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Showing posts from August, 2011

टीवी देखने से काफी कुछ साफ रहता है, दिमाग भी!

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जो लोग इस आंदोलन में मुसलमानों की गैरमौजूदगी की बात कर रहे हैं। उन्हें टीवी चैनलों को ध्यान से देखना चाहिए। मेरे कैमरे पर भी कई मुसलमानों ने बुखारी की बददिमागी को नकारा है।

इस आंदोलन में दलितों की हिस्सेदारी कितनी ज्यादा है। ये रामलीला मैदान में एक बार आंख खोलकर घूमने से पता चल जाएगा। कल करोलबाग के अंबेडकर टोले से 400 दलित आए थे। सबसे मैंने कैमरे पर ये पूछा कि क्या आप लोग सिर्फ भावनाओं में बहकर यहां चले आए हैं। जबकि, तथाकथित दलित नेता तो, कह रहे हैं ये शहरी, इलीट सवर्णों का आंदोलन है। तो, सबका जवाब था- अन्ना को गरियाने वाले बेवकूफ हैं।

मैंने उनसे नाम के साथ वो, क्या कर रहे हैं। ये सब पूछा है। कुछ भी भुलावे में रखकर नहीं। ये तथाकथित एक धर्म, वर्ग, जाति के नेताओं को दुकान बंद होने का खतरा हमेशा ही सताता रहता है। और, उसमें ये बेवकूफियां भी करते रहते हैं।

कमाल की बेहूदगी है!

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कुछ लोग बेहूदगी की हद तक चले जाते हैं। अभी तक ये फेसबुक और सोशल साइट्स पर ही था। अब टीवी पर भी दिखने लगा। कुछ लोग भ्रष्टाचार के खिलाफ अन्ना के इस आंदोलन को लोग सवर्णों का आंदोलन कह रहे हैं। कमाल है देश के हर बदलाव वाले मौके को दलित विरोधी करार दे दो। और, आरोप लगाते घूमो कि दलितों को मुख्यधारा में आने नहीं दिया जा रहा। दरअसल ऐसा करने वाले वो, लोग हैं जिनकी दुकान इसी भर से चल रही है।

‎4 दिनों से मैं इस आंदोलन की कवरेज कर रहा हूं। और, मेरा ये आंकलन है कि ये जेपी से बड़ा आंदोलन है। क्योंकि, वो पूरी तरह से राजनीतिक आंदोलन था। ये सामाजिक, पूरी तरह से जनता का आंदोलन है। आप बताइए

अन्ना कैसे सुधारोगे भ्रष्ट भारत

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किसन बाबूराव उर्फ अन्ना हजारे को सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ अनशन तक नहीं करने दे रही है। दरअसल, अलग-अलग किस्मों-रंगों में भ्रष्टाचार ऐसे घुस बैठा है कि डर लगता है कि बिना भ्रष्टाचार के हम रह पाएंगे भी या नहीं।

कल ही इलाहाबाद से लौटा हूं। दिल्ली स इलाहाबाद जाते वक्त प्रयागराज में दो लड़कियों का टिकट कनफर्म नहीं था। या शायद एयरकंडीशंड कोच का टिकट ही नहीं था। लेकिन, उनकी किस्मत अच्छी थी। एक सीट खाली थी। दोनों लड़कियां उसी पर सो गईं। टीटी आया- एक लड़की ज्यादा समझदार थी। टीटी के नाराज होते ही उसने 100 का पत्ता पकड़ा दिया। पहले टीटी और नाराज हुआ। फिर, बोला - एक और दो। एक तो ये था सहूलियत का भ्रष्टाचार।

दूसरा इलाहाबाद में ही घर से निकला। इलाहाबाद के गंगा किनारे के इलाके दारागंज में हमारा घर है। वहां से शहर की तरफ निकला। दारागंज से बक्शी बांध से हम लोग एलेनगंज की तरफ चले। बांध खत्म होते-होते एक साईं मंदिर दिख गया। जिसके बगल में बड़ा सा बैनर भी लगा दिखा जो, बिना किसी डर-भय के चंदा देकर मंदिर बनाने की अपील कर रहा है। ये गजब का भ्रष्टाचार है। अब ये अतिक्रमण, अगर अभी ही इलाहाबाद विकास प्राधिकरण…

फूल रहा है दुनिया के दादा का दम

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शुक्रवार को अमेरिकी शेयर बाजार जब बंद होने की तरफ बढ़ रहे थे। तो, दुनिया की जानी-मानी क्रेडिट रेटिंग एजेंसी एस एंड पी यानी स्टैंडर्ड एंड पुअर के दफ्तरों में हलचल बढ़ गई। खबरें जो, निकलकर आईं कि दरअसल अमेरिकी कर्ज संकट को सुलझाने के लिए रेटिंग एजेंसी के तय फॉर्मूले के गणित में थोड़ी गड़बड़ हो गई थी। जिसकी वजह से कर्ज की सीमा बढ़ाने और खर्च घटाने के अमेरिकी सरकार की योजना के आधार पर अमेरिका की क्रेडिट रेटिंग एएए प्लस पर ही बनी रही। लेकिन, शुक्रवार को अमेरिकी बाजार बंद होने से पहले ही स्टैंडर्ड एंड पुअर ने दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था की साख पर संदेह खुलेआम जाहिर कर दिया। स्टैंडर्ड एंड पुअर ने अमेरिकी क्रेडिट रेटिंग एएए प्लस से घटाकर एए प्लस कर दिया। और, उस पर भी रेटिंग एजेंसी ने इसे निगेटिव आउटलुक के साथ जारी किया है। इसका मतलब ये हुआ कि अगले 12 से 18 महीने में एक बार फिर से अमेरिका की रेटिंग घटने का खतरा है। और, अमेरिकी रेटिंग का घटना इसलिए भी ऐतिहासिक है कि ये रेटिंग एजेंसी के अस्तित्व में आने के बाद पहली बार हुआ है। अब सवाल ये है कि इस रेटिंग के घटने को अमेरिकी अर्थव्यवस्था और दु…