दलित मंत्र रामबाण से भी बड़ा हो गया है

पता नहीं पहले लोग ज्यादा आस्थावान थे। राम पर भरोसा ज्यादा था या हो सकता है तर्क-कुतर्क के बावजूद भी आज ही ज्यादा हो लेकिन, पहले कोई भी अचूक दवा, अचूक नुस्खा, अचूक तरीका मिले तो, लोग कहते थे रामबाण है। चूकेगा नहीं। आजकल न चूकने वाला एक और नुस्खा निकल आया है कि कुछ भी करो- कह दो कि दलित होने की वजह से मुझे फंसाया जा रहा है।
बस फिर किसी की हैसियत नहीं है कि कोई रामबाण के इस्तेमाल के बाद कुछ हमला करने की हिम्मत कर सके। अपराध करो, भ्रष्टाचार करो- कोई रोकने-टोकने वाला नहीं। बेचारे सचमुच के दलितों से लेकर जाति में दलित लगाए महासवर्णों तक आपके साथ खड़े हो जाएंगे और जिनके जाति के आगे दलित नहीं लगा है वो, इस डर से विरोध नहीं करेंगे कि दलित विरोधी होने का ठप्पा न लग जाए।
 
इस बार ये रामबाण अपनाया जा रहा है कर्नाटक हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस पी डी दिनकरन को बचाने के लिए। दिनकरन पर भ्रष्टाचार के आरोप हैं और, खुद सुप्रीमकोर्ट के चीफ जस्टिस के जी बालाकृष्णन ने न्यायपालिका से भ्रष्टाचार खत्म करने की मुहिम सी चलाई हुई है। अब National Schedule Caste Commission के चेयरमैन बूटा सिंह कह रहे हैं कि दिनकरन पर ऐसे आरोप सिर्फ इसलिए लग रहे हैं कि वो, दलित हैं। अब अगर बूटा सिंह साहब बालाकृष्णन साहब कौन सी जाति के हैं ये भी लगे हाथ बता देते तो, अच्छा रहता।
 
वैसे ये वही बूटा सिंह जिनके बेटे को सीबीआई ने गिरफ्तार किया है बिल्डर से करोड़ो की धोखाधड़ी के मामले में। उस वक्त भी कुछ ऐसा ही रोना रोया जा रहा है। अभी बूटा सिंह कह रहे हैं कि सीनियर एडवोकेट शांति भूषण दलित विरोधी हैं इसीलिए वो, दिनकरन के सुप्रीमकोर्ट का जज बनने में रोड़ा लगा रहे हैं। बूटा सवाल उठा रहे हैं कि दिनकरन इतना अच्छा काम कर रहे थे तो, उनके ऊपर तभी ये आरोप क्यों लगा जब उनका नाम सुप्रीमकोर्ट के लिए भेजा गया। वैसे वरिष्ठ अधिवक्ता शांति भूषण भी कमर कसे बैठे हैं कि अगर चाहे तो, National Schedule Caste Commission उनके खिलाफ मामला दर्ज करा सकता है लेकिन, वो दलित होने की वजह से किसी भ्रष्ट जज को सुप्रीमकोर्ट में नहीं आने देंगे।
 
अच्छा है पहले सेक्युलरिज्म रामबाण था। कुछ भी करो, अपराध करो, भ्रष्टाचार करो, कितनी भी गंदगी फैलाओ सेक्युरिज्म बढ़िया ढाल बन जाता था। अब दलित होना हर बुराई की ढाल बन जाएगा।