बस ऐसे ही

जनता का अब कोई दबाव नहीं है। और, सरकार को अगले 5 साल तक कोई खतरा नहीं है। इसलिए साढ़े तीन चार साल तक तो सरकार कड़े फैसले ले सकती है। कड़े फैसले मतलब जनता को जो पसंद नहीं आते। जैसे आज रात 12 बजे से पेट्रोल 4 रुपए और डीजल 2 रुपए लीटर महंगा हो जाएगा। अब सरकार बहुमत में न होती। कभी भी चुनाव होने का खतरा होता तो, सरकार ये खतरा तो मोल न ही लेती। लेकिन, अभी सब ठीक है।



खैर, पेट्रोल-डीजल महंगा हुआ तो, हम टीवी चैनल वालों ने जनता के हित के लिए फ्लैश कर दिया कि आज आधी रात से पेट्रोल-डीजल महंगे हो जाएंगे। हम गाड़ी का वाइपर बदलवाने निकले थे। हमें पता चला तो, हमने भी सोचा चलो तेल भरवाते ही लौटते हैं। खैर, नजदीक के पेट्रोल पंप तक पहुंचे और तेजी से कार लगा दी। लेकिन, हम फंस चुके थे। आगे गाड़ियों की लंबी कतार थी और जब तक सोच पाते पीछे भी कारों की लंबी कतार लग चुकी थी। कोई कार वाला आगे निकलकर टैंक फुल न करा ले ये सोचकर हर कोई गाड़ी एक दूसरे से सटाए चल रहा था। एकदम मौका नहीं चूकना चाहता था इसलिए किसी की भी गाड़ी का इंजन बंद नहीं हुआ था। एक कार को तेल भराने में आधे से एक घंटे तो लग ही रहे थे। अब सोचिए एक टैंक में कितना तेल भरा होगा- 10-30 लीटर। एक कार वाले का हर लीटर पर भले ही 4 रुपया या 2 रुपया बच गया हो। देश का कितना रुपया फुंक गया होगा।



पेट्रोल पंप मालिक आकर असहाय भाव में बोले सुबह स्कूल जाने वाले बच्चों की गाड़ियों के लिए भी तेल नहीं होगा। आधी रात से पहले ही पंप ड्राई हो जाएगा। लेकिन, किसी को टैंक फुल कराने से रोकें तो, लड़ाई करें। ये सबसे ज्यादा कमाने वाले दिल्ली-नोएडा के लोगों का हाल था। अब कम से कम मैं तो दोबारा तेल के दाम बढ़ने की खबर सुनने के बाद तेल भराने नहीं जाऊंगा। हमारे साथी टीवी चैनल वाले भी पहुंच गए थे। सवाल पूछ रहे थे- क्या आपने सोचा था कि अचानक तेल के दाम बढ़ जाएंगे। पता नहीं किसी ने ये जवाब दिया कि नहीं- सोचा तो नहीं था। लेकिन, गलत किया ये लगभग पूर्ण बहुमत की सरकार है। बहुत से कड़े फैसले लेगी, तैयार रहिए।