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Thursday, April 06, 2017

सेंसेक्स 30000 पहुंचा, रफ्तार की वजहें भी जान लीजिए

बांबे स्टॉक एक्सचेंज की रामनवमी शुभकामना
शेयर बाजार में जश्न का माहौल है। माहौल कुछ वैसा ही है, जैसा नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने की उम्मीदों से था। नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री बने 3 साल होने जा रहे हैं। फिर अचानक ऐसा क्या हो गया कि शेयर बाजार में अच्छी तेजी देखने को मिल रही है। Sensex सेंसेक्स बुधवार को कारोबार में 30000 के पार चला गया। 5 राज्यों के विधानसभा चुनाव के नतीजे भी इसकी एक बड़ी वजह है। लेकिन, दूसरी कई वजहें हैं, जिस पर आपका ध्यान नहीं गया होगा।
1 जुलाई से लागू हो जाएगा जीएसटी
लम्बे समय से किन्तु-परन्तु के फेर में फंसा जीएसटी कानून अब 1 जुलाई से लागू होने जा रहा है। केंद्र सरकार ने इसे लागू कराने के लिए जरूरी चारों बिलों को लोकसभा से पास करा लिया है। राजस्व सचिव हंसमुख अधिया का साफ कहना है कि कारोबारियों को जीएसटी के लिए तैयार होने का बहुत वक्त दिया गया है। सरकार इसे जुलाई से लागू करने जा रही है। कानून तैयार है और नियम सबको बता दिया गया है। तकनीकी बुनियादी ढांचा भी तैयार है।
कारोबार करना आसान होने की उम्मीद
जीएसटी लागू होने के बाद देश में कारोबारियों के लिए राहत की उम्मीद की जा रही है। खासकर कारोबारियों को तमाम तरह के टैक्स की वजह से अलग-अलग विभागों के चक्कर काटने से मुक्ति मिल सकती है। माना जा रहा है कि इससे देश में कारोबार करना आसान होगा।
बजट प्रक्रिया का समय से पहले पूरा होना
इस साल नरेंद्र मोदी की सरकार ने बजट करीब एक महीने पहले पेश कर दिया। चुनाव के समय बजट पेश करने को लेकर सरकार की जमकर आलोचना भी हुई। लेकिन, अब उसके सार्थक परिणाम दिख रहे हैं। सरकार ने एक अप्रैल से पहले ही बजट प्रावधान की प्रक्रिया पूरी कर ली है। सभी विभागों और मंत्रालयों का बजट अलॉट कर दिया है। अब सभी विभागों के पास बजट खर्च करने के लिए पूरे एक साल का समय होगा। साथ ही राज्यों को भी अपना बजट बनाने में आसानी होगी।
5 महीने के ऊंचे स्तर पर मैन्युफैक्चरिंग
मार्च महीने में देश की फैक्ट्रियों में मैन्युफैक्चरिंग गतिविधि 5 महीने में सबसे ज्यादा रही है। मार्च महीने में नए ऑर्डर और बेहतर मांग की वजह से मैन्युफैक्चरिंग तेजी से बढ़ी है। उत्पादन तेजी से बढ़ने की उम्मीद दिख रही है। साल के तीनों शुरुआती महीनों जनवरी, फरवरी और मार्च में मैन्युफैक्चरिंग में लगातार तेजी देखने को मिली है।
सर्विस क्षेत्र में भी आई तेजी
लगातार दूसरे महीने सर्विस सेक्टर में तेजी देखने को मिली है। नए ऑर्डर जमकर मिले हैं। Pollyanna De Lima, economist कहते हैं कि भारत के निजी क्षेत्र के कारोबार में मार्च महीने में तेज उछाल देखने को मिल रही है। मांग और उत्पादन दोनों ही बढ़ा है। विमुद्रीकरण से आई कमजोरी से बहुत तेज वापसी हुई है। रोजगार के नए मौके बन रहे हैं।
सरकारी खजाने में बढ़ी रकम
इस साल सरकार ने जबर्दस्त कर वसूली की है। सरकार की कर वसूली 18% ज्यादा रही है। ये पिछले 6 सालों में सबसे ज्यादा है। सरकार के खजाने में टैक्स के जरिए 17.10 लाख करोड़ रुपये आए हैं। प्रत्यक्ष कर 14.2% और अप्रत्त्यक्ष कर 22% बढ़ा है। पिछले साल के मुकाबले इस साल इनकम टैक्स ग्रोथ 21% रही है।
रिकॉर्ड अनाज उत्पादन
इस साल रिकॉर्ड अनाज का उत्पादन होने का अनुमान है। गेहूं, दाल और चावल की पैदावार इस साल अब तक सबसे ज्यादा होती दिख रही है। 2016-17 में कुल 27.20 करोड़ टन अनाज उत्पादन का अनुमान लगाया जा रहा है। पिछले साल से ये 8% ज्यादा है। पिछले साल 25.16 करोड़ टन अनाज की पैदावार हुई थी। इससे पहले 2013-14 में रिकॉर्ड 26.50 करोड़ टन अनाज की पैदावार हुई थी।
5 में से 4 राज्य में बीजेपी की सरकार

