Saturday, November 12, 2022

गुजरात में इतना स्पष्ट जनादेश दो दशक बाद आ रहा है

हर्ष वर्धन त्रिपाठी Harsh Vardhan Tripathi



मोरबी जैसी बड़ी दुर्घटना के बाद भी अगर गुजरात विधानसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी पर लोगों का भरोसा दिख रहा है तो इसे अच्छे से समझना जरूरी है। वैसे, ऐतिहासिक तौर पर मेले में भगदड़, पुल टूटने या ऐसी किसी दुर्घटना से भारत में चुनावों का रुख परिवर्तन नहीं होता रहा है। इसके अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री के तौर पर गुजरातियों का भरोसा जिस तरह से जीता है, उसे स्वतंत्र भारत के इतिहास में एक जीवंत उदाहरण के तौर पर हमेशा याद किया जाएगा। मोरबी की घटना में जिस कंपनी और उसके मालिक पर गंभीर आरोप हैं, मोरबी में उनके ऊपर भी लोगों को गजब का भरोसा है। यही वजह है कि, मोरबी में हर कोई कह रहा है कि, ज़िम्मेदार लोगों के विरुद्ध कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन जयसुख भाई पटेल को सजा देने की माँग टीवी चैनलों पर पत्रकारों के अलावा राजनीतिक दलों के मुँह से भी बहुत तेज नहीं निकल रही है। इसकी एक वजह यह भी है कि, जयसुख पटेल प्रभावशाली पाटीदार समाज से आते हैं और इस समाज को नाराज करने का साहस कोई राजनीतिक दल करने की स्थिति में नहीं है। और, पाटीदार समाज किस तरह से भारतीय जनता पार्टी के साथ जुड़ा हुआ है, इसका अनुमान इसी तथ्य से लग जाता है कि, पाटीदार अनामत आंदोलन समिति के खुले विरोध के बावजूद पिछले विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी सत्ता हासिल करने में कामयाब रही। और, 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले पाटीदार आंदोलन का चेहरा बनकर कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष बनने में सफलता प्राप्त करने वाले हार्दिक पटेल को भी यह बात समझ में गई कि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ही गुजरात और देश का विकास कर सकते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर बेतुकी टिप्पणियाँ करके चर्चित हुए अल्पेश ठाकोर तो पहले ही भारतीय जनता पार्टी के साथ चुके हैं। यह अलग बात है कि, विधानसभा उपचुनाव में अल्पेश ठाकोर को हार का सामना करना पड़ा। पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस नेता राहुल गांधी गुजरात में भारतीय जनता पार्टी को चुनौती दे रहे थे तो यही दोनों चेहरे थे, जिनके जोर से कांग्रेस के सत्ता में आने की उम्मीद राहुल गांधी को बंध गई थी। 

2017 के विधानसभा चुनाव में राहुल गांधी ने हार्दिक पटेल और अल्पेश ठाकोर के बनाए माहौल पर जो मेहनत की, उसका लाभ कांग्रेस को मिला था और कांग्रेस पार्टी को 77 सीटें मिल गईं और भाजपा विधानसभा में सीटों का शतक लगाने से चूक गई। यह अलग बात है कि, 2017 से 2022 आते अब तक 18 विधायक कांग्रेस का साथ छोड़ चुके हैं और उनमें से भाजपा में शामिल होकर चुनाव जीतने वाले विधायकों ने भाजपा विधायकों की संख्या फिर से 111 कर दी है। राजनीतिक विश्लेषकों के लिए यही गुजरात चुनाव के परिणामों का एक सटीक नमूने के तौर पर देखा जा सकता है। और, कांग्रेस की इस दुर्दशा का अनुमान राहुल गांधी और आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल दोनों को हो चला है। इसीलिए अरविंद केजरीवाल पूरी ताक़त गुजरात में झोंक दे रहे हैं तो राहुल गांधी पूरी तरह से चुनाव से दूर होकर भारत जोड़ो यात्रा के आवरण में हैं। अरविंद केजरीवाल ने माहौल बहुत ज़बरदस्त बना रखा है और इसकी वजह से धुर कांग्रेसी भी कहने लगे हैं कि, आम आदमी पार्टी अगले चुनाव में बेहतर करेगी। कांग्रेसियों के साथ भाजपा नेता भी आम आदमी पार्टी के लिए अगले चुनाव में बेहतर करेगी, कहने लगे हैं तो यह कांग्रेस के लिए इसी चुनाव में और भारतीय जनता पार्टी के लिए अगले चुनाव के लिहाज से चिंता की वजह होनी चाहिए। गुजरात भाजपा के एक नेता का कहना है कि, अमित शाह ने पार्टी मुख्यालय कमलम में भाजपा की चुनाव समिति की बैठक में स्पष्ट कहा कि, हमारा मुक़ाबला इस बार कांग्रेस से ही है, लेकिन अगले चुनाव की चुनौती आम आदमी पार्टी बन सकती है। अब यह अलग बात है कि, जनता की राय से मुख्यमंत्री उम्मीदवार देने के अरविंद केजरीवाल के निर्णय ने आम आदमी पार्टी के माहौल को खराब किया है। पत्रकार से नेता बने इशुदान गढ़वी को मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित किया तो भाजपा के निशाने पर रहे गोपाल इटालिया की नाराजगी भले सामने नहीं आई, लेकिन आम आदमी पार्टी के तीसरे सबसे बड़े चेहरे इंद्रनील राज्यगुरू केजरीवाल का साथ छोड़कर फिर से पुरानी कांग्रेस पार्टी में गए। इंद्रनीला राज्यगुरु पिछले विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री विजय रुपानी के खिलाफ लड़े थे और सबसे अमीर प्रत्याशी थे। कहा जाता है कि, केजरीवाल की पार्टी के चुनावी अभियान को सबसे बड़ी आर्थिक मदद राज्यगुरू से ही मिल रही थी। इसके अलावा दिल्ली में प्रदूषण की ख़बरों ने भी गुजरात में आम आदमी पार्टी का माहौल बहुत खराब किया है। दीपावली के जब दिल्ली में केजरीवाल सरकार ने पटाखों पर प्रतिबंध के साथ छह महीनेजेल भी भेजने की चेतावनी दे दी थी तो अहमदाबाद के साबरमती रिवरफ्रंट पर सुबह-सुबह सैर करते सामने के पार्क में कई बच्चे पटाखे बजा रहे थे। बेधड़क, उनको पर्यावरण की चिंता थी और ही अहमदाबाद की पुलिस की। उनको कतई डर, आशंका नहीं थी कि, उनके पटाखे जलाने से अहमदाबाद का प्रदूषण इतना बढ़ जाएगा कि, उन्हें और अहमदाबाद के दूसरे लोगों को साँस लेने में भी मुश्किल होने लगेगी। ऐसे में दिल्ली से अहमदाबाद जाकर चुनावी रिपोर्ट तैयार करने, चुनावी मन मिजाज समझने की इच्छा रखने वाले हम जैसे पत्रकार, राजनीतिक विश्लेषक के लिए साबरमती रिवरफ्रंट पर यह पटाखेबाजी कई वजहों से आकर्षित कर रही थी। पटाखे फूटने के बाद मैंने उन लोगों से बात की। सारे ही बच्चे मुसलमान थे और सारे बच्चे अभी मतदान की उम्र से कम के थे। मैंने पूछा- चुनावी चर्चा करोगे। सभी ने सकुचाते कहा- नहीं। पूछने पर सबने एक स्वर में बताया कि, भाजप, कांग्रेस, एआईएमआईएम और आम आदमी पार्टी, यह राजनीतिक दल हैं जो, गुजरात के चुनावी मैदान में हैं। पूछने पर सबने बताया कि, माहौल आप का है, लेकिन जीतेगी भाजप ही। गुजरात विधानसभा चुनाव का यही सार है। 


