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Showing posts from April, 2017

AAP, AGP की तरह दिखने लगी है !

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दिल्ली को देश की राजधानी होने से खास सहूलियत मिली हुई है। यहां सब खास होते हैं। कमला ये कि उस खास दिल्ली में आम आदमी की बात करके एक पार्टी सत्ता में पहुंच गई। सत्ता में यूं ही नहीं पहुंच गई, सत्ता में वो आम आदमी पार्टी नाम रखकर देश की सबसे ईमानदार पार्टी होने का वातावरण तैयार करके पहुंची। इंडिया अगेन्स्ट करप्शन के बैनर पर अन्ना को चेहरा बनाकर शुरू हुई लड़ाई से निकली पार्टी के नेता अरविन्द केजरीवाल को दिल्ली की जनता ने 70 में से 67 सीटें दे दीं। 2 साल से भी कम समय के संघर्ष में खास दिल्ली में राजनीति करने की वजह से अरविन्द केजरीवाल को देश में बदलाव के सबसे बड़े नेता के तौर पर देखा जाने लगा। लेकिन, पहले पंजाब, गोवा और अब दिल्ली नगर निगम के चुनाव में तगड़ी हार के बाद अरविन्द को पूरी तरह से राजनीति में बाहर होता देखा जाने लगा है। सवाल ये है कि क्या विश्लेषकों ने तब जल्दी की थी या अब जल्दी कर रहे हैं ? सवाल ये भी है कि 2011 से 2017, मात्र 6 साल में किसी व्यक्ति, पार्टी के इस तरह से सत्ता के शिखर पर पहुंचने और जनता का आकांक्षाओं पर इतनी बुरी तरह से खरा न उतर पाने का क्या ये अकेला उदाहरण है।…

नेता बदले गांधी परिवार, लौटता दिख रहा कांग्रेस का आधार

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पूर्ण बहुमत लोकतंत्र में स्थिरता के लिए जरूरी होता है। लेकिन, कई बार पूर्ण बहुमत की वजह से चुनावी विश्लेषण में कई जरूरी मुद्दों पर बात ही नहीं हो पाती है। कुछ ऐसा ही दिल्ली नगर निगम के चुनाव में भी हुआ है। चर्चा सिर्फ पूर्ण बहुमत वाली बीजेपी और दूसरे स्थान पर रहने वाली आम आदमी पार्टी की हो रही है। कांग्रेस की कोई चर्चा करने को ही तैयार नहीं है। कांग्रेस की चर्चा हो भी रही है तो, सिर्फ इसलिए कि अजय माकन ने इस्तीफे की पेशकश की है। कांग्रेस की बात मैं क्यों कर रहा हूं, इसे समझने की जरूरत है। दिल्ली नगर निगम में अपने सारे उम्मीदवारों को निकम्मा मानकर उन्हें बदलने की रणनीति बीजेपी के लिए ब्रह्मास्त्र बन गई। 2012 से भी ज्यादा सीटें दिल्ली के तीनों निगमों में बीजेपी को मिल गए। ये साफ है कि दिल्ली नगर निगम का चुनाव नगर निगम के मुद्दों पर लड़ा ही नहीं गया। 270 में से 183 सीटें साफ बता रही हैं कि भारतीय जनता पार्टी के पास नरेंद्र मोदी जैसी एक पॉलिसी जो कम से कम 2019 तक तो बीजेपी को बाकायदा लाभांश देती रहेगी। लाभांश कम-ज्यादा हो सकता है लेकिन, मिलता रहेगा, इतना पक्का है। 5 साल की इस पक्की पॉलिसी…

मूत्रपीता भारतीय किसान नहीं हो सकता

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जन्तर मन्तर पर तमिलनाडु से आए किसान प्रदर्शन कर रहे हैं। नरमुण्ड के बाद नंगे होकर प्रदर्शन में अब वो अपना मूत्र पीकर प्रदर्शन कर रहे हैं। किसान सुनते ही लगता है कि इसका कुछ भी कहना जायज़ है। सही मायने में होता भी है, भारत में किसानों की दुर्दशा देश की दुर्दशा की असली वजह भी रही। इस दुर्दशा को रोकने के लिए आसान रास्ता सरकारों ने, नेताओं ने निकाल लिया है कि कुछ-कुछ समय पर क़र्ज़ माफ़ी करते रहो। नेताओं की दुकान चलती रही, खेती ख़त्म होती रही। अब उसी की इन्तेहा है कि तमिलनाडु के किसान नंगई पर उतरने के बाद मूत्र पीकर प्रदर्शन कर रहे हैं। अब मुझे पक्का भरोसा हो गया है कि ये भारत का किसान नहीं हो सकता जो धरती माँ की सेवा करके सिर्फ बारिश के पानी के भरोसे अन्नदाता बन जाता है। ये राजनीतिक तौर पर प्रेरित आन्दोलन दिख रहा है। ये किसान अगर इस बात की माँग के लिए जन्तर मन्तर पर जुटे होते कि इस साल हमने इतना अनाज उगाया, हमारी लागत के बाद कम से कम इतना मुनाफ़ा ही हमें किसान बनाए रख सकेगा। मैं भी जन्तर मन्तर पर इनके साथ खड़ा होता लेकिन नरमुण्ड, नंगई के बाद मूत्र पीकर वितण्डा करने वाले किसानों को भड़काकर…

