आमदार, खासदार, मंत्री तो मरेगा नहीं?

अभी ताजा रिपोर्ट आई है डॉक्टर रघुराम राजन की। नए तरीके से इस रिपोर्ट में राज्यो के आर्थिक हालात को समझा गया है। जब रघुराम राजन वित्त मंत्रालय के मुख्य आर्थिक सलाहकार थे तब सरकार ने इनको ये महत्वपूर्ण काम सौंपा था। 26 सितंबर को ये रिपोर्ट वित्त मंत्रालय को सौंप दी गई है। इसमें प्रति व्यक्ति उपभोग, अमीरी-गरीबी अनुपात और दूसरे सामाजिक-आर्थिक मानकों पर राज्यों की दशा दिशा कैसी है ये बताया गया है। चौंकाने वाली बात ये है कि इस रिपोर्ट में महाराष्ट्र तो Relatively Developed श्रेणी में है। लेकिन, गुजरात Less Developed श्रेणी में है। इसके राजनीतिक मायने भी देखे जा रहे हैं। क्योंकि, Least Developed राज्यों में उड़ीसा, बिहार के बाद सबसे खराब स्थिति मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की है। सरकार ने एक तीर से कई निशाने साधने की कोशिश की है। कमाल ये है कि नरेंद्र मोदी और बीजेपी गुजरात को Less Developed और मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ को Least Developed रखने से दुखी होंगे। लेकिन, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अतिप्रसन्न हैं कि उनका राज्य अतिपिछड़ा है। अब वहां की जनता सोचे जो इसीलिए नीतीश का गुणगान करने लगी थी कि लालू राज से अतिपिछड़े के ठप्पे को नीतीश राज में बदलाव का मौका मिला। लेकिन, नीतीश तो अतिपिछड़े कहे जाने से खुश हैं कि अब केंद्र से ज्यादा रकम मिलेगी।

दरअसल डॉक्टर रघुराम राजन की ये रिपोर्ट वित्त मंत्रालय को प्रस्ताव है कि 12वीं पंचवर्षीय योजना में राज्यों को धन इसी आधार पर मिले। हालांकि, अभी इस रिपोर्ट को पूरी तरह से माना जाएगा या टुकड़ों में ये तय होना बाकी है। सरकार इस पर फैसला करेगी। लेकिन, इस रिपोर्ट के आधार पर Relatively Developed श्रेणी वाले महाराष्ट्र के सबसे चमकते शहर मुंबई में चार साल रहा हूं। और मुंबई की मस्त मिजाजी है कि बुनियादी सुविधाओं की बात कम ही होती है। जबकि, सच्चाई यही है कि अभी भी बुनियादी सुविधाओं के मामले में मुंबई बहुत पीछे है। हां, यहां बड़ा पैसा है। माया है। इसलिए सब मस्त रहते हैं। लेकिन, मुंबई-पुणे एक्सप्रेस वे से पुणे तक जाकर आप भले ही महाराष्ट्र को Relatively Developed श्रेणी में रखने का साहस कर पाएं। लेकिन, अगर गलती से विदर्भ की ओर जाएं तो हकीकत समझ में आ जाती है। अभी फिर से महाराष्ट्र के इस आत्महत्या वाले इलाके की तरफ जाने का मौका मिला। नागपुर मस्त शहर है। यहां तक तो हवाई जहाज भी जाते हैं और राजधानी भी। लेकिन, हमें थोड़ा और आगे जाना था। वर्धा के महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय तक। बैंगलोर राजधानी से नागपुर तक पहुंचने के बाद यात्रा कार से होनी थी। डॉकटर रघुराम राजन के Relatively Developed श्रेणी वाले राज्य महाराष्ट्र के Least Developed क्षेत्र से गुजरा। नागपुर से वर्धा करीब सत्तर किलोमीटर है। इसी रास्ते पर आगे यवतमाल, नांदेड़ के भी तीर दिख रहे थे। मतलब आगे यही रास्ता उन जगहों पर भी जाता है। सत्तर किलोमीटर की दूरी हमने अनुमान लगाया अधिकतम डेढ़ घंटे। ड्राइवर ने कहा- सर दो घंटे लग जाएगा। नागपुर से दस पंद्रह किलोमीटर बाहर निकलते ही ड्राइवर की बात सही लगने लगी।

