारतीय राजस्व सेवा के अधिकारी से मैगसायसाय सम्मान विजेता और फिर दिल्ली के मुख्यमंत्री बने अरविंद केजरीवाल नरेंद्र मोदी की पढ़ाई पर सवाल खड़ा कर रहे हैं। वो भी सवाल इस कदर खड़ा कर रहे हैं कि आम आदमी पार्टी के बड़े चेहरे पिछले कुछ समय से प्रधानमंत्री की डिग्री की पड़ताल में ही जैसे लगे हुए हों। संयोगवश बहुधा पत्रकारिता से राजनीति में गए लोग अरविंद केजरीवाल के इर्द गिर्द पार्टी में प्रभावी भूमिका में हैं। इसलिए शायद कुछ ज्यादा खोजी अंदाज में पार्टी आ गई है। निजी हमले करने में न तो नरेंद्र मोदी ने कभी कोई कमी छोड़ी है और न ही अरविंद केजरीवाल ने। लेकिन, अब तक निजी हमलों में वजहें सार्वजनिक जैसी होती रही हैं। अगस्ता वेस्टलैंड मामले में रिश्वत ली गई। इस मामले में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और उनके राजनीतिक सचिव अहमद पटेल पर हो रहा हमला भले निजी लग रहा हो। लेकिन, उसकी भी वजह सार्वजनिक है। क्योंकि, देश का एक रक्षा सौदा होता है जिसमें रिश्वत लेने के आरोप लग रहे हैं…

लघुकथा- ईमानदार अधिकारी

ईमानदार अधिकारी होने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि लोग आपकी ईमानदारी की बड़ी इज्जत करते हैं और सबसे बड़ा नुकसान ये कि धीरे-धीरे लोग ये भूलने लगते हैं कि ये अधिकारी भी है। जाहिर है फिर अधिकारी के तौर पर मिलने वाली इज्जत भी खत्म होती जाती है। #Honesty