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Saturday, October 03, 2009

बच्चे-बच्चे को जो बात पता है वो, सीएम साहब को नहीं पता!

बहुत गलत हुआ। करण जौहर को राज ठाकरे के घर माफी मांगने नहीं जाना चाहिए था। करण को सीधे थाने जाना चाहिए था। थाने जाना चाहिए था- किसलिए। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण साहब कह रहे हैं कि राज ठाकरे और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के खिलाफ करण जौहर को पुलिस थाने में जाकर रिपोर्ट लिखानी चाहिए थी। क्या रिपोर्ट लिखाते कि राज ठाकरे को wake up sid! में बांबे को बांबे कहने पर एतराज है। अब वो कह रहे हैं कि मुंबई करो।


अच्छा मान लो कि करण जौहर ये रिपोर्ट लिखा भी देते तो, क्या होता। होता ये कि चुनावी मौसम में MNS के लफंगे कार्यकर्ताओं को गुंडागर्दी का मौका मिल जाता वो, मराठी माणुस का स्वाभिमान बचाने के झूठे तर्क के नाम पर। आप क्या कर पाते चव्हाण साहब कुछ नहीं। बस इतना हो पाता कि राज और उद्धव दोनों मराठी माणुस को लेकर लड़ते तो, कट्टर मराठी माणुस वोटबैंक बंट जाता और आपकी कांग्रेस फिर से सत्ता में आ जाती। इसके अलावा थोड़ा बहुत ये होता कि एकाध घंटे के लिए शायद राज ठकरे को अदालत तक ले जाया जाता। बिना दमड़ी खर्च किए राज ठाकरे को चुनाव के समय निर्विरोध घंटों की टीवी कवरेज लाइव मिल जाती।


अगर आपको अब भी ये भ्रम है कि राज ठाकरे की गुंडागर्दी के खिलाफ आप कुछ कर पाने की हैसियत में हैं तो, मामलों की तो, फेहरिस्त है। क्यों, कुछ कर नहीं पा रहे हैं। अभी ताजा मामले को ज्यादा समय नहीं हुआ है जब एक मराठी महिला के शादी से इनकार करने पर राज ठाकरे की MNS शैतानों ने मिलकर उसके साथ बलात्कार किया फिर उसे आग के हवाले कर दिया। MNS के गुंडों की नीच हरकत की ये कोई पहली घटना नहीं है। और, अब तो, आप मुख्यमंत्री हैं भूल गए क्या कि आपके पहले के मुख्यमंत्री विलासराव देशमुख- जो, अपने को शरद पवार से भी बड़ा मराठा क्षत्रप साबित करने की हर कोशिश में जुटे रहते हैं- के समय राज ठाकरे ने क्या नंगा नाच किया था।


कई दिनों की मारामारी के बाद गिरफ्तारी भी हुई तो, गेस्ट हाउस में ससम्मान रखा गया। विक्रोली की अदालत में आते-आते जैसे सरकार ने आत्मसमर्पण सा कर दिया था कि महाराष्ट्र में भले कांग्रेस की सरकार है। सड़कों पर राज का ही राज चलेगा। राज ठाकरे की गिरफ्तारी और जमानत के कांग्रेसी स्क्रिप्टेड ड्रामे का सच लाइव टेलीविजन के जरिए पूरे देश ने देखा। कांग्रेस-NCP का घोषणा पत्र कह रहा है कि 2012 तक पूरे राज्य में बिजली नहीं कटेगी। महाराष्ट्र में गलती से एक बार सत्ता में पहुंचे शिवसेना-भाजपा गठजोड़ की सरकार छोड़ दें तो, लगातार कांग्रेसी ही राज कर रहे हैं। ऐसे कांग्रेसी शासन में महाराष्ट्र का असली हाल खुद ही पढ़ लीजिए तब कांग्रेसी वादों पर भरोसा कीजिए।


नए साल पर गुजरात की एक युवती के साथ हुए हद दर्जे की नीचता और उसके बाद ऐसे संवेदनशील मुद्दे को भी राज ठाकरे ने मराठी-उत्तर भारतीय बना दिया था। उस समय भी कांग्रेसी सरकार कुछ करने के बजाए राज ठाकरे को शांत करने में जुट गई थी। अब मुख्यमंत्री चव्हाण कह रहे हैं तो, शायद इसलिए कह रहे होंगे कि करण जौहर तो बड़े आदमी हैं उनकी इज्जत तो सरकार बचा लेती। लेकिन, भइया करण जौहर बहुत पैसा लगाकर फिल्म बनाते हैं। धंधा करते हैं जानते हैं कि जब पूरी मुंबई को राज ठाकरे के गुंडे बंधक बना सकते हैं तो, सिर्फ सिनेमाहालों में तांडव कितनी बड़ी हात है। जया बच्चन ने सही कहाकि करण जौहर ने सही काम किया। आखिर पहले बच्चन परिवार भी तो, राज ठाकरे की आग में झुलस चुका है। वो, भी कोई छोटे लोग तो, थे नहीं। सरकार निकम्मी हो तो क्या छोटा-क्या बड़ा सबको अन्याय सहना पड़ता है। महाराष्ट्र में तो बहुत सालों  से यही चल रहा है।