थोड़ा ही चलने पर एक वैगन आर दुर्घटनाग्रस्त मिली। ड्राइवर ने स्थानीय लहजे में पूछा। बताया कि 5 मिनट पहले ही दुर्घटना हुई है। फिर बड़े कड़वे बोला। पता नहीं क्यूं आमदार, खासदार, मंत्री कभी नहीं मरता। ये सुनने में बुरा लगा कि ड्राइवर विधायक, सांसद औऱ मंत्रियों के मरने की कामना कर रहा है। लेकिन, यही जनभावना है। क्यों वो ऐसा चाह रहा था इसकी वजह भी अगली लाइन में मिल गई। आगे पीछे पुलिस वाला गाड़ी रहता है तो वो क्यों मरेगा। लेकिन, हम लोगों के तो रोज मरने का खतरा रहता है। ये समाज के तंत्र से समाज के आम आदमी की चिढ़ थी। वही आम आदमी या महात्मा गांधी वाला लाइन में खड़ा आखिरी आदमी टाइप। महात्मा गांधी इसलिए भी ज्यादा याद आ रहे हैं कि मैं वर्धा ही जा रहा था। उनके नाम पर बने विश्वविद्यालय और वर्धा में ही वो सेवाग्राम आश्रम है जहां गांधी जी ने काफी समय बिताया था।

नागपुर से वर्धा और फिर आगे नांदेड़, यवतमाल जाने वाले इस रास्ते पर जबरदस्त यातायात है। लेकिन, सड़क दोहरी भी नहीं है। बस एक रास्ता जाने के लिए, एक आने के लिए। और, तेज रफ्तार में जब ये बड़े-बड़े ट्रक बगल से गुजरते हैं तो अहसास बस यही कि यमराज बस इस बार छोड़ गए। इसके अलावा सड़क पर इतने बढ़िया से बने गड्ढे मिलेंगे कि सड़क खोजने में गाड़ी कभी भी बगल के खेत में चली जाए। इन विशालकाय ट्रकों के अलावा वही हर राज्य में पाई जाने वाली राज्य परिवहन की बसें सूखी उल्टी के निशान के साथ तेजी से निकलती जा रहीं थीं। अब मेरी समझ में ये नहीं आता कि ये डॉक्टर रघुराम राजन की रिपोर्ट में महाराष्ट्र Relatively Developed कैसे हो गया। क्या सिर्फ मुंबई, नागपुर और पुणे पर ये रिपोर्ट बनी है।

नागपुर से वर्धा के कष्टप्रद रास्ते पर टोल बूथ
और ये आगे भी ऐसे ही Relatively Developed रहेगा क्योंकि, डॉक्टर रघुराम राजन की रिपोर्ट अगर पूरी तरह मान ली गई तो आगे यानी 12वीं पंचवर्षीय योजना में इस इलाके के लिए धन नहीं आएगा। क्योंकि, डॉक्टर राजन यही कह रहे हैं कि इसी आधार पर सबको फंड दो। आर्थिक मोर्चे पर सरकार के लिए संकटमोचक बने राजन की ये रिपोर्ट यूपीए-2 को राजनीतिक राहत भी दे रही है। भले राज्यों के विकास का गणित इससे पूरी तरह गड़बड़ा जाए। समझ में ही नहीं आता कि योजनाओं की प्राथमिकता कैसे तय होती है। जितना ट्रैफिक बड़ी-छोटी गाड़ियों का इस रास्ते पर है वो साफ दिखाता है कि यहां रकम लगाने की जरूरत है। और कोढ़ में खाज ये कि इस बेहद कष्टप्रद रास्ते पर चमकीले हाईवेज पर दिखने वाले टोलबूथ भी है। 27 रुपया एक तरफ का। दोनों तरफ का एक साथ 40 रुपये में। ये है भारत निर्माण।