जापानी चाहते हैं भारतीय शिक्षा

जापानी अपने बच्चों को भारतीय स्कूलों में पढ़ाना चाहते हैं। दरअसल जापान को लग रहा है कि एशिया में वो चीन और भारत से पिछड़ रहा है और उनके स्कूल आगे की लड़ाई के लिए बच्चों को तैयार नहीं कर पा रहे हैं। अब उनको लगता है कि भारतीय पढ़ाई से वो चीन और भारत के बच्चों को कुछ पकड़ पाएंगे।

जापानी मानते हैं कि भारत एजुकेशन के मामले में दुनिया का उभरता हुआ सुपरपावर है। एक जमाने में इंटरनेशनल टेस्ट में आगे रहने वाल जापानी जब पिछड़ने लगे तो, उन्हें भारतीय स्कूलिंग ही सहारा नजर आ रही है। जापान की किसी भी अच्छी किताब की दुकान में आसानी से "Extreme Indian Arithmetic Drills" और "The Unknown Secrets of the Indians" जैसे शीर्षक वाली किताबें भरी पड़ी मिल जाएंगी।

जापान के अखबारों में भारतीय बच्चों की जबरदस्त याददाश्त के किस्से खूब छप रहे हैं। अखबारों के मुताबिक, भारतीय बच्चे गुणा यानी मल्टीपिलकेशन के मामले में जापान के स्टैंडर्ड से नौ गुना ज्यादा तेज हैं। गणित के अलावा अंग्रेजी में भी उस्ताद बनने के लिए जापानी अपने बच्चों को भारतीय स्कूलों में पढ़ाना चाहते हैं। योग और ध्यान भी इन स्कूलों की दिनचर्या की हिस्सा है।

जापान में जो भी इंडियन इंटरनेशल स्कूल हैं। उसमें जापानी परिवारों से बहुत ज्यादा बच्चे पढ़ने के लिए आ रहे हैं। इन इंडियन इंटरनेशनल स्कूल्स में ज्यादातर टेक्स्ट बुक (किताबें) भारतीय स्कूलिंग सिस्टम के मुताबिक ही होती हैं। पढ़ाने के लिए शिक्षक भी भारत या दूसरे दक्षिण एशियाई देशों से ही हैं।

चौंकाने वाली एक बात तो ये भी है कि जापान में एक बड़े भारतीय किंडरगार्टेन स्कूल लिटिल एंजल ने भारत के नक्शे को हरे और केसरिया रंग में रंग रखा है। इस स्कूल में 45 में से एक ही बच्चा भारतीय है। जापान टाइम्स, न्यूयॉर्क टाइम्स में ऐसी खबरें सुर्खियां बनी हुई हैं। ऐसी ही एक खबर के मुताबिक, एक जापानी ईको किकुटाके खुश हैं कि उनका पांच साल का बच्चा भारतीय स्कूल में पढ़कर अपने आसपास के दूसरे जापानी बच्चों से ज्यादा कबिल है। न्यूयॉर्क टाइम्स में छपी ऐसी ही खबर पर एक टिप्पणी है- Can American schools learn anything from schools in India? है ना चौंकाने वाली खबर।