कांग्रेस
हिंदू पार्टी हो जाएगी, ये कल्पना भी राजनीतिक तौर पर बेमानी लगती है। कांग्रेस के
ऊपर सबसे बड़ा आरोप ही यही है कि वो मुस्लिम तुष्टीकरण करती है। लेकिन, इस आरोप के
साथ ये तथ्य भी ध्यान में रखना जरूरी हो जाता है कि कांग्रेस दरअसल जिस गांधी नाम
की बुनियाद पर खड़ी है, उस गांधी का पूरा जीवन दर्शन ही राम की अराधना से जुड़ा
है। और अब वही गांधी फिर से कांग्रेस को बचाने की बुनियाद बनते दिख रहे हैं। राहुल
गांधी के अपने भाषण में कहे गए- “इन लोगों ने मारा उन्हें ... RSS
के लोगों ने गांधीजी को गोली मारी”।- पर फिर से मजबूती
से खड़े होना दरअसल उसी रणनीति को पुख्ता कर रहा है। इसके अलावा उत्तर प्रदेश में
जिस तेजी से राजनीतिक घटनाक्रम बदल रहा है, दरअसल उसमें कांग्रेस के लिए खालिस
हिंदू पार्टी की तरह का व्यवहार ही अकेला रास्ता है, जिससे 2012 और 2014 से आगे
कांग्रेस के लिए कुछ हासिल करने की उम्मीद है। देशभर में भले ही कांग्रेस को जमकर
मुसलमान मत मिल जाते हों लेकिन, सच्चाई ये भी है कि जहां भी राज्यों में मुसलमानों
को विकल्प मिला वो उस तरफ चले गए। इसीलिए फिर से मुसलमानों को राज्यों में जोड़ने
की गुंजाइश तभी बनेगी, जब कांग्रेस को इतने हिंदू मत मिलते दिखें, जिससे बीजेपी के
सामने कुछ टिकने की स्थिति बन सके।
कांग्रेस
की मुश्किल ये है कि सिर्फ उत्तर प्रदेश ही नहीं पूरे देश में कांग्रेस से
मुसलमानों का काफी हद तक मोहभंग हो गया। और इस मोहभंग की सबसे बड़ी वजह यही है कि
कांग्रेस को इतने हिंदू मत मुश्किल से मिलते दिख रहे हैं जिससे कुछ सीट जीतने की
स्थिति बने। यही वजह रही कि मुसलमानों ने कांग्रेस को छोड़कर दूसरे क्षेत्रीय दलों
को पकड़ लिया। उत्तर प्रदेश में मुलायम और मायावती के आगे कांग्रेस के पास
मुसलमानों में भरोसा जगाने के लिए कोई चेहरा ही नहीं है। मुलायम सिंह यादव और
मायावती मुसलमानों को मनाने के लिए जहां तक जा रहे हैं, वहां तक पहुंचना अभी के
हाल में कांग्रेस के लिए ज्यादा मुश्किल दिखता है। कांग्रेस से मुसलमानों के
जबरदस्त कटाव का ही असर था कि जम्मू कश्मीर से लेकर महाराष्ट्र, हरियाणा में कांग्रेस
गायब सी हो गई है। असम में सर्बानंद सोनोवाल और हिमंतविश्व शर्मा बड़े कारक रहे
लेकिन, सच्चाई ये भी है कि बदरुद्दीन अजमल ने मुसलमानों को कांग्रेस से बहुत दूर
कर दिया। यहां तक कि बिहार में लगातार बीजेपी के साथ नीतीश कुमार पर तो मुसलमान
भरोसा जमाए रहे। लेकिन, कांग्रेस को एकदम किनारे कर दिया। वही कांग्रेस जब लालू-नीतीश
के साथ दिखी तो उसके साथ चले गए। ये बड़ी सीधी सी वजहें हैं जिसकी वजह से कांग्रेस
को ये बात समझ में आ चुकी है कि उत्तर प्रदेश में मुसलमानों पर थोड़ा बहुत भी
भरोसा जमाना है, तो उसे पहले कुछ हिंदू मतों का भरोसा दिखाना होगा।
बेहद
कठिन जातीय समीकरण वाले उत्तर प्रदेश में पिछड़ों और दलितों में सेंध लगाने की हर
कोशिश नाकाम होने के बाद अब कांग्रेस ने सवर्णों, खासकर ब्राह्मणों पर ही पूरा
ध्यान दिया है। बीजेपी कांग्रेस की ब्राह्मणों को लुभाने की राजनीति पर ज्यादा कान
देने से इसलिए बच रही है कि उसे लगता है कि सवर्णों का स्वाभाविक रुझान बीजेपी की
तरफ है। बीजेपी नेता मानते हैं कि कांग्रेस अभी इस हाल में नहीं है कि सवर्ण उसकी
तरफ मुड़ जाए। लेकिन, कांग्रेस को यहीं उम्मीद दिख रही है। राजनीति से संन्यास
लेने की अवस्था में पहुंची शीला दीक्षित को फिर से मुख्यधारा की राजनीति में लाना इसी
रणनीति के तहत है। सवर्णों के साथ राममंदिर मुद्दे पर भावुक तौर पर जुड़े वर्ग को
लुभाने की कोशिश भी कांग्रेस करने की कोशिश कर रही है।
“इन लोगों ने मारा
उन्हें ... RSS के
लोगों ने गांधीजी को गोली मारी”। इस बयान पर पीछे हटने के बाद फिर से उच्चतम न्यायालय में राहुल
गांधी उस बयान पर मजबूती से खड़े रहना कांग्रेस की इस नई रणनीति का हिस्सा है।
इसीलिए संघ और बीजेपी ने भी कांग्रेस उपाध्यक्ष पर हमला करने में देर नहीं लगाई।
संघ के प्रचार प्रमुख मनमोहन वैद्य ने कहाकि अगर राहुल गांधी को यू टर्न लेना था
तो दो साल से वो ट्रायल से क्यों बच रहे है? क्या राहुल गांधी से सच से डर रहे हैं? कांग्रेस उपाध्यक्ष की ओर से अदालत में वरिष्ठ
वकील और कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल बहस कर रहे हैं। कपिल सिब्बल ने पत्रकारों से
कहाकि ये लड़ाई अदालत की नहीं है। इसी लड़ाई में ये फैसला होगा कि असली हिंदू कौन
है? हाल ही
में कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष बने राजबब्बर ने इसे और साफ किया है। राजबब्बर कह
रहे हैं कि राहुल गांधी ने बड़ा सवाल खड़ा किया है कि हिंदू कौन है? हे राम! कहने वाला या फिर हे
राम! कहने
वाले को मारने वाला। राहुल गांधी ये सवाल अनायास नहीं खड़ा कर रहे हैं। दरअसल
कांग्रेस के रणनीतिकारों का ये बड़ा दांव है। कांग्रेस को पता है कि बीजेपी अब
हिंदू पार्टी के ठप्पे पर जोर देने का खतरा कतई मोल नहीं लेने वाली। अगर ये सैंपल
टेस्टिंग सही साबित होती दिखती है, तो 2017 के पहले तक कांग्रेस खालिस हिंदू
पार्टी की तरह व्यवहार करती दिखने लगेगी। क्योंकि, उसे यही एक रास्ता उत्तर प्रदेश
में अपनी जड़ें जमाने की ओर ले जाता है।
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