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अब कितनी सनसनी होती है

ऐसा चमत्कार कैसे हो जाता है

ये हिंदी की लड़ाई थी ही नहीं

ये सोचकर करना-होना जरा मुश्किल था

ढोंगी बाबाओं के अमीर भक्त

इलाहाबाद का रिक्शा बैंक

कहिए कि इसी वजह से गरीब रथ इतनी बची हुई है

अब लगने लगा है कि गरीब रथ है

बिटिया के बहाने

निजी जिंदगी की अहम पदोन्नति

अमर प्रभाष जोशी

फिर से पूछ रहा हूं घूरा बनने में कितना दिन लगता है