21वीं सदी के सबसे बड़े नेता के तौर पर प्रतिष्ठित होते नरेंद्र मोदी

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महात्मा गांधी भारत के ही नहीं दुनिया के महानतम नेता हैं। गांधी इतने बड़े हैं कि भारत में कोई भी नेता कितनी भी ऊंचाई तक पहुंच जाए, गांधी बनने की वो कल्पना तक नहीं कर सकता। गांधी ने भारत को आजाद कराया और साथ ही ऐसा जीवन दर्शन दिया, जो आज भी उतना ही प्रासंगिक है। और हमेशा रहेगा। देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू, इन्दिरा गांधी और अटल बिहारी वाजपेयी कई बार भारतीय जनमानस के बीच प्रतिष्ठित हुए। लेकिन, इनमें से कोई भी ऐसा नहीं रहा जो, लम्बे समय तक भारतीय जनमानस पर ऐसी तगड़ी छाप छोड़ पाता जो, किसी भी परिस्थिति में अमिट होता। दरअसल भारतीय जनमानस के लिए किसी को प्रतिष्ठित करने का आधार सत्ता या सरकार नहीं होती है। यही वजह रही कि महात्मा गांधी के बाद कौन वाला सवाल हमेशा अनुत्तरित रह जाता है। करीब 17 साल नेहरू देश के प्रधानमंत्री रहे और करीब 16 साल इन्दिरा गांधी। लेकिन, इन्दिरा प्रधानमंत्री बनीं तो नेहरू की छाप मिटने सी लगी। इन्दिरा गांधी ने प्रधानमंत्री रहते बांग्लादेश को पाकिस्तान से अलग कराकर अमिट छाप छोड़ी। लेकिन, आपातकाल का कलंक उनकी सारी प्रतिष्ठा को मिट्टी में मिला गया। उसी आपातकाल क…

“कांग्रेस मुक्त भारत” नारा अच्छा है!

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भारतीय जनता पार्टी 37 साल की हो गई है। 6 अप्रैल 1980 को जन्मी पार्टी ने करीब-करीब 4 दशक में भारत जैसे देश में पूर्ण बहुमत हासिल कर लिया है। देश के 14 राज्यों में सरकार बना ली है। और दुनिया की सबसे ज्यादा सदस्यों वाली पार्टी बन गई है। स्पष्ट तौर पर ये भारतीय जनता पार्टी के लिए जबर्दस्त चढ़ाव का वक्त है। और चढ़ाव के वक्त में थोड़ी मेहनत करके ज्यादा हासिल किया जा सकता है। और अगर ज्यादा मेहनत की जाए, तो उसके परिणाम बहुत अच्छे आते हैं। इस समय नरेंद्र मोदी और अमित शाह की जोड़ी भारतीय जनता पार्टी को चला रही है, जो ज्यादा मेहनत के लिए ही जानी जाती है। इसीलिए आश्चर्य नहीं होता, जब इसी समय का इस्तेमाल करके नरेंद्र मोदी और अमित शाह की अगुवाई में कांग्रेस मुक्त भारत का नारा बुलन्द किया जा रहा है। जिस तेजी से मई 2014 के बाद देश के अलग-अलग राज्यों से कांग्रेस पार्टी खत्म होती जा रही है, वो भारतीय जनता पार्टी के कांग्रेस मुक्त भारत के नारे को साकार करता दिखाता है। लेकिन, क्या भारतीय जनता पार्टी के लिए सबसे उपयुक्त स्थिति है “कांग्रेस मुक्त भारत” का होना ? मुझे लगता है- इसका जवाब ना में है। दरअसल ये …

सेंसेक्स 30000 पहुंचा, रफ्तार की वजहें भी जान लीजिए

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शेयर बाजार में जश्न का माहौल है। माहौल कुछ वैसा ही है, जैसा नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने की उम्मीदों से था। नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री बने 3 साल होने जा रहे हैं। फिर अचानक ऐसा क्या हो गया कि शेयर बाजार में अच्छी तेजी देखने को मिल रही है। Sensex सेंसेक्स बुधवार को कारोबार में 30000 के पार चला गया। 5 राज्यों के विधानसभा चुनाव के नतीजे भी इसकी एक बड़ी वजह है। लेकिन, दूसरी कई वजहें हैं, जिस पर आपका ध्यान नहीं गया होगा। 1 जुलाई से लागू हो जाएगा जीएसटी लम्बे समय से किन्तु-परन्तु के फेर में फंसा जीएसटी कानून अब 1 जुलाई से लागू होने जा रहा है। केंद्र सरकार ने इसे लागू कराने के लिए जरूरी चारों बिलों को लोकसभा से पास करा लिया है। राजस्व सचिव हंसमुख अधिया का साफ कहना है कि कारोबारियों को जीएसटी के लिए तैयार होने का बहुत वक्त दिया गया है। सरकार इसे जुलाई से लागू करने जा रही है। कानून तैयार है और नियम सबको बता दिया गया है। तकनीकी बुनियादी ढांचा भी तैयार है। कारोबार करना आसान होने की उम्मीद जीएसटी लागू होने के बाद देश में कारोबारियों के लिए राहत की उम्मीद की जा रही है। खासकर कारोबारियों को तम…