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Showing posts from January, 2016

नर्मदा दर्शन वाया अमृतलाल वेगड़ वाया अनूप शुक्ल

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गंगा किनारे के छोरे के नर्मदा किनारे जाने का संयोग बना। करीब दो दिन रहा जबलपुर में। कार्यक्रम तो शादी में शामिल होने का था। लेकिन, जाहिर है प्रयोजन कोई भी हो अपन तो जहां भी गए मेल मिलाप का थोड़ा ज्यादा वाला हो ही जाता है। वहां भी हुआ। गंगा किनारे के शहर से नर्मदा किनारे के शहर में यानी कनपुरिया से जबलपुरिया बन गए अनूप शुक्ल भी आजकल (4 साल हो गए यही आजकल-आजकल करते) इसी शहर में पाए जाते हैं। पहले दिन तो मोबाइल नंबर न होने से उनसे भेंट न हो सकी। दूसरे दिन हुई। उसी दिन मुझे वापस भी लौटना था। लेकिन, फुरसतिया मिलने के लिए फुर्सत न निकाल सकें, ऐसा भला हो सकता। तो नहीं हुआ ना। फुरसतिया वैसे तो साइकिल से घूमकर पुलिया की दुनिया सबको दिखाते रहते हैं। लेकिन, सेना की गाड़ी फैक्ट्री में बड़का अधिकारी हैं, तो कार से ही हमसे मिलने आए। 
ये तस्वीर देखकर आपको भ्रम हो सकता है कि हमने पुलिया की दुनिया किताब खरीद ली है या फिर इसका प्रचार कर रहे हैं। लेकिन, जो दिखता है वो होता नहीं है। न हमने किताब खरीदी है और न ही इसका प्रचार कर रहे हैं। अनूप जी ने कहा वो विशुद्ध रूप से मुझे किताब छापने की प्रेरणा देने के ल…

ये ठुकराए जा चुके लोगों का आर्तनाद है

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#StopIdentityPolitics#RohithVemula 4Dalit इतना आसान नहीं है भाई। जैसे आप लोग समझ रहे हैं या फिर समझा रहे हैं। @RSSorg या @ABVPVoice कुछ भी अच्छा करें, वो खबर नहीं हो सकती। खबर तो छोड़िए उस पर बात भी नहीं हो सकती। वामपंथी देश में कहीं नहीं बचे। लेकिन, स्थापित है कि सरोकार सिर्फ वामपंथी करते हैं। देश की एक बहुत बड़ी समस्या है। कश्मीर से कम नहीं है। कश्मीर में मुसलमान हैं, तो इस बहाने बात हो जाती है। हालांकि, कश्मीरी पंडितों के लिए बात कम ही होती है।उत्तर पूर्व की बात कितनी होती है। इस देश में। कब होती है। जब कोई उत्तर पूर्व का, दिल्ली में किसी की बद्तमीजी का शिकार हो जाता है। या तब बात होता है जब कई दिनों तक उत्तर पूर्व के लोग अपने लिए लड़ते रहते हैं। तो कहीं कोई छोटी सी खबर बन जाती है। इस समय भी बात राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के दबाव से आत्महत्या करने लेने की रोहित वेमुला की खबर छाई हुई है। इसमें अब कोई छिपी बात तो है नहीं कि किस तरह से वामपंथ ने रोहित को इस्तेमाल कर लिया। सारे तथ्य अब सामने हैं। एक छात्र की मौत बहुत दुखद है। आत्महत्या शर्मनाक, …