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इस बार गलती से भी गलती मत करना

दलित मंत्र रामबाण से भी बड़ा हो गया है

सिस्टम ही ऐसा है साहब बिना एग्रेसिव हुए बात ही नहीं बनती

ये भी तो बाजार की वजह से ही है

अब ये बात बेवकूफी की लगती है

ऐसे संस्कारों को आग लगा दो

शशि थरूर, जानवर अरे वही cattle clas और हम

हमें सत्ता देने के लिए तुम मर जाओ!!!

काफी कुछ अच्छा दिख रहा है मगर ...

ये गजब की इकोनॉमी है!!!

ये क्या हिंदी-हिंदी लगा रखा है

भविष्य का मीडिया है वेब जर्नलिज्म

बंबई, ब्लॉगर, बाजार, भाषण

ये मानेगी नहीं जब करेगी नंगई ही करेगी

ये अभी और शर्मसार करेंगे

भारतीयों में गुलामी का इनबिल्ट सॉफ्टवेयर

100 रुपए खुल्ला होता है