मोदी के नए मंत्री और चुनावी रणनीति

आज के मंत्रिमंडल विस्तार से ये पूरी तरह साफ हो गया है कि भारतीय जनता पार्टी जिस तरह का जातिगत संतुलन कर रही है, उससे निपटना समाजवादी पार्टी और खासकर बहुजन समाज पार्टी के लिए आसान नहीं होगा। नरेंद्र मोदी और अमित शाह, सरकार और संगठन दोनों में ही इस तालमेल का विशेष ध्यान रख रहे हैं। इसीलिए 75 पार कर लेने के बाद भी कलराज मंत्रिमंडल में बने रहे। हालांकि, इसी बहाने नजमा भी बनी रही हैं। अनुप्रिया पटेल, कृष्णा राज और महेंद्र नाथ पांडेय का मंत्री बनना इसी संतलुन की कहानी बता रहा है। बीजेपी के बाहर के दो ही मंत्री हैं एक रामदास अठावले और दूसरी अनुप्रिया पटेल। अनुप्रिया को उनकी मां ही अपना दल की मानने को तैयार नहीं। मतलब वो भी भाजपा की ही समझिए अब। इसी संतुलन को आगे बढ़ता हुआ हम अमित शाह के संगठन विस्तार में देख सकेंगे। पूरी उम्मीद है कि उत्तर प्रदेश के पूर्व अध्यक्ष लक्ष्मीकांत बाजपेयी को राष्ट्रीय टीम में शामिल किया जाएगा। 27 जून के CNBC AWAAZ पर अखिलेश यादव की छवि सुधारने की मशक्कत पर बात करते हुए मैंने कहा था कि भाजपा इस बार कई तरह की रणनीति पर एक साथ काम कर रही है। दरअसल भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व को पता है कि भ्रष्टाचार कम से कम मायावाती या समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं के लिए कतई मुद्दा नहीं है। ये तथ्य भी जनता के बीच काम कर सकता है कि, अखिलेश यादव समाजवादी पार्टी की पारंपरिक गुंडा-बदमाश वाली छवि से निकलने की बड़ी कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, मेरा ये भी मानना है कि अखिलेश को इस तरह सेक्लीनचिट देना भी ठीक नहीं है।