#Mumbai में कल यह साहब मुझे बीकेसी से जुहू ले जाने के लिए आए। उबर से टैक्सी बुक की थी। चमचमाती कार, अभी तक सीट की पन्नी भी नहीं उतरी थी। उन्होंने बताया कि, कवर लगवा लेंगे, तब उतारेंगे। मैंने कहा- लगवा लो भाई, गर्मी है और सीट पर पन्नी से पृष्ठ भाग पसीने से तरबतर हो रहा है। यह दूसरी गाड़ी इन साहब ने खरीदी है। अपने पिता की मृत्यु के पश्चात एक सहकारी बैंक में अनुकंपा नियुक्ति से क्लर्क बने। कहते हैं, उतने से काम नहीं चलता, इसलिए टैक्सी भी चलाते हैं। यह सब सहज भाव में बताते जा रहे थे, रंचमात्र भी तनाव नहीं। जब छुट्टी होती है तो चलाते हैं और उनके ऑफिस में भी लोग जानते हैं तो उनकी टैक्सी मँगाते हैं। एकदम मस्त दिख रहे थे। बढ़िया चश्मा, टी-शर्ट में जम रहे थे। यही मुम्बईकर स्पिरिट है। मुम्बई मायानगरी है। अब माया के चक्कर में हर कोई फँसा है, लेकिन मायानगरी में रहकर भी मस्त एकदम मस्त रहने का है, विनायक साहब ने समझाया। #MumbaiDiaries
देश की दशा-दिशा को समझाने वाला हिंदी ब्लॉग। जवान देश के लोगों के भारत और इंडिया से तालमेल बिठाने की कोशिश पर मेरे निजी विचार
Showing posts with label मुम्बई. Show all posts
Showing posts with label मुम्बई. Show all posts
Monday, May 05, 2025
Monday, June 26, 2017
नौकरी में भागते रहने का सुख !
![]() |
| मेरी पहली नौकरी प्रयाग महाकुम्भ में वेबदुनिया के साथ |
हिन्दुस्तान
इतनी विविधता वाला देश है कि यहां आप एक छोटी सी 2-4 दिन की यात्रा में एक पर्यटक
की तरह कहीं घूम-टहलकर तो आ जाते हैं। अपने फेसबुक पन्ने के लिए कुछ अच्छी
तस्वीरें जुटा लेते हैं। लेकिन, उस जगह से जुड़ाव बहुत कम हो पाता है। हिन्दुस्तान
को समझने, पक्का हिन्दुस्तानी बनने के लिए जरूरी है कि हर कोई, हर किसी की भावना
को समझे। कानपुर, मुम्बई और देहरादून ने मुझे ये समझने में मदद की। मुम्बई मुझे
बहुत परेशान करता था। यहां तक कि 4 साल रहने के बाद लगभग विद्रोही अन्दाज में
मैंने मुम्बई छोड़ा था। लेकिन, ये भी सच है कि उन 4 सालों में मिली, सहेजी अच्छी
यादों की वजह से आज भी मुम्बई जाने का मन होता है। यही हाल देहरादून और कानपुर को
लेकर भी है। इस लिहाज से ज्यादा जगहों पर रहना नहीं हो सका। इसीलिए नए पत्रकारों
को मेरी ये सलाह है कि पढ़ाई पूरी होते ही पहला मौका मिलते ही बैगपैक करके अपने
शहर, अपनी राजधानी और देश की राजधानी से जितना दूर जा सकते हैं, चले जाइए। इससे
देश के और नजदीक पहुंचेंगे। लिखने, पढ़ने, समाज को समझने के लिहाज से अद्भुत, सकारात्मक बदलाव होगा।
कम से कम, जीवनसाथी पक्का कर लेने और बच्चों के
जिन्दगी में आने तक तो ये प्रक्रिया जितनी तेजी से पूरा कर सकते हों, तो करिए। सच
बता रहा हूं, उस भगान लेने के दौरान के अनुभव जिन्दगी में कमाल की समझ, मिठास
विकसित करते हैं। और पत्रकार के लिए तो ये जरूरी है कि वो देश के हर हिस्से के
लोगों की समझ को थोड़ा बहुत तो समझ सके। वरना अपने शहर, अपनी राजधानी और देश की
राजधानी के लिहाज से पूरी समझ बनाएगा। फिर मुश्किल आजीवन रहेगी। दूसरे काम करने
वालों के लिए भी ये बहुत सुखद अनुभव देने वाला हो सकता है। लेकिन, पत्रकार के लिए
ये सबसे जरूरी सबक के जैसा है। ये किताबी ज्ञान तो है नहीं, अपने निजी अनुभव से
सीखा है, इसलिए सकारात्मक परिणाम का दावा भी पक्का है।
Monday, June 19, 2017
मुम्बई की बारिश और पानी की कमी
टेलीविजन
के जरिए मुम्बई को देखते लोगों को लग रहा होगा कि मुम्बई पूरा बारिश में भीगा/डूबा हुआ है। लेकिन,
ऐसा है नहीं। बारिश हो रही है, लगभग रोज ही। लेकिन, ऐसी भी झमाझम वाली नहीं हो रही
है। हां, इतनी बारिश जरूर हो रही है कि मुम्बई के लिए रेल या सड़क, किसी भी रास्ते
से जाते चारों तरफ नदियां, जलाशय लबालब भरे मिलेंगे। इतना पानी बरस चुका है। प्रकृति
ने साल भर के लिए पानी का इन्तज़ाम कर दिया है। इसे सम्भालने की ज़िम्मेदारी
तुम्हारी है मुम्बईकरों। लबालब भरे पानी के समय जल संरक्षण की सोचना/करना चाहिए।
वरना मार्च आते फिर पानी पानी चिल्लाओगे। ये मसला कितना गम्भीर है, इसका अन्दाजा इससे लगाकि 3 दिन ठाणे में रहते 2 दिन पानी समय से नहीं आया।
Sunday, June 18, 2017
समन्दर किनारे की ताजगी और गन्दगी
वर्सोवा
में सफ़ाई का कमाल देखने चला गया। समन्दर किनारे तो अच्छा ही लगता है। लेकिन जो
वर्सोवा बीच सफ़ाई की मिसाल बताया जा रहा है,
उसकी ये तस्वीरें दिखीं। मन दुखी हो गया। पढ़ा था
कि किसी एक व्यक्ति की कोशिश से वर्सोवा बीच गजब का साफ हो गया है। लेकिन, वो लगता
है कि मामला अस्थाई टाइप का ही था। साफ समन्दर किनारे कुछ पल भी बिताना ताजगी का
अहसास देता है। ऐसी गन्दगी में ताजगी का अहसास भी गन्दा हो जाता है।
Subscribe to:
Posts (Atom)
जिम में रामधुन, जन्माष्टमी प्रभाव
सुप्रभात राम राम भारत अद्भुत है और हम भारतीय भी आमतौर पर सुबह की सैर ही मुझे रुचती है, लेकिन बीच-बीच में जिम में भी जाता हूं। जिम में ट्र...
-
हमारे यहां बेटी-दामाद का पैर छुआ जाता है। और, उसके मुझे दुष्परिणाम ज्यादा दिख रहे थे। मुझे लगा था कि मैं बेहद परंपरागत ब्राह्मण परिवार से ह...
-
उत्तर प्रदेश की जनता को कर्कश आवाज में मुलायम के जंगलराज के खिलाफ चीखकर मायावती ने ठग लिया है। जिन दलितों के दबे होने को लेकर वो सत्ता में आ...
-
आप लोगों में से कितने लोगों के यहां बेटियों का पैर छुआ जाता है। यानी, मां-बाप अपनी बेटी से पैर छुआते नहीं हैं। बल्कि, खुद उनका पैर छूते हैं...


