गांधी के मुंह में मरते समय राम ठेल देने से किसका भला हुआ


महात्मा गांधी का इस्तेमाल उनके मरने के बाद भी हो रहा है। कौन कर रहा है किसके भले के लिए हो रहा है। या सिर्फ मरे हुए गांधी को जिंदा रखकर उनका इस्तेमाल करने की कोशिश चल रही है। और, गांधी की महानता भले ही पूरे देश के काम आ रही हो। लेकिन, सच्चाई यही है कि धोती में मुस्कुराते गांधी की मुस्कान वाली फोटो पर हार डालकर सबसे ज्यादा फायदा कांग्रेस को मिला है। और, इसीलिए देश में गांधी के मुंह से निकले आखिरी ‘हे राम’ का सबसे ज्यादा प्रचार-प्रसार भी कांग्रेस ने ही किया।

कुछ दिन पहले ही गांधी के मरने के आखिरी शब्द ‘हे राम’ की जगह ‘राम-राम’ में बदले। और, अब गांधीजी के साथ 1943 से 1948 तक काम करने वाले एक गांधीवादी कह रहे हैं कि गोली लगने के बाद महात्मा गांधी के मुंह से कोई शब्द नहीं निकला। वो, हतप्रभ रह गए थे और तुरंत उनकी मृत्यु हो गई थी। चेन्नई में रहने वाले 85 साल के कल्याणम वेंकटरमण का कहना है कि गांधी का पहले ही मोहभंग हो चुका था।

वेंकटरमण कहते हैं कि जब नाथूराम गोडसे ने गांधीजी पर पांच गोलियां दागीं वो, उस समय गांधीजी से मुश्किल से आधा मीटर की दूरी पर खड़े थे। वेंकटरमण का कहना है कि गांधीजी तुरंत गिर गए उनके मुंह से कुछ भी नहीं निकला। वो, सवाल भी खड़ा करते हैं कि इतने नजदीक से लगी गोली के बाद किसी को कुछ बोलने का मौका भला कैसे मिल सकता है।

फिर सवाल ये है कि आखिर गांधी के मुंह में आखिरी शब्द हे राम या फिर राम-राम किसने ठूंसा। और, इससे किस तरह का फायदा देखा गया। गांधी के पक्ष-विपक्ष में चल रह शोधों में गांधी के मुंह में ठूंसे गए आखिरी शब्द को भी शामिल किया जाना चाहिए।