Tuesday, July 29, 2014

कतार का कष्ट

नोएडा के सेक्टर 119 में रहता हूं। वहीं एक सोसाइटी के अंदर सुपर मार्केट है। मतलब काम के सारे सामान यहां मिल जाते हैं। दूध लेने के लिए सुबह सुपरमार्केट में गया। एक बिलिंग काउंटर ही काम कर रहा था। लंबी कतार हो गई थी। एक मैडम सीधे आकर हमसे आगे कतार में अनजान बनकर खड़ी हो गईं। हम लोगों ने उन्हें पीछे भेज दिया लेकिन उनके चेहरे पर भाव जरा भी गलती के अहसास के नहीं थे। क्योंकि गलती हुई नहीं थी। जानबूझकर की गई थी। ऐसा करने वालों को भी अपने लिए सब व्यवस्थित की उम्मीद होती है।

इसी सुपर मार्केट की एक दूसरी घटना। दफ्तर से लौटते हुए दूध लेकर जाना था। कतार में था। मेरे आगे जो सज्जन लगे थे उनका भुगतान होता। इससे पहले ही दो शरीर से बलिष्ठ नौजवानों में से एक ने अपना सामान काउंटर पर रख दिया। जल्दी से बिल बना दो। बहुत गुस्सा आने के बावजूद मैं चुप रहा। मेरे आगे वाले का भुगतान पूरा हुआ तो मैंने पूरी कड़ाई से उसकी ओर देखा और बोला पीछे आइए लाइन में। लेकिन, वो पूरी बेशर्मी से मुझे डराने का प्रयास करता रहा। और काउंटर पर खड़े लड़के से बोला जल्दी से कर दे, जाना है। फिर अमूल दूध के पैकेट को देखकर बोला। यू पिन्नी में क्या है दूध। खैर, मेरी कड़ाई से मेरे पीछे खड़ी महिला को भी बल मिला। उन्होंने कहाकि आप लाइन में आइए। मैंने अपना भुगतान किया, फिर पीछे की महिला का भी भुगतान कराया और फिर वहां से निकला। अब मुझे नहीं पता कि मेरे पीछे कतार में खड़े कितने लोगों ने उन्हें रोका होगा। यही सबसे बड़ी समस्या है। और कमाल ये कि कतार तोड़ने वाले उन लोगों को भी नोएडा में सब अच्छा-अच्छा और व्यवस्थित चाहिए होगा। पहली महिला होने का लाभ लेना चाहती थीं। दूसरे नौजवान अपने स्थानीय होने और बलिष्ठ होने के आधार पर कतार तोड़ देना चाहते थे। 

No comments:

Post a Comment

नरेंद्र मोदी का साक्षात्कार जो हो न सका

Harsh Vardhan Tripathi हर्ष वर्धन त्रिपाठी काशी से तीसरी बार सांसद बनने के लिए नामांकन पत्र दाखिल करते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2004-10 तक ...