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Showing posts from December, 2009

क्या सलीके से दर्शन होने पर भगवान का महत्व कम हो जाता है

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वैसे तो अकसर धार्मिक स्थलों पर अराजकता के किस्से अकसर देखने-सुनने को मिल जाते हैं। लेकिन, अभी राजस्थान के दौसा जिले के एक धार्मिक स्थल पर अराजकता का जो नजारा दिखा वो, सब पर भारी था। दौसा जिले के मेंहदीपुर में स्थित बालाजी हनुमान का मंदिर कुछ ऐसी ही अराजकता का शिकार है।


मंदिर के बाहर बाकायदा बालाजी ट्रस्ट का बोर्ड दिखा जिससे ये तो तय हो गया कि कुछ स्वनाम धन्य स्वयंभू धार्मिक ठेकेदारों ने बालाजी मंदिर से आने वाली आय से अपना कल्याण करने का रजिस्ट्रेशन करा रखा है। लेकिन, भगवान के भक्तों का हाल इतना बुरा हो जाता है कि मैं बालाजी मंदिर के सामने करीब 4 घंटे की लाइन में लगने के बाद भी बाहर से ही दर्शन करके लौट आया।



वैसे तो, किसी भी धार्मिक स्थल पर हर आस्थावान मत्था टेकने चला जाता है। लेकिन, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और राजस्थान के लोगों के लिए बालाजी हनुमान का विशेष महत्व है। दिल्ली से करीब 270 किलोमीटर की दूरी पर एक छोटे से गांव मेंहदीपुर में ये मंदिर है जो, इसी मंदिर की वजह से बेहद अस्त व्यस्त गंदे से कस्बे का रूप धर चुका है। एक मुख्य सड़क के दोनों तरफ आश्रम-धर्मशालाओं की लाइन लगी है। और, मंदिर क…

दलित-ब्राह्मणवाद को रामबाण बनने से रोकना होगा

ये नए तरह का मनुवाद है। इसको नए तरह का ब्राह्मणवाद भी कह सकते हैं। फर्क बस इतना है कि इस ब्राह्मणवाद का कवच दलित होने पर ही मिलता है। ये दलित ब्राह्मणवाद इतना अचूक नुस्खा हो गया है कि बस एक बार हुंकारी लगाने की जरूरत है फिर पीछे-पीछे लाइन लग जाती है। पुराना ब्राह्मणवाद धर्म के पाप लगने से डराता था और अपने पापों को छिपा ले जाता था तो, ये नया दलित ब्राह्मणवाद वोटबैंक खो जाने जैसे पाप का डर राजनीतिक पार्टियों को दिखाता है यही वजह है कि मायावती को खुद के राज में असल दलितों पर अत्याचार भले ही चिंतित नहीं करता लेकिन, आज के लिहाज से ब्राह्मण में तब्दील हो चुके कर्नाटक हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस के भ्रष्टाचार के खिलाफ महाभियोग के प्रस्ताव में एक दलित के खिलाफ साजिश की बू आने लगती है। मायावती ने प्रधानमंत्री को चिट्ठी लिखकर कहा है कि जस्टिस दिनकरन को बिना मौका दिए महाभियोग का प्रस्ताव लाना गलत है और वो इसके खिलाफ आवाज उठाएंगी। ये दलित नाम का न चूकने वाला नुस्खा ही है कि एक दलित कांग्रेसी सांसद की अगुवाई में सभी दलों के दलित सांसद अचानक दिनकरन के पक्ष में खड़े हो गए हैं। दिनकरन तो पहले से ही चिल्ला-…

मराठी भाजपा अध्यक्ष की चुनौतियां

भारी भरकम शरीर वाले नितिन गडकरी का भाजपा अध्यक्ष बनना कई मायनों में एतिहासिक है। वैसे तो नितिन गडकरी संघ के पूर्ण आशीर्वाद की वजह से ही उस कुर्सी पर बैठ पाए हैं जिस पद के जरिए अटल बिहारी वाजपेयी-लाल कृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जैसे भाजपा के दिग्गजों ने पार्टी को राष्ट्रीय पार्टी के दर्जे तक पहुंचा दिया और, कांग्रेस का विकल्प भाजपा बन गई। गड़करी सिर्फ 52 वर्ष के हैं और भाजपा के इतिहास में सबसे कम उम्र के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। गडकरी मराठी हैं और संघ मुख्यालय नागपुर में होने के बावजूद पहली बार संघ ने किसी मराठी के लिए प्रतिष्ठा लगाई है।

इतनी एतिहासिक परिस्थितियों में कुर्सी संभालने वाले गडकरी अब आगे इतिहास बनाएंगे या खुद इतिहास में ठीक तरीके से दर्ज भी नहीं हो पाएंगे। गडकरी का नाम जब राष्ट्रीय अध्यक्ष के लिए पहली बार सामने आया था तो, राष्ट्रीय मीडिया में एक सुर था-- मरती भाजपा के लिए आत्मघाती कदम। राज्य स्तर के नेता को राष्ट्रीय दर्जा देने की संघ की कोशिश की खूब आलोचना हुई थी। लेकिन, गडकरी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनते ही गडकरी के लिए फ्लाईओवर मैन, विकास पुरुष जैसे नारे सुर्खियां बन गए। टीवी…