दो बूढ़े वामपंथियों के अहं की लड़ाई में बरबाद हो रहा है बंगाल

रिजवानुरहमान की मौत के बाद पश्चिम बंगाल के पूर्व मुख्यमंत्री ज्योति बसु का बयान- इस मामले में राज्य सरकार ने सही समय पर सही कदम नहीं उठाया।

नंदीग्राम और सिंगूर मामले पर राज्य सरकार सलीके से लोगों को समझा नहीं पाई- ज्योति बसु।

पुराने वामपंथी लकीर के फकीर हैं। वो, समय के साथ खुद को बदल नहीं पा रहे हैं- बुद्धदेव भट्टाचार्य

बंगाल के नौजवानों को रोजगार की जरूरत है और वो बिना पूंजी के संभव नहीं। पूंजी के लिए पूंजीवादियों का सहारा लेना ही होगा। ये समय की जरूरत है- बुद्धदेव भट्टाचार्य


पिछले कुछ महीने में पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य और पूर्व मुख्यमंत्री ज्योति बसु के बीच हुए अघोषित शीत युद्ध की ये कुछ बानगियां हैं। कैडर के दबाव और स्वास्थ्य की मजबूरियों ने ज्योति बसु पर बुद्धदेव को कुर्सी देने का दबाव तो बना दिया। लेकिन, ये बूढ़ा वामपंथी अभी भी बंगाल पर अपना दखल कम नहीं होने देना चाहता। और, बंगाल की राजनीति को नजदीक से समझने वालों की मानें तो, इन दो बूढ़े वामपंथियों के अहम की लड़ाई में बंगाल बरबाद होता जा रहा है।

ज्योति बसु ने हर उस नाजुक मौके पर बुद्धदेव के हर फैसले को गलत ठहराने की कोशिश की। जब बुद्धदेव को बचाव की जरूरत थी। इसी रस्साकशी का परिणाम था कि दो दशकों ज्योति बसु के खिलाफ मोर्चा खोलने वाली ममता सिंगूर के मुद्दे पर ज्योति बसु के घर चाय-नाश्ता मंजूर कर लेती हैं। लेकिन, बुद्धदेव से मिलने को भी तैयार नहीं होती हैं।

बंगाल में सीपीएम कैडर के खिलाफ सीपीएम का ही कैडर खड़ा है। इस बात में तो कोई संदेह हो ही नहीं सकता कि SEZ और जमीन के बहाने लड़ाई के जो तरीके इस्तेमाल हो रहे हैं वो, ताकत राज्य में सीपीएम कैडर के अलावा किसी और के पास नहीं है। बुद्धदेव हिंसा में माओवादियों का हाथ होने की बात कह रहे थे। लेकिन, रिपोर्ट साफ बताती है कि माओवादी कहीं नहीं हैं। माओवादी तरीका जरूर अपनाया जा रहा है।

कोलकाता में ये चर्चा आम है कि सबसे ज्यादा हिंसा बुद्धदेव का विरोधी खेमा ही कर रहा है। अब ये बताने की जरूरत तो नहीं है कि मुख्यमंत्री के अलावा राज्य में दूसरे किस वामपंथी नेता को कैडर का अंधा भरोसा हासिल है। दोनों बूढ़े वामपंथियों की लड़ाई में बंगाल बरबाद होता जा रहा है। और, अब लेफ्ट नेताओं को भी लगने लगा है कि इस लड़ाई में दुनिया के अकेली सबसे ज्यादा समय तक चलने वाली लोकतांत्रिक सरकार इतिहास बन सकती है। यही वजह है कि करात इस बार खुलकर बुद्धदेव के साथ खड़े हो गए। लेकिन, कुल मिलाकर बरबादी तो बंगाल की ही हो रही है। बंगाल के लोग अब तो जाग जाओ।