दिल्ली से देश के दूसरे राज्यों का राजनीतिक चित्र कभी स्पष्ट नहीं दिखता। दरअसल, दिल्ली से दिखने वाला, राज्यों का राजनीतिक चित्र असल चित्र का आवरण होता है। बस उतना ही समझ आता है। गुजरात विधानसभा चुनाव को भी दिल्ली से ऐसे ही देखा जा रहा है। अहमदाबाद में कुछ दिन बिताने और गुजरातियों से मिलने, चर्चा करने के बाद एक बात समझ में आने लगी कि, मोदी और भाजपा विरोधी मतों में अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी सेंधमारी कर रही है। अब यह बात अलग है कि, गुजरात, देश के दूसरे राज्यों जैसा नहीं है, इसलिए अरविंद केजरीवाल की शैली वाली राजनीति यहाँ उस तरह से असरकारी नहीं होती, जैसी दिल्ली में हुई या फिर बाद में पंजाब में। गुजरात में नरेंद्र मोदी पर लोगों को अगाध विश्वास है और गुजरातियों को लगता है कि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वजह से उनके राज्य की प्रतिष्ठा कई गुना बढ़ी है। साथ ही देश के विकास में गुजरात मॉडल का योगदान उन्हें अधिक गौरवान्वित करता है। यही वजह है कि, कई तरह की समस्याओं के बीच जब कोई भी सवाल करता है कि, इस बार भाजपा आएगी या नहीं तो जवाब एक ही आता है कि, आएगा तो मोदी ही। नरेंद्र मोदी ने पहले मुख्यमंत्री रहते और फिर प्रधानमंत्री रहते गुजरात के विकास की यात्रा को लगातार तेजी दी है। चुन-चुनकर गुजरात के हर हिस्से में विकास की बुनियाद मजबूत की है। आज गुजरातियों के लिए गांधी, पटेल के बाद नरेंद्र मोदी ही गर्वी गुजरात के चेहरे के तौर पर स्पष्ट दिख रहे हैं और ऐसे में जब गोपाल इटालिया या कोई भी नेता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी माँ के बारे में अपशब्दों का प्रयोग करता है तो गुजराती उससे किस हद तक चिढ़ने लगता है, इसका अनुमान लगा पाना मुश्किल है। नर्मदा पर बांध बनाने और उसका जल गुजरात लाने के लिए नरेंद्र मोदी के प्रयासों को गुजरात की जनता भागीरथ प्रयास के तौर पर ही देखती है। टाटा की नैनो का गुजरात आना हो या फिर फॉक्सकॉन-वेदांता की सेमीकंडक्टर यूनिट का, गुजरात के लोगों को लगता है कि, नरेंद्र मोदी की वजह से गुजरात में ऐसा माहौल तैयार हुआ है कि, उनके गुजरात के मुख्यमंत्री रहने पर भी देश-दुनिया की हर कंपनी को निवेश के लिए सबसे सुरक्षित राज्य गुजरात ही दिखता है। ब्रांड मोदी पर गुजरातियों का भरोसा बना हुआ है और हताशा में राहुल गांधी की कांग्रेस के सुसुप्तावस्था में होने से अरविंद केजरीवाल का बनाया माहौल भारतीय जनता पार्टी के लिए स्थितियाँ अधिक बेहतर कर रहा है। गुजरात में भारतीय जनता पार्टी दो दशक की सबसे बड़ी जीत की तरफ बढ़ती दिख रही है। 

(यह लेख आज दैनिक जागरण में छपा है )

2 comments:

  1. वो आजकल एक जुमला हैं न 'मोदी है तो सब मुमकिन है'

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