नितिन गडकरी नागपुर से चुनाव लड़ेंगे?

जमीन पर रहना-जाना जरूरी होता है। न्यूजरूम से जो पता चलता है वो न्यूजरूम जैसा ही होता है। मतलब चमकता और उस चमक में हकीकत अकसर साफ-साफ दिख नहीं पाती। अभी महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय के बुलावे पर वर्धा गया था। हिंदा ब्लॉगिंग व सोशल मीडिया पर दो दिन की राष्ट्रीय कार्यशाला और संगोष्ठी थी। मेरा विषय था सोशल मीडिया और राजनीति।  इस संगोष्ठी और वर्धा विश्वविद्यालय की चर्चा आगे की पोस्ट में। अभी बात राजनीति की।
नागपुर में संघ मुख्यालय परिसर में
लौटते समय सोचा कि नागपुर कई बार आकर नागपुर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मुख्यालय तक जाना नहीं हो पा रहा है। इसलिए स्टेशन से पहले पहुंच गए रेशमबाग के संघ मुख्यालय यानी केशवराव बलिराम हेडगेवार स्मृति परिसर। शानदार परिसर। बहुत बड़ी इमारत। और परिसर में हेडगेवार की चमकती मूर्ति। रात का समय था और मोबाइल से तस्वीरें लीं। इसलिए उसकी भव्यता का उतना अंदाजा लगाना मुश्किल होगा। परिसर में जो सभागार है उसका नाम महर्षि व्यास सभागार है। शाम के आठ बज रहे थे। महर्षि व्यास सभागार के अंदर से आवाजें आ रहीं थीं। झाककर देखा तो शाखा लगी हुई थी। तस्वीर उतारने का मोह नहीं छोड़ पाया। ठीक-ठाक संख्या थी।

महर्षि व्यास सभागार में चल रही सायं शाखा
नागपुर संसदीय क्षेत्र में नागपुर दक्षिण पश्चिम, नागपुर दक्षिण, नागपुर पूर्व, नागपुर मध्य, नागपुर पश्चिम, नागपुर उत्तर- कुल 6 विधानसभा आती हैं। देवेंद्र फडनवीस नागपुर दक्षिण पश्चिम से विधायक हैं और बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष हैं। नागपुर दक्षिण से विधायक दीनानाथ देवराव पडोले हैं जो कांग्रेस हैं। नागपुर पूर्व से विधायक कृष्णा खोपड़े हैं ये भी सीट बीजेपी के पास है। नागपुर मध्य से भी बीजेपी के ही विकास शांकरराव कुंभारे विधायक हैं। नागपुर पश्चिम पर भी भारतीय जनता पार्टी की कब्जा है विधायक हैं सुधाकर शामराव देशमुख और नागपुर उत्तर पर कांग्रेस पार्टी के विधायक हैं नितिन काशीनाथ राउत। (स्रोत- विकीपीडिया) लेकिन नागपुर संसदीय क्षेत्र की 6 में से 4 विधानसभा सीटें जीतने के बाद भी नागपुर ने सांसद कांग्रेस का चुना है। कांग्रेस के विलास मुत्तेमवार यहां से सांसद हैं। इसीलिए नागपुर सीट संघ के लिए छवि और प्रतिष्ठा का विषय है। इस बार चर्चा भी इस बात की है कि बीजेपी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन गडकरी यहां से लोकसभा का चुनाव लड़ेंगे। इस बात की संभावना भी पूरी है।

लेकिन, नागपुर से दिल्ली लौटते समय केरल एक्सप्रेस में मिले गजानन कोषटवार ने मेरी और देश में जाहिर इस आम धारणा को तोड़ने की कोशिश की। गजानन कोषटवार नागपुर के मनीष नगर में रहते हैं, बीजेपी समर्थक हैं। बीना में रिफाइनरी में काम करते हैं। कहते हैं पिछले कुछ समय से वोट भी कर रहे हैं। लेकिन, वो कह रहे हैं कि नितिन गडकरी चुनाव नहीं लड़ेंगे। वजह। उन्होंने जो वजह बताई वो चौंकाने वाली और अविश्वसनीय है। गजानन का कहना था कि वो बीजेपी के भले हैं लेकिन, जब वोट देना होगा तो बनिया जाति के विलास मुत्तेमवार को ही वोट देंगे। हल्की मुस्कुराहट के साथ उन्होंने कहा कि यही हकीकत है। गजानन यहां तक कह गए कि विलास मुत्तेमवार और नितिन गडकरी के बीच बहुत गहरे संबंध हैं। मुश्किल है कि नितिन गडकरी विलास मुत्तेमवार के सामने चुनाव मैदान में आएं। मतलब या मुत्तेमवार लड़े तो गडकरी बीजेपी से प्रत्याशी नहीं होंगे। और, अगर नितिन गडकरी चुनाव लड़ते हैं तो विलास मुत्तेमवार कांग्रेस से टिकट नहीं लेंगे। हालांकि, उनकी ये दलील मेरे गले नहीं उतरती। क्योंकि, वो लगे हाथ ये भी कहते हैं कि इस बार नरेंद्र मोदी की वजह से समीकरण बीजेपी के पक्ष में हैं। इसलिए नितिन गडकरी के चुनाव न लड़ने की बात तो मुझे समझ में नहीं आती और एक आदमी की राय पर कुछ तय मानना पूरी तरह से गलत होगा। लेकिन, जब योगेंद्र यादव इतने सर्वे गलत करने के बाद अपनी पार्टी #AAP को खुद सर्वे करके जिता देते हैं और उसका जमकर प्रचार-प्रसार होता है तो, मुझे लगता है कि मेरा तो इसमें कोई हित नहीं जुड़ा इसलिए इसे लिख रहा हूं। हो सकता है सही हो।