Saturday, February 09, 2008

एक गुंडा ‘राज’ के साये में कई गुंडे ‘राज’ कर रहे हैं

कहावत है चोर-चोर मौसेरे भाई लेकिन, यही कहावत महाराष्ट्र में अंदाज बदल लेती है, यहां पर वही कहावत गुंडा-गुंडा चचा-भतीजा में तब्दील हो जाती है। और, अब तो हाल ये है कि पूरे राज्य के नेता एक दूसरे के भाई-भतीजे नजर आ रहे हैं। क्या पक्ष, क्या विपक्ष। सरकार और सरकार से बाहर किसी में कोई भेदभाव नहीं है। सब एक दूसरे की गुंडई बढ़ाने में मदद कर रहे हैं।

लेकिन, गुंडा ‘राज’ में भी पूरी विनम्रता के दर्शन हो रहे हैं। पुणे में एक समारोह के बाद जब आयोजकों ने राज ठाकरे को वहां आने के लिए धन्यवाद दिया तो, राज ने पूरी विनम्रता से इसका सेहरा श्रीमान राजाधि ‘राज’ प्रदेश के मुख्यमंत्री विलासराव देशमुख के सिर पर सजा दिया। राज ने स्वीकारा कि अगर देशमुख साहब ने उन्हें गिरफ्तार करवा दिया होता तो, वो आयोजन में शामिल न हो पाते। वैसे राज ठाकरे पुलिस ‘राज’ मुंबई के पुलिस कमिश्नर डी एन जाधव को उनका प्रशस्ति पत्र सार्वजनिक मंच से देना या तो भूल गए या फिर सरकारी नौकर छोड़कर बख्श दिया।

सेना की शुरुआती तालीम के दिनों से ही गुंडा ‘राज’ शुरू हो गया था। शुरू में बड़े ठाकरे, जिनका मुंबई में किसी भी कीमत पर कोई ‘बाल’ भी बांका नहीं कर सकता, को गुंडा ‘राज’, ठाकरे ‘राज’ का ही हिस्सा लगता था। लगता था सेना बढ़ रही है। भले ही कोई दुश्मन न हो लेकिन, सेना का झंडा फहरा रहा था। किसी किले पर न सही, दादर के शिवसेना भवन पर ही सही। लेकिन, ठाकरे ‘राज’ से बाहर होकर गुंडा ‘राज’ की बातें देश के सबसे बड़े स्वनामधन्य मराठी नेता को 80 साल की उम्र में बुरी लगने लगी हैं।

ठाकरे के परम मित्र बिग बी यानी बॉलीवुड के ‘राज’ अमिताभ बच्चन को गंडा ‘राज’ मुंबई, महाराष्ट्र विरोधी बताने लगा तो, ‘राज’ के जनक, बाल ठाकरे से रहा नहीं गया वो, कह बैठे कि गुंडा ‘राज’ गलत है। नाम नहीं लिया किसी का लेकिन, ‘सामना’ मिलते ही कह दिया गुंडा ‘राज’ गलत है। आखिर मामला बॉलीवुड के राजाधि‘राज’ का था। विनम्र बच्चन की अनुभवी पारखी आंखों ने अभी हफ्ते-दो हफ्ते पहले ही तो पहचाना था कि नया ठाकरे‘राज’ कला की दुनिया में परचम लहराएगा।

गृह‘राज’ संभालने वाले उपमुख्यमंत्री आर आर पाटील एनसीपी से हैं। उन्हें पता है मराठी‘राज’ ठाकरे का हो गया और उत्तर भारतीय ‘राज’ कांग्रेस का तो, मुश्किल हो जाएगी। वो, फिर दहाड़े, ठीक उसी तरह से जैसे 31 दिसंबर की रात दो गुजराती लड़कियों के साथ कुछ मराठी बालकों की छेड़खानी के बाद दहाड़े थे। ये डायलॉग आप लोग भी याद कर लीजिए। आगे कई ऐसे मौके आएंगे जब आप पाटील के मुंह से ये रटा-रटाया डायलॉग सुनेंगे। ‘अपराधी कोई भी हो उसे छोड़ा नहीं जाएगा। ऐसा सबक सिखाया जाएगा कि आगे से कोई भी ऐसी हरकत करने से डरेगा।’ गृह‘राज’ पाटील साहब ने लगे हाथ ये भी कह दिया कि अमर सिंह बहुत बोलते हैं। उत्तर भारतीयों की पिटाई के लिए जिम्मेदार असर सिंह भी हैं।

वैसे उत्तर प्रदेश के गुंडा ‘राज’ की कमान कुछ महीने पहले ही अमर सिंह और उनके भाई मुलायम सिंह यादव के हाथ से छूटी है। अब हर कोई उन्हें गुंडा लगता है। और, उत्तर प्रदेश से लेकर महाराष्ट्र तक गुंडा ‘राज’ दिखता है। उत्तर प्रदेश में मायावती का गुंडा ‘राज’ तो, महाराष्ट्र में तो, गुंडा ‘राज’ है ही। वैसे अमर सिंह और मुलायम सिंह यादव की सपा ने मुंबई में ‘राज’ के लिए गुंडा ही तलाशा था। अबू आजमी पर दाउद जैसे गुंडों के राजा से संपर्क रखने का आरोप लगते रहे हैं। अब ये बात गुंडा ‘राज’ की पार्टी के लोग भी कह रहे हैं। आजमी ने पहले लाठी भांजी लेकिन, जब सामने मुस्तैदी से ‘राज’ की सेना आ गई तो, दुबक लिए। पिट गए ‘राज’ के ताज में रोड़ा बनने वाले।

‘राज’ करने के लिए बाल ठाकरे को अब उत्तर भारतीयों का भी साथ चाहिए। उद्धव के 'राज' के लिए सेना तो तैयार पहले ही हो चुकी है लेकिन, 'राज' में थोड़ी मुश्किलें आ रही हैं। इसलिए सेना में उत्तर भारतीयों को भी शामिल करने की कोशिश हो रह है। इसके लिए एक बड़े उत्तर भारतीय (अमिताभ बच्चन के लिए ये विशेषण शर्मनाक है) के पक्ष में उतरने से बेहतर भला क्या हो सकता है। उधर, ‘राज’ के लिए देशमुख की कांग्रेस और पाटील की एनसीपी बाल ठाकरे से मराठियों की सेना छीनकर उसका बड़ा हिस्सा ‘राज’ को थमाना चाहती है। ‘राज’ की भी पुरानी आदत सेना साथ लेकर चलने की है। अब शिवाजी की सेना तो मिलने से रही। इसलिए नई सेना बनानी है। सेना में जोश भरना है, सेना को किसी के खिलाफ लड़ाई के लिए तैयार किए बिना सेना मे साहस नहीं आता और इस सबके बिना ‘राज’ नहीं आएगा। यहां तक कि 31 दिसंबर की रात छेड़खानी करने वालों को पहले तो उत्तर भारतीयों की करतूत बता दिया। लेकिन, जब वो मराठी माणुस निकले तो, राज उनके पक्ष में मैदान उतर आए। उत्तर भारतीयों को दुश्मन सेना बताकर ‘राज’ करने की कोशिश जारी है। नारायण राणे, छगन भुजबल भी तो ‘राज’ के इसी फॉर्मूले से अब तक राज कर रहे हैं।

गुंडा ‘राज’ के पक्ष में देशमुख, पाटील, पवार नजर आ रहे हैं तो, ‘राज’ बचाने के लिए बाल ठाकरे, अमिताभ बच्चन, संजय निरुपम और भोजपुरी फिल्मों के कलाकार दिख रहे हैं। और, इन दोनों के ‘राज’ में सैंडविच बन गए हैं। इस गुंडा ‘राज’ में कुछ गरीब उत्तर भारतीयों की रोजी-रोटी पर हमला हुआ। सौ-पचास को लात-जूते मिलीं और 25-50 मराठी माणुस पुलिस रिकॉर्ड में आ गए। अब ये कुछ और नहीं कर पाएंगे। अब ये सिर्फ किसी की सेना में ही काम कर पाएंगे। अब ये सिर्फ झूठी अस्मिता बचाने के बहकावे में आकर बार-बार किसी न किसी के लिए गुंडा ‘राज’ कायम करेंगे। और, इनके बाद की मराठी माणुस की पीढ़ी उत्तर भारतीयों के यहां आने की नहीं, अपने ही बाप-दादाओं के गुंडा ‘राज’ कायम करने की कोशिश करने वाली सेना में शामिल होने का खामियाजा भुगतेगी।

जिम में रामधुन, जन्माष्टमी प्रभाव

  सुप्रभात राम राम भारत अद्भुत है और हम भारतीय भी आमतौर पर सुबह की सैर ही मुझे रुचती है, लेकिन बीच-बीच में जिम में भी जाता हूं। जिम में ट्र...