ये राज ठाकरे और उनके समर्थकों के पढ़ने के लिए है

राज ठाकरे की ठकुरैती इस समय शांत हो गई है। लेकिन, मराठी अस्मिता के नाम पर कब वो जाग जाए ये कोई नहीं जानता। मैं दैनिक जागरण अखबार में इलाहाबाद का पन्ना पढ़ रहा था। मैं खुद भी इलाहाबाद का हूं और मेरे मोहल्ले दारागंज के ही मराठियों से जुड़ी खबर है। मुझे आजतक अंदाजा नहीं था कि मेरे मोहल्ले में ही 1000 से ज्यादा मराठी रहते हैं। ये मराठी क्या सोचते हैं पढ़िए