हाल में हुए 5 राज्यों के विधानसभा चुनावों में बीजेपी को जबर्दस्त सफलता मिली है। 5 में 4 राज्यों में बीजेपी सरकार बनाने में कामयाब रही है। उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में बीजेपी को पूर्ण बहुमत मिला है। उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा राज्य है लेकिन, लम्बे समय से उत्तर प्रदेश का देश की जीडीपी में योगदान बहुत कम रहा है। उम्मीद की जा रही है कि केंद्र और राज्य में बीजेपी की ही सरकार होने से उत्तर प्रदेश केंद्र की नीतियों को आगे बढ़ाने का काम करेगा। 

Wednesday, September 07, 2016

सरपट भागते सेंसेक्स की बुनियाद

भारतीय शेयर बाजार को जैसे अचानक कोई संजीवनी सी मिल गई हो। इस साल अब तक सेंसेक्स 10.5% से ज्यादा चढ़ चुका है। 29000 को छूने के बाद सेंसेक्स थोड़ा सुस्ताता नजर आ रहा है। सेंसेक्स को 29000 छूने में करीब डेढ़ साल लग गए। दरअसल ये पिछले डेढ़ साल सरकार के लिए भी ढेर सारी मुश्किलों वाले रहे हैं। लेकिन, अब सरकार भी मजबूतत नजर आ रही है और शेयर बाजार में निवेशकों का भरोसा भी पक्का नजर आ रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अब अर्थव्यवस्था को लेकर पूरी तरह से आश्वस्त नजर आ रहे हैं। इसकी ढेर सारी वजहें हैं और शेयर बाजार की मजबूती में दिल्ली से लेकर वॉशिंगटन तक की महत्वपूर्ण हिस्सेदारी है। मौसम से लेकर महंगाई ने बाजार को मारक रफ्तार दे दी है। उन ढेर सारी वजहों में से सबसे अहम 5 वजहें ये रहीं।

GST कानून बनने की ओर
भारत में कर सुधारों का सबसे बड़ा कानून बनने जा रहा है। मोदी सरकार के दो साल होने के बाद संसद ने GST बिल को पास कर दिया। संसद से मंजूर होने के बाद तेजी से GST कानून बनने की तरफ बढ़ रहा है। 17 राज्यों की विधानसभा ने GST को मंजूर कर लिया है। जिस तेजी से राज्यों ने इसे मंजूर किया है। उससे सरकार के 1 अप्रैल 2017 से इसे कानून बनाने की राह आसान होती दिख रही है। सरकार ने GST काउंसिल की मदद के लिए GST सचिवालय बनाने पर चर्चा शुरू कर दी है। हालांकि, अभी भी कानून बनाने के लिए इसे लंबा सफर तय करना है।

काबू में आती महंगाई
इस साल रिकॉर्ड दाल की पैदावार का अनुमान है। अच्छे मॉनसून की वजह से कुल अनाज भी बेहतर होने का अनुमान है। इसकी वजह से भी महंगाई काबू में आती दिख रही है। इसका असर भी दिखने लगा है। 140 रुपये किलो बिक रही अरहर दाल 100 रुपये किलो के आसपास बिकने लगी है। हालांकि, महंगाई दर 6% प्रतिशत के ऊपर है जो, रिजर्व बैंक के 5% के लक्ष्य से ऊपर है। लेकिन, बेहतर मॉनसून से कम से कम खाने-पीने के सामानों की महंगाई और कम होने की उम्मीद दिख रही है। ग्रामीण क्षेत्र में अच्छी मांग होने से कंपनियों – खासकर कंज्यूमर ड्यूरेबल, मशीनरी- की बिक्री बढ़ने की उम्मीद है। इससे कंपनियों की बैलेंसशीट बेहतर होने के आसार हैं।  

