Wednesday, June 03, 2009

देश हांफने न लगे

आज मीरा कुमार भारत की पहली महिला लोकसभा अध्यक्ष बन गईं। ये एतिहासिक घटना है। इसके बाद मीरा कुमार ने सबका धन्यवाद करते हुए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को अपने मंत्रिमंडल का सबसे परिचय कराने के लिए आमंत्रित किया। कई मायनों में ये लोकसभा एतिहासिक है। बरसों बाद कांग्रेस को फिर से इतनी सीटें मिली हैं। बरसों बाद फिर से राष्ट्रीय पार्टियां-क्षेत्रीय पार्टियों की दादागिरी का शिकार नहीं हुई हैं। दलित महिला लोकसभा स्पीकर के साथ आदिवासी डिप्टी स्पीकर भी बन गया।


लेकिन, जब प्रधानमंत्री अपने जंबो मंत्रिमंडल से सदन का परिचय करा रहे थे तो, वो भी एतिहासिक ही था। ये आजाद भारत के इतिहास का सबसे बड़ा मंत्रिमंडल है। यहां तक कि गठजोड़ के दबाव में बनी NDA और पिछली UPA सरकार से भी ज्यादा मंत्री। 78 मंत्री और उनका सरदार एक प्रधानमंत्री।


जब प्रधानमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण के विभागों का नाम गिना रहे थे तो, वो लगभग हांफने से लगे थे। पूरा सदन हंस रहा था। मंत्री आनंद शर्मा भी हंस रहे थे लिस्ट सुनकर लेकिन, पता नहीं प्रधानमंत्रीजी और उनके मंत्रिमंडल को पता है या नहीं कि इतने बड़े बेवजह के मंत्रिमंडल पर देश हंस रहा है। छोटा मंत्रिमंडल बनाकर मिसाल बनने का बड़ा मौका गंवा दिया मनमोहनजी। मनमोहनजी आपके इतनेबड़े मंत्रिमंडल के तले दबा देश हांफ रहा है।

8 comments:

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi said...

पिछली बार वामपंथियों ने बाहर से समर्थन न दिया होता तो भी यही हालत होती। अभी तो देखिए होता है क्या क्या?

ARVI'nd said...

dekhte hai manmohan ji hanfate-2 bhi rath ko kis gati se manzil tak pahunchane ki koshish karte hai.

डॉ. मनोज मिश्र said...

बहुत सही कहा है आपनें .यदि ऐसा हो गया होता तो वाकई एक ऐतिहासिक पहल होती लेकिन मौका चूक गए सरदार जी .

Anil Pusadkar said...

अभी तो सिर्फ़ हांफ़ रहा है आगे खांसेगा भी और ……………।

RAJ SINH said...

ऐतिहासिक मौका !

हर ऐतिहासिक मौका कांग्रेस सहित सभी नेताओं को मिलता रहा है और उसका परिणाम ? देश भोग रहा है !

जय हो !

बकबकिया said...

वाकई आज देश हांफ ही तो रहा है। वोटिंग के दिन भी लोग हांफ ही तो रहे थे जो लोकसभा के जादुई आंकडे का तुक्का कांगे्रस के पाले में चला गया। वरना तो यह बात अभी तक समझ नहीं आई कि महंगाई सबसे अधिक कांग्रेस के इस कार्यकाल में बढी, बडी आतंकी घटना इनके कार्यकाल में घटी, मंदी की मार से लाखों घर इनके कार्यकाल में बर्बाद हुए इसके बावजूद कैसे कांग्रेस इस स्थिति में आ कर खडी हो गई यह भी शोध का विषय है। मजे की बात तो यह है कि अब नरेगा को जीत का श्रेय देने में लोग जुटे हैं, जिसमें गडढा खोदो और पाटो के अलावा कुछ नहीं है।

Mrs. Asha Joglekar said...

सही कहा इतने बडे मंत्री मंडल के नीचे प्रधान मंत्री जी दब ही तो गये है । सीटें चाहें पहले से ज्यादा आईं हों, पर इतनी भी नही आईं, वरना ये भार क्यीं उठाना पडता ।

venus kesari said...

क्या आप इलाहाबाद से है ?
यदि हाँ तो अपना संचिप्त परिचय देने की कृपा करिए
venuskesari@gmail.com
वीनस केसरी (मुट्ठीगंज, इलाहाबाद)

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