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Showing posts from April, 2016

स्वाति मालीवाल, सोमनाथ भारती के बगल क्यों नहीं बैठी?

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दाग लग जाए, तो छुड़ाने के बाद भी थोड़ा बहुत दिखता रहता है। आम आदमी पार्टी के सोमनाथ भारती के मामले में भी ये साफ दिख रहा है। #BASO भारत अक्षरा सोशल ऑर्गनाइजेशन के कर्ताधर्ता भाई दीपक बाजपेयी ने बताया कि दिल्ली में #किताबगीरीऔरMission #HealingTouch वो शुरू कर रहे हैं। गया, अच्छा लगा कि इस तरह की शुरुआत को आम आदमी पार्टी की सरकार समर्थन कर रही है। कार्यक्रम में अरविंद केजरीवाल को भी आना था। लेकिन, किन्ही वजहों से नहीं आ सके। मनीष सिसौदिया पूरे समय रहे और कांग्रेस सांसद राजीव शुक्ला भी। कार्यक्रम में दौरान दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल आईँ, बोलीं और बैठी भी रहीं। लेकिन, इस बैठने में साफ दिखा कि स्वाति सोमनाथ भारती के बगल की खाली कुर्सी पर नहीं बैठना चाह रही थीं। कार्यक्रम के बीच में जब स्वाति आईं, तो राजीव शुक्ला बोल रहे थे। उनकी कुर्सी पर बैठ गईं। राजीव शुक्ला लौटे, तो स्वाति को उठना पड़ा। लेकिन, स्वाति मोहित चौहान के बाद बैठे सोमनाथ भारती के बगल की खाली सीट से बच रही थीं। आखिर में वो दूसरे किनारे पर पीछे से एक कुर्सी लगवाकर बैठीं। शायद ये भी वजह हो सकती है कि स्वाति दिल्ल…

आजादी का गला घोंटने की कोशिश!

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जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के अध्यक्षों का काफी शोहरत मिलती रही है। मान लिया जाता है कि बौद्धिक तौर पर वो काफी आगे होते हैं। लेकिन, इस अध्यक्ष ने पिछले सारे अध्यक्षों की बौद्धिक सीमा से आजादी हासिल कर ली है। जवाहरलाल नेहरू छात्रसंघ अध्यक्ष #KanhaiyaKumar ने तो वो कर दिखाया है जो, अब तक कोई न कर सका था। कन्हैया कुमार ने देश के कुछ लोगों को आजादी-आजादी का नारा देकर ऐसा दिमागी कुंद कर दिया है कि वही अब उन खास लोगों को हर तरह की आजादी दिलाने वाला मसीहा नजर आ रहा है। वो नौटंकी का देश का सबसे बड़ा उस्ताद बन गया है। ताजा नौटंकी में उसे बताया कि उसे जेट एयरवेज की फ्लाइट में साथी यात्री ने मारने की कोशिश की। अब कन्हैया को मारने की कोशिश और वो भी गला दबाकर। इतना सुंदर सधी सुर्खियां बनीं। देखिए कन्हैया का गला दबाकर मारने की कोशिश। कन्हैया मतलब आजादी हो रखा है। पैर से लेकर सिर के सहारे खड़े होकर लोग कन्हैया की आजादी के साथ सुर मिला रहे हैं। इसलिए सीधे सुर्खी बन गई कि आजादी का गला दबाकर मारने की कोशिश। अब ये भी कमाल ही है ना कि कन्हैया के बगल की सीट पर एक भाजपाई को सीट मिली। मतलब कितनी बड़ी साजि…

जैसे को तैसा!