उर्जित पटेल से मिली ऊर्जा
भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर रघुराम राजन को हटाने को लेकर दुनिया भर की एजेंसियां और आर्थिक विश्लेषक भारतीय मौद्रिक नीति को लेकर आशंका में थे। लेकिन, उर्जित पटेल का रिजर्व बैंक का गवर्नर बनना सभी आशंकाओं को खारिज करता है। रिजर्व बैंक गवर्नर उर्जित पटेल का अभी तक का रिकॉर्ड आश्वस्त करता है कि भारत की मौद्रिक नीति बदलने वाली नहीं हैं। साथ ही ये भी पटेल और मोदी सरकार के बीच विवाद भी नहीं होने वाला। शेयर बाजार का नए गवर्नर में भरोसा इसी बात से समझा जा सकता है कि उदारीकरण के बाद शेयर बाजार ने रघुराम राजन के बाद अब उर्जित पटेल का भी स्वागत इतने शानदार तरीके से किया है। 4 सितंबर को सेंसेक्स 1.6% चढ़ा है।

मैन्युफैक्चरिंग में जबर्दस्त तेजी
मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र में जबर्दस्त तेजी देखने को मिल रही है। प्रधानमंत्री क मेक इन इंडिया का असर साफ नजर आ रहा है। ढेर सारी कंपनियां जो अभी तक असेंबलिंग करती थीं। अब भारत में ही मैन्युफैक्चरिंग कर रही है। मैन्युफैक्चरिंग परचेजिंग मैनेजर इंडेक्स 13 महीने के सबसे ऊंचे स्तर पर है। मैन्युफैक्चरिंग की जीडीपी में हिस्सेदारी 25% है।

अमेरिका से मिले संकेत
अमेरिकी रिजर्व बैंक इस महीने के आखिर में ब्याज दरें नहीं बढ़ाएगा। रोजगार के ताजा आंकड़े आने के बाद ज्यादातर विश्लेषकों का ये मानना है। इसकी वजह से दुनिया भर के निवेशक विकासशील बाजारों में निवेश करने को लेकर उत्साहित हैं और भारत उसमें सबसे ऊपर है।

Monday, November 18, 2013

21000 पर फिसलता बाजार और यूपीए की सरकार




एक नवंबर को दीपावली की शुभकामनाएं देने के बहाने वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने पत्रकार वार्ता बुलाई। पत्रकार वार्ता में दीपावली की शुभकामना के बहाने वित्त मंत्री देश को ये बताने आए थे कि देश की अर्थव्यवस्था के हालात काफी बेहतर हुए हैं। काफी हद तक वित्त मंत्री पी चिदंबरम की बात सही भी थे। पुख्ता आंकड़े थे उनके पास अर्थव्यवस्था की हालत सुधरने की बात साबित करने के लिए। चालू खाते का घाटा काबू में आता दिख रहा है। देश की अर्थव्यवस्था जिन अहम उद्योंगों पर टिकी हुई है उस कोर सेक्टर की ग्रोथ बेहतर हुई है। निवेशकों का भरोसा बना हुआ है। मतलब विदेशी निवेशक एफआईआई और एफडीआई दोनों ही तरीकों से भारत में निवेश कर रहे हैं। अप्रैल से अगस्त तक एफडीआई यानी प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के जरिए 13 बिलियन डॉलर से ज्यादा देश में आ चुका है। एफआईआई के जरिए भारतीय शेयर बाजार में अच्छी खासी रकम आ चुकी है। जनवरी से अक्टूबर महीने तक एफआईआई यानी विदेशी संस्थागत निवेशकों ने भारतीय बाजार में नब्बे हजार करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम लगाई है। सिर्फ सितंबर और अक्टूबर महीने की बात करें तो सितंबर में तेरह हजार करोड़ रुपये और अक्टूबर में साढ़े पंद्रह हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का विदेशी निवेश भारतीय शेयर बाजार में आया है। विदेशी निवेश की इस ताकत ने ही सेंसेक्स को एक बार फिर से तीन साल के बाद इक्कीस हजार के ऊपर पहुंचा दिया था। इसके अलावा भारत सरकार की एक और बड़ी चुनौती भी काफी हद तक काबू में दिख रही है। चालू खाते का घाटा इस साल 60 बिलियन डॉलर रहने की उम्मीद वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने जताई है। पिछले साल चालू खाते का घाटा 88 बिलियन डॉलर था। इसके अलावा वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने ये भी बताया कि साढ़े तीन लाख करोड़ से ज्यादा के प्रोजेक्ट की बाधाएँ दूर की जा चुकी हैं।

शुभ दीपावली बोलने आए वित्त मंत्री हालांकि, किसी भी आर्थिक अशुभ की खबर पर चर्चा नहीं करना चाहते थे लेकिन, सारे मजबूत आंकड़ों को पेश करते उनके मुंह से एक जरूरी बात निकली जो समझनी बेहद जरूरी है। वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने मुस्कुराते हुए कहा कि अर्थव्यवस्था के हालात बेहतर हुए हैं और आगे बेहतर ही होंगे। लेकिन, उन्होंने निवेशकों को शेयर बाजार में ज्यादा उत्साह में निवेश करने से बचने की सलाह दी। इस सलाह के मायने समझना जरूरी है। वित्त मंत्री ने अपनी आगे की जो प्राथमिकताएं गिनाईं वो इस सलाह की वजह साफ कर देती हैं। चिदंबरम साहब ने कहा कि रुपया स्थिर हुआ है लेकिन, उसे और स्थिर करना, शेयर बाजार में स्थिरता और महंगाई घटाना प्राथमिकता होगी। उन्होंने जोड़ा कि ये प्राथमिकताएं पूरी हुईं तो सरकार और फैसले ले सकेगी। अब ये समझने की कोशिश करते हैं कि आखिर इन प्राथमिकताओं के पूरा होने और फैसले लेने की बात चिदंबरम साहब को क्यों कहनी पड़ी। दरअसल इन्हीं प्राथमिकताओं में ही सारी बात छिपी हुई है। पिछले एक महीने से अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के स्थिर भाव और डॉलर के मुकाबले रुपये के करीब 62 के आसपास के स्थिर भाव से देश में पेट्रोल की कीमतें तेल मार्केटिंग कंपनियां महीने भर में पांच रुपये लीटर से ज्यादा सस्ता कर चुकी हैं। लेकिन, ये बात कब तक बनी रहेगी ये अंदाजा लगाना मुश्किल है। क्योंकि, अब सर्दियां शुरू हो चुकी हैं। और अमेरिका, यूरोप में गैसोलीन की खपत तेजी से बढ़ जाएगी और उस वजह से कच्चे तेल की मांग भी। अकसर कई सालों से ये भी ट्रेंड रहा है कि दीपावली के ठीक पहले के दो तीन महीने एफआईआई यानी विदेशी निवेशक जमकर रकम लगाते हैं और शेयर बाजार के अहम सूचकांक सेंसेक्स को इक्कीस हजार के जादुई आंकड़े तक पहुंचा देते हैं और भारतीय रिटेल निवेशकों में ये भरोसा जग जाता है कि फिर से बाजार 2008 के पहले वाला बाजार हो गया है वो आते हैं निवेश करते हैं और फंस जाते हैं। क्योंकि, जब वो अपनी गाढ़ी बचत की कमाई शेयर बाजार में लगा रहे होते हैं तो धीरे-धीरे कब एफआईआई अपने निवेश पर काम भर का मुनाफा कमाकर निकल जाते हैं पता ही नहीं लगता। दीपावली पर रोज के पेट्रोल की कम हुई महंगाई राहत देती है लेकिन, दूसरी महंगाई अभी भी भारतीयों को जमकर परेशान कर रही है। इसीलिए वित्त मंत्री की आगे की प्राथमिकता में महंगाई को काबू में करना सबसे आगे हैं।

बीती मॉनिटरी पॉलिसी का असर दिखना शुरू हो चुका है। रघुराम राजन के रेपो रेट बढ़ाने के असर से देश के सबसे बड़े बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया और देश के सबसे बड़े होम लोन देने वाले बैंक एचडीएफसी ने करीब दशमलव दो प्रतिशत बेस रेट बढ़ाकर उसे दस प्रतिशत कर दिया है। मतलब बैंकिंग के नेताजी लोग इशारा दे चुके हैं पीछे-पीछे छोटे-बड़े बैंक भी यही करेंगे और महीने की तय तारीख पर किस दिन से आपकी बढ़ी ईएमआई कटेगी इसका बस इंतजार भर करिए। ये महंगाई तो महीने में एक दिन मारेगी। लेकिन, हर रोज प्याज, टमाटर और आलू का बढ़ा भाव आपके खाने का स्वाद पहले से ही कड़वा कर रहा है।
और एक शेयर बाजार से दीपावली की मुहूर्त ट्रेडिंग के दिन अच्छी खबर आई जब छे साल बाद सेंसेक्स ने इक्कीस हजार के ऊपर रिकॉर्ड स्तर पर बंद होने में कामयाबी पाई। 8 जनवरी 2008 वो तारीख है जिस दिन सेंसेक्स ने 21000 के जादुई आंकड़े को पार किया था। हालांकि, उस दिन भी सेंसेक्स बंद हुआ तो इक्कीस हजार के आंकड़े को बरकरार रखने में कामयाब नहीं हो पाया। और 5 नवंबर 2010 को पहली बार सेंसेक्स इक्कीस हजार के जादुई आंकड़े के ऊपर बंद होने में कामयाब हो पाया। लेकिन, उस तारीख से अगले तीन सालों तक सेंसेक्स 21000 के आंकड़े के ऊपर बंद नहीं हो सका। 30 अक्टूबर 2013 को सेंसेक्स 21000 के ऊपर बंद हुआ। और इक्कीस हजार का ये जादुई आंकड़ा इस दीपावली की मुहूर्त ट्रेडिंग के दिन सारे पुराने रिकॉर्ड ध्वस्त करने में कामयाब रहा और सेंसेक्स 21,239 अंकों की रिकॉर्ड ऊंचाई पर बंद होने में कामयाब रहा। जाहिर शेयर बाजार, सरकार और निवेशकों के लिए ये बड़ी खुशी की खबर है। लेकिन, फिर से वो तारीख याद करें जिस दिन सेंसेक्स इक्कीस हजार के पार पहुंचा था तो सारी खुशी हवा हो जाती है। क्योंकि, करीब छे साल बाद भी शेयर बाजार उसी जगह खड़ा है यानी इक्कीस हजार पर। जबकि, इन छे सालों में महंगाई करीब सत्तर प्रतिशत बढ़ी है। इसका सीधा सा मतलब हुआ कि जो भी शेयर बाजार में बना हुआ है या ऐसे उछाल वाले मौकों पर शेयर बाजार में कूदता है वो पूरी तरह से घाटे में है। मतलब साफ है सेंसेक्स का इक्कीस हजार पर होना भ्रम है। मनमोहिनी अर्थव्यवस्था मनमोहन सिंह के ही काबू में नहीं दिख रही है। सरकार के सुधार के फैसलों पर विदेशी निवेशक यकीन करने करने को तैयार नहीं हैं। वॉलमार्ट की कोई दुकान दस लाख से ज्यादा की आबादी वाले शहरों को तो छोड़िए दिल्ली मुंबई के बाजार में भी फिलहाल नहीं दिखने वाली। और सबसे ज्यादा हैरान करने वाली बात ये है कि शेयर बाजार की इस तेजी के पीछे एक बड़ी वजह ये भरोसा माना जा रहा है कि नरेंद्र मोदी की अगुवाई में एनडीए की सरकार आने वाली है। यानी सरकार के फैसलों का कम ही योगदान शेयर बाजार की तेजी में है। इसलिए वित्त मंत्री पी चिदंबरम की सलाह मैं दोहराना चाहूंगा कि रिटेल निवेशक इस समय शेयर बाजार में ज्यादा उत्साह दिखाने से बचें। बाजार में निवेश के मौके अभी फिर आएंगे। 21000 के बाजार और यूपीए की सरकार के रिश्ते अभी बने हुए हैं। दीपावली के तुरंत बाद सेंसेक्स ने अपनी सारी कमाई खो दी है। सेंसेक्स लगातार संघर्ष कर रहा है 21000 पर बने रहने के लिए।

जिम में रामधुन, जन्माष्टमी प्रभाव

  सुप्रभात राम राम भारत अद्भुत है और हम भारतीय भी आमतौर पर सुबह की सैर ही मुझे रुचती है, लेकिन बीच-बीच में जिम में भी जाता हूं। जिम में ट्र...