क्या जरूरत थी उत्तर प्रदेश, बिहार से मुलायम-लालू को हटाने की?

उत्तर प्रदेश और बिहार में सत्ता परिवर्तन जरूरी है। मुलायम सिंह यादव और लालू प्रसाद यादव इन राज्यों को देश के सबसे बरबाद राज्यों में पहले नंबर पर रखे हुए हैं। कुछ ऐसे ही नारों के झांसे में आकर उत्तर प्रदेश और बिहार की जनता ने राज्यों में नए लोगों को सत्ता थमा दी।
सत्ता में आने के बाद नीतीश ने ऐलान किया कि बिहार में अब लालू का जंगल राज खत्म हो गया है। अब राज्य में भय का माहौल समाप्त कर दिया जाएगा। किसी को भी इस बात की इजाजत नहीं दी जाएगी कि वो, राज्य की कानून व्यवस्था के साथ खिलवाड़ कर सके। नीतीश पूरे दम से ये बोल रहे थे और उनकी पार्टी के अनंत सिंह जैसे नेता भी अपने लोगों को भरोसा दिला रहे थे कि अब लालू के लोगों का भय खत्म हुआ। अब बिहार के लोगों को छोटे सरकार (लोकतंत्र पर धब्बा अनंत सिंह का यही उपनाम है) के आतंक के साये में रहना सीखना होगा।
कुछ लोग पत्रकार होने के गुरूर में अनंत की अनंत कथा समझ नहीं पाए। और, उनके खिलाफ एक मामले में उनसे सफाई लेने पहुंच गए। बस फिर क्या नीतीश के भयमुक्त राज का उन्हें असली मतलब समझाया गया, पत्रकार पिटे थे इसलिए देश भर के मीडिया ने अनंत के काले कारनामों को नीतीश के साथ जोड़कर हंगामा किया तो, अनंत को नीतीश ने जेल भिजवा दिया। जैसे ही अनंत जेल गए, टीवी चैनलों से भी अनंत-नीतीश कलंक कथा गायब सी हो गई। मामला ठंडा पड़ा तो, पहली बात सामने आई कि जिस लड़की रेशमा की लाश होने की बात कही जा रही थी वो, लाश किसी और की थी। बस इसी आधार पर अदालत ने अनंत को और उसके गुंडों को जमानत दे दी। अनंत बाहर हैं। हो, सकता है कि नीतीश के ‘भयमुक्त’ राज को फिर से स्थापित करने में जी जान से जुटे भी हों।
लालू राज के बिहार जैसा ही राज उत्तर प्रदेश में मुलायम ने बनाए रखा। मुलायम सत्ता से गए तो, उनकी जगह आई मायावती ने भी बिहार के नीतीश राज से बराबरी शुरू कर दी। बिहार के एक विधायक अनंत सिंह पर लड़की से बलात्कार के बाद उसकी हत्या का आरोप दिखा तो, उत्तर प्रदेश के एक मंत्री आनंदसेन यादव ने यहां इसका जिम्मा संभाल लिया। उत्तर प्रदेश में और ही हद हो गई।
मंत्री आनंदसेन यादव के ऊपर आरोप है कि उन्होंने फैजाबाद में विधि स्नातक की छात्रा शशि के साथ अनैतिक संबंध कायम किए (अब तो मैं भ्रम में पड़ गया हूं कि ये अब अनैतिक रहा भी है क्या) फिर एक दिन अचानक शशि गायब हो गई। अंदेशा है कि उसकी हत्या कर दी गई। पुलिस शशि की लाश अब तक नहीं खोज पाई है। वैसे बिहार में भी रेशमा की लाश अब तक नहीं मिली है।
यहां भी मामला जब मीडिया में आया तो, एक दिन बाद मंत्री आनंदसेन ने इस्तीफा तो दे दिया। लेकिन, आश्चर्य है कि अब तक मंत्री आनंदसेन यादव के खिलाफ कोई जांच ही नहीं शुरू हुई है। जबकि, अब तक मिले सुबूतों से साफ है कि गायब होने से पहले शशि सुल्तानपुर में मंत्री आनंदसेन के साथ देखी गई थी। लेकिन, पुलिस सिर्फ शशि की लाश खोजने में लगी है। हां, आनंदसेन के ड्राइवर से जरूर पूछताछ चल रही है। अब सवाल ये है कि अगर आनंदसेन को सरकार दोषी नहीं मानती तो, उनसे इस्तीफा लेने की क्या जरूरत थी। और, अगर इस्तीफे का आधार आरोपी होना है तो, फिर एफआईआर में आनंदसेन का नाम क्यों नहीं है।
उत्तर प्रदेश में सारे समीकरणों को तोड़कर जनता ने मायावती को भय, भ्रष्टाचार और आतंक के खिलाफ पूर्ण बहुमत दिया। मायावती को सत्ता मिली तो, माया ने कहा – मायाराज में मलायम राज का भय, भ्रष्टाचार और आतंक-जंगलराज पूरी तरह से खत्म होगा। महीने भर में ही मुलायम के गुंडे अंदर हो गए। कानून का राज दिखने लगा। और, अब उत्तर प्रदेश में सिर्फ मायावती के लोगों को भय, भ्रष्टाचार और आतंकराज चल रहा है। मुलायम राज का भय, भ्रष्टाचार और आतंकराज खत्म हो गया। मैडम मायावती ने अपना चुनावी वादा पूरा कर दिया।
अब राज्य में इस राज्य के खात्मे के लिए लोगों को 5 साल इंतजार करना होगा। मैं सोचता हूं फिर जरूरत क्या थी उत्तर प्रदेश से मुलायम सिंह यादव और बिहार से लालू प्रसाद यादव को हटाने की। मैं नहीं समझ पाया- आपको समझ में आए तो मुझे बताइए।