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किसी भी दिन शायद ही ऐसा होता हो, जब सोशल मीडिया के जरिये आप तक कोई ऐसा संदेश न पहुंचता हो, जिसे पूरी दुनिया में फैला देने की जरूरत बताई जाती हो। अकसर वो संदेश निहायत बेवकूफाना ही होता है। लेकिन, चीन के dolcun isa डॉलकुन ईसा को भारतीय वीसा मिलने की खबर सचमुच पूरी दुनिया में फैलाने लायक है। चीन के विद्रोही Uighur ऊईघर समुदाय के नेता हैं डॉलकुन ईसा मदद देते हैं। और डॉलकुन रहते जर्मनी में हैं। जर्मनी में ही रहकर वो दुनिया भर में ऊईघर विद्रोहियों की मदद करते हैं। चीन का शिनजियांग प्रांत मुस्लिम बहुल है। और इस प्रांत के लोग स्वतंत्रता और स्वायत्तता की लड़ाई लड़ रहे हैं। इन्हीं लोगों की अगुवाई डॉलकुन ईसा Dolcun Eesa करते हैं। डॉलकुन अपने राजनीतिक अधिकारों के लिए हिंसक तरीके को जायज नहीं मानते हैं। लेकिन, चीन के तानाशाही शासन में किसी भी तरह के अधिकार की बात करना चीन के खिलाफ जाना है। इसीलिए चीन ने डॉलकुन ईसा को आतंकवादी घोषित कर रखा है। इसीलिए जब भारत ने डॉलकुन ईसा को दलाई लामा से मिलने के लिए भारतीय वीसा देने का एलान किया, तो चीन ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। चीन के विदेश मंत्रालय प्रवक्ता हुआ चु…

एक चुकी विरासत का शहजादा

राहुल गांधी को लेकर बार-बार ये कहा जाता है कि इतनी शानदार विरासत को वो संभाल नहीं पा रहे हैं। ये बात इतनी बार और इतने तरीके से कही जा चुकी है कि देश को राहुल गांधी पर अब नेता के तौर पर भरोसा हो ही नहीं पाता है। क्योंकि, देश के लोगों को लगने लगा है कि राहुल गांधी ही दरअसल नाकाबिल हैं। जबकि, कांग्रेस की और गांधी परिवार की विरासत बहुत समृद्ध है। इससे राहुल गांधी की नेतृत्व की क्षमता पर सवाल और गंभीर होता जाता है। अब सवाल यही है कि क्या राहुल गांधी को सचमुच इतनी शानदार विरासत मिली है। जिसे वो आगे नहीं ले जा पा रहे हैं। या दरअसल सच्चाई ये है कि राहुल गांधी को एक चुकी हुई विरासत मिली थी। एक पार्टी के तौर पर भी और एक परिवार के तौर पर भी।
राहुल गांधी की सबसे बड़ी मुश्किल ये है कि राजनीतिक विश्लेषक और देश की जनता आज के समय में उनकी काबिलियत की तुलना उनके पिता राजीव गांधी से कर रही है। भले ही भारतीय जनमानस में राजीव गांधी की छवि एक गजब के नेता के तौर पर बनी हुई है। जिसने सीधे प्रधानमंत्री की कुर्सी संभाली और देश का सबसे नौजवान प्रधानमंत्री बन गया। लेकिन, विश्लेषक ये भूल जाते हैं कि दरअसल राजीव …

सत्ता आने के साथ समाज की समझ घटती जाती है

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#BJPAgainstOddEven #twitter पर मजे से ट्रेंड कर रहा है। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल @ArvindKejriwal सहित पूरी आम आदमी पार्टी इसे ट्वीट करके बता रही है कि भारतीय जनता पार्टी इस न भूतो न भविष्यति वाली योजना में बाधा पहुंचा रही है। लेकिन, मुझे लग रहा है कि दिल्ली की जनता सम-विषण से नाराज हो रही है। बुरी तरह। मैं तो तथ्यों के आधार पर इसके खिलाफ हूं। क्योंकि, ये कतई प्रदूषण से लेकर ट्रैफिक जाम तक कुछ नहीं सुधारने वाला। दुनिया भर में इसकी मिसाल है। सम-विषम प्रदूषण या यातायात की समस्या का समधान नहीं है। इसे यहां विस्तार से पढ़ सकते हैं। शनिवार 16 अप्रैल को किसी काम से मुझे दिल्ली जाना था। मेरी कार का नंबर विषम पर खत्म होता है। तीन बार दिल्ली में ऑटो लिया। कोई मीटर से चलने को तैयार नहीं हुआ। नोएडा में तो खैर मीटर की बात करना मंगल ग्रह से आए प्राणी जैसी दिखना हो जाता है। लगभग जबरदस्ती पुलिस की धौंस दिखाकर ऑटोवाले से मीटर चलाने को कहा। उसने बात नहीं सुनी। आखिरकार कुछ ज्यादा देकर ही छूटे। #Uber ने बड़ा सा विज्ञापन दे रखा था कि वो आज #EVEN150 यानी 150 रुपए तक की यात्रा मुफ्त कराएगा। कही…

दलित-पिछड़े की पार्टी दिखने को बेकरार भाजपा

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भारतीय जनता पार्टी मई 2014 से आगे बढ़ने का रास्ता तलाश रही है। ये तलाश इसलिए भी ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाती हैं क्योंकि, दिल्ली और बिहार के विधानसभा चुनाव परिणामों से ये लगने लगा है कि भारतीय जनता पार्टी मई 2014 से पीछे जा रही है। इसीलिए भारतीय जनता पार्टी ने आखिरकार पूरा समय लेने के बाद पांच राज्यों के अध्यक्ष तय कर दिए। पार्टी संगठन और समर्थकों, कार्यकर्ताओं के लाख दबाव के बावजूद राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने इन पांचों राज्यों के अध्यक्ष नामित करने में इतना समय लिया, जो राजनीतिक और रणनीतिक लिहाज से खतरनाक होता दिखता है। लेकिन, अच्छी बात ये है कि अमित शाह ने इन पांचों राज्यों में लगभग भविष्य की भारतीय जनता पार्टी की रूपरेखा जाहिर की है। हालांकि, भारतीय जनता पार्टी का वर्तमान भी यही है। लेकिन, सबके बावजूद भारतीय जनता पार्टी पर सवर्ण और उसमें भी ब्राह्मण बनिया की पार्टी होने का जो ठप्पा लगा है। उसे अमित शाह पूरी तरह से खत्म कर देना चाहते हैं। सैद्धांतिक और काफी हद तक व्यवहारिक तौर पर भारतीय जनता पार्टी के नेता, कार्यकर्ता ये कह सकते हैं कि भाजपा में जाति से किसी की कुर्सी तय नहीं होती है…

विज्ञापन के बहाने मीडिया खरीद में लगी आम आदमी पार्टी

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लग रहा है कि दिल्ली के शिक्षा मंत्री मनीष सिसौदिया manish sisodia बेहतर कर रहे हैं। लेकिन, अभी अपने शहर इलाहाबाद का अखबार देखते हुए दैनिक जागरण में ये एक पन्ने का विज्ञापन दिखा, तो मुझे संदेह हो रहा है कि ये काम करने की नीयत है या काम करते हुए दिखने की। वैसे तो दिल्ली के प्राइवेट स्कूलों को सरकारी आदेश देने के लिए किसी अखबार में विज्ञापन की जरूरत क्या है। और अगर है भी तो वो सिर्फ दिल्ली के अखबारों में विज्ञापन देने की है। Allahabad इलाहाबाद के अखबारों में दिल्ली के प्राइवेट स्कूलों को ध्यान दिलाने की कोशिश सिर्फ और सिर्फ Propaganda प्रोपोगैंडा नजर आता है। तो क्या आम आदमी पार्टी और इसके नेता लोकलुभावन राजनीति को नए सिरे से साबित कर रहे हैं। हर रोज मैं इलाहाबाद की ई पेपर पढ़ता हूं, तो वहां छपे विज्ञापन पर सवाल खड़ा हुआ। लेकिन, जब उसके बाद Facebook फेसबुक की मेरी पोस्ट पर देश के अलग-अलग हिस्से के लोगों ने बताया कि देश में लगभग हिंदी पट्टी में हर जगह विज्ञापन गया है। मेरी फेसबुक पोस्ट पर लोगों की जो टिप्पणी आई उसे भी लगा रहा हूं।
ShivOm लिखते हैं They are literally worst thing of modern p…

देशभक्त मुसलमान नेताओं को नहीं लुभाता

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मोहम्मद तंजील अहमद Mohammad Tanzil Ahmad के मां-बाप ने उनका नाम पता नहीं कितना सोचकर रखा होगा। लेकिन, जब अंग्रेजी और हिन्दी में तंजील का मतलब समझने की कोशिश में ढेर सारे शब्द मिले, तो साफ हो गया कि अल्लाह ने तंजील को किसी खास मकसद से धरती पर भेजा रहा होगा। तंजील का मतलब अंग्रेजी में Revelation रेवलेशन और हिंदी में ईश्वरावेश, इश्वरोक्ति, इलहाम, प्रकटीकरण, प्रकाश, पर्दाफाश, रहस्योद्घाटन मिलता है। और अगर इस्लाम के संदर्भ में समझें, तो जिस प्रक्रिया से पवित्र संदेश मुहम्मद साहब तक पहुंचता है, वही तंजील है। यह मूलत: अरबी भाषा का शब्द है। नाम से ही ढेर सारी विविधताओं को समेटे तंजील को हत्यारों ने पूरी योजना के साथ मौत के घाट उतार दिया है। अब तक ये साफ नहीं हो सका है कि तंजील की हत्या के पीछे कौन हैं। लेकिन, तंजील के देश की सुरक्षा एजेंसी एनआईए के अधिकारी के तौर पर काम करने की वजह से आतंकवादी घटना से भी इनकार नहीं किया जा रहा है। तंजील ऐसे अधिकारी रहे हैं, जिनके लिए ये बता पाना मुश्किल है कि इस देश की किस आतंकवादी जांच में वो शामिल नहीं हैं। तंजील पचास साल के होने ही वाले थे। लेकिन, देश के द…

पानी पर धारा 144

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देश में पहली बार है कि जब होली के त्यौहार पर किसी इलाके में धारा 144 Section 144 on Water इसलिए लगा दी गई कि लोग पानी न ले पाएं। महाराष्ट्र के लातूर में प्रशासन ने धारा 144 लगा दी है। अब तक 144 पांच या उससे ज्यादा लोगों को एक साथ खड़े होने पर इसलिए रोकती थी कि वो किसी धगड़े या दंगा-फसाद की तैयारी न कर रहे हों। लेकिन, लातूर की ये धारा 144 पांच या उससे ज्यादा लोगों को किसी कुएं या किसी भी पानी के स्रोत के पास खड़ा होने से रोकती है। पानी के टैंकर के पास भी पांच या उससे ज्यादा लोग इस वजह से नहीं खड़े हो सकते। होली के नजदीक पानी बचाने की चिंता तो हम भारतीयों को गजब होती है। लेकिन, पानी को लेकर बवाल की आशंका से धारा 144 का लगना साफ बताता है कि मामला अब पानी की चिंता से बहुत आगे चला गया है। पानी की कमी का मामला कितना भयावह हो गया है। इसका अंदाजा इन आंकड़ों से लगता दिखता है। 31 मई तक लातूर के बीस स्थानों पर पानी के किसी भी तरह के स्रोत के आसपास धारा 144 लगी रहेगी। और कुआं तो आदेश में लिख दिया गया है। लेकिन, ये पूरा आदेश प्रशासन ने पानी के टैंकरों के पास लोगों को इकट्ठा होने से रोकने, आपस में …