Sunday, June 18, 2017

समन्दर किनारे की ताजगी और गन्दगी

वर्सोवा में सफ़ाई का कमाल देखने चला गया। समन्दर किनारे तो अच्छा ही लगता है। लेकिन जो वर्सोवा बीच सफ़ाई की मिसाल बताया जा रहा है, उसकी ये तस्वीरें दिखीं। मन दुखी हो गया। पढ़ा था कि किसी एक व्यक्ति की कोशिश से वर्सोवा बीच गजब का साफ हो गया है। लेकिन, वो लगता है कि मामला अस्थाई टाइप का ही था। साफ समन्दर किनारे कुछ पल भी बिताना ताजगी का अहसास देता है। ऐसी गन्दगी में ताजगी का अहसास भी गन्दा हो जाता है।

No comments:

Post a Comment

पिताजी कहे - घर के बाहर से बात करके चले जाने वाले दोस्त नहीं हो सकते

हर्ष वर्धन त्रिपाठी पिताजी का घर - परिवार - गांव - समाज से अद्भुत लगाव रहा। लगाव ऐसा रहता था कि , लगकर रिश्ता निभाते थे